TET पर सुप्रीम फैसला: शिक्षकों को परीक्षा पास करनी ही होगी, दो नहीं अब तीन साल का मिला समय

नई दिल्ली।
देशभर के लाखों स्कूली शिक्षकों को अब शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की कसौटी पर खुद को साबित करना होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने इन-सर्विस शिक्षकों को TET से छूट देने की मांग वाली रिव्यू पिटीशनों को खारिज करते हुए साफ कर दिया है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करना जरूरी है।

इस फैसले का असर मध्यप्रदेश के डेढ़ लाख से ज्यादा शिक्षकों सहित देशभर के उन शिक्षकों पर पड़ेगा, जिन्हें अब तक पुराने नियमों के आधार पर राहत मिली हुई थी।

बच्चों का भविष्य पहले, सेवा शर्तें बाद में: कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में बच्चों का हित सर्वोपरि है। शिक्षक की योग्यता सीधे बच्चों की पढ़ाई और भविष्य से जुड़ी है। इसलिए TET केवल नौकरी से जुड़ी औपचारिकता नहीं, बल्कि बेहतर शिक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।

हालांकि कोर्ट ने माना कि बड़ी संख्या में शिक्षकों पर अचानक असर पड़ने से शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसी आधार पर राहत देते हुए परीक्षा पास करने की समय-सीमा 2 साल से बढ़ाकर 3 साल कर दी गई है।

31 अगस्त 2028 तक आखिरी मौका

अब इन-सर्विस शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक TET पास करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इसके बाद अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा।

साथ ही सभी राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि शिक्षकों को पर्याप्त अवसर देने के लिए साल में कम से कम दो बार TET परीक्षा आयोजित की जाए।

पुराने शिक्षकों पर भी लागू होगा आदेश

कोर्ट ने अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट मामले में दिए गए अपने फैसले को बरकरार रखा है। पहले सितंबर 2025 के आदेश में शिक्षकों को दो साल का समय दिया गया था, जिसे अब एक साल और बढ़ाया गया है।

शिक्षक संगठनों ने खोला मोर्चा

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शिक्षक संगठनों में नाराजगी है। संगठनों का कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर नई पात्रता शर्त लागू करना उचित नहीं है।

ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन और अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने फैसले की समीक्षा करने और आगे कानूनी लड़ाई जारी रखने की बात कही है। संगठन आरटीई एक्ट में संशोधन और क्यूरेटिव याचिका जैसे विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।

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