बस्तर में नक्सलवाद पर महामंथन, 19 मई को अमित शाह चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ करेंगे उच्चस्तरीय बैठक, कई मुद्दों पर होगा फोकस
नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक जंग छेड़ने और बस्तर के विकास को गति देने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 19 और 20 मई को छत्तीसगढ़ के बस्तर में रहेंगे। यह दौरा सुरक्षा और विकास दोनों ही दृष्टियों से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जगदलपुर में आयोजित होने वाली मध्य क्षेत्रीय परिषद की उच्चस्तरीय बैठक में गृह मंत्री अमित शाह के साथ छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री भी शामिल होंगे।
नक्सल उन्मूलन अभियान के बाद पहली बार बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में इस स्तर की बैठक आयोजित की जा रही है। लंबे समय तक देश के सबसे संवेदनशील इलाकों में गिने जाने वाले बस्तर में अब सुरक्षा स्थिति में सुधार आया है। केंद्र सरकार इस सुधार को एक सकारात्मक संकेत के रूप में प्रस्तुत कर रही है।
बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर होगा फोकस
बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित चर्चा होगी। नक्सलवाद के खिलाफ संयुक्त रणनीति पर विचार किया जाएगा। राज्यों के बीच सुरक्षा समन्वय को मजबूत करने पर जोर रहेगा। सीमावर्ती जिलों में खुफिया साझेदारी बढ़ाने की योजना बनेगी। सड़क, स्वास्थ्य और संचार जैसी आधारभूत परियोजनाओं की समीक्षा की जाएगी। बस्तर में चल रहे विकास कार्यों की प्रगति का भी जायजा लिया जाएगा।
इस बैठक में जिन राज्यों की भागीदारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, उनमें छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड शामिल हैं। केंद्रीय गृह मंत्री इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ आंतरिक सुरक्षा, प्रशासनिक समन्वय और क्षेत्रीय विकास के मुद्दों पर चर्चा करेंगे। अमित शाह का यह दौरा केवल सुरक्षा समीक्षा तक सीमित नहीं माना जा रहा है।
कई परियोजनाओं का निरीक्षण भी कर सकते हैं गृह मंत्री
जानकारी मिली है कि गृह मंत्री बस्तर में चल रही कई प्रमुख विकास परियोजनाओं का निरीक्षण भी कर सकते हैं। इस दौरान सुपर स्पेशलिटी अस्पताल समेत विभिन्न परियोजनाओं के उद्घाटन और लोकार्पण की संभावना भी जताई जा रही है। केंद्र सरकार पिछले कुछ वर्षों से सुरक्षा और विकास साथ-साथ की रणनीति पर काम कर रही है। बस्तर प्रवास के दौरान शाह स्थानीय प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों और जनप्रतिनिधियों के साथ अलग-अलग बैठकों में क्षेत्र की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि बस्तर जैसे क्षेत्र में केंद्रीय गृह मंत्री और कई मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं है। यह एक मजबूत राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक संदेश भी है। इससे यह संकेत देने की कोशिश होगी कि सरकार अब बस्तर को संघर्ष के नहीं, बल्कि विकास और स्थिरता के नए मॉडल के रूप में स्थापित करना चाहती है।
बैठक का संभावित एजेंडा
बैठक का संभावित एजेंडा भी तय किया गया है। इसमें 2026 तक नक्सलवाद उन्मूलन का रोडमैप तैयार किया जा सकता है। सुरक्षा कैंपों और सड़क नेटवर्क के विस्तार पर भी चर्चा होगी। आदिवासी क्षेत्रों में रोजगार और शिक्षा योजनाओं को बढ़ावा देने पर विचार किया जाएगा। ड्रोन और आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी को मजबूत करने की योजना है। केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय व्यवस्था स्थापित करने पर भी ध्यान दिया जाएगा। बस्तर में होने वाली यह उच्चस्तरीय बैठक आने वाले समय में देश की आंतरिक सुरक्षा नीति और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विकास मॉडल के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा तय कर सकती है।
















