मोदी कैबिनेट बैठक में अहम फैसले, किसानों को राहत और इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा
केंद्र सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाने और प्रमुख औद्योगिक व कृषि क्षेत्रों को अभूतपूर्व मजबूती प्रदान करने के उद्देश्य से कई ऐतिहासिक आर्थिक फैसलों पर मुहर लगाई है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट की बैठक के बाद इन महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी दी। इन फैसलों का मुख्य केंद्र विमानन क्षेत्र, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई), कृषि नीतियां और समुद्री बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) हैं, जो देश के समग्र विकास और व्यापक रोजगार सृजन को नई रफ्तार देने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
हालिया कैबिनेट बैठक में कुल लगभग 1.52 लाख करोड़ रुपये के व्यय को मंजूरी मिली है। यह विशाल राशि विभिन्न विकास परियोजनाओं और योजनाओं पर खर्च की जाएगी, जिससे अर्थव्यवस्था के हर कोने को संबल मिलेगा। किसानों के हित में ‘कपास क्रांति मिशन’ के तहत कपास उत्पादन बढ़ाने के लिए 5,659 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2026-27 सीजन के लिए गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) से जुड़ा महत्वपूर्ण फैसला भी लिया गया है, जो गन्ना किसानों के लिए राहत लेकर आएगा। आर्थिक गतिविधियों को गति देने और उद्योगों को सहारा देने के लिए ECLGS-5 योजना के तहत 18,100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह कदम वैश्विक उथल-पुथल के बीच घरेलू उद्योगों को स्थिरता प्रदान करेगा।
कई महत्वपूर्ण रेलवे परियोजनाओं को मिली मंजूरी
बुनियादी ढांचे के मोर्चे पर भी बड़े कदम उठाए गए हैं। गुजरात के वडीनार में शिप रिपेयर सुविधा के लिए 1,570 करोड़ रुपये और कई महत्वपूर्ण रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी मिली है। इनमें नागदा-मथुरा, गुंटकल-वाडी और बुरहवाल-सीतापुर रेल लाइनों का विस्तार शामिल है, जिन पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। ये परियोजनाएं परिवहन क्षमता में वृद्धि कर आर्थिक विकास को तेज करेंगी। तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में सेमीकंडक्टर सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए क्रिस्टल मैट्रिक्स लिमिटेड और सुची सेमिकॉन प्राइवेट लिमिटेड की इकाइयों में निवेश की स्वीकृति भी मिली है। इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट को मजबूत करने से जुड़ा एक नीतिगत निर्णय भी लिया गया है। इन फैसलों से कृषि, उद्योग और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में व्यापक और सकारात्मक असर देखने को मिलेगा।
सरकार ने दिखाई ‘कपास क्रांति’ पहली को दिखाई हरी झंडी
देश के 32 लाख कपास किसानों के भाग्य को बदलने के लिए कैबिनेट ने ‘कपास क्रांति’ नामक एक ऐतिहासिक पहल को हरी झंडी दिखाई है। मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि भारत वर्तमान में 297 लाख गांठ उत्पादन के साथ दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कपास उत्पादक देश है। हालांकि, वर्ष 2030-31 तक कपास की घरेलू मांग बढ़कर 450 लाख गांठ तक पहुंचने का अनुमान है, जिसे पूरा करना अब सरकार की प्राथमिकता में है। इस बढ़ती मांग को पूरा करने और कपास क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए, सरकार ने 5,669 करोड़ रुपये की एक विस्तृत परियोजना को मंजूरी दी है। यह विशाल फंड मुख्य रूप से अनुसंधान, उत्पादन तकनीकों को उन्नत करने और किसानों को नए जमाने के फाइबर अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने पर खर्च किया जाएगा, जिससे गुणवत्ता और उत्पादकता दोनों में वृद्धि होगी।
सेमीकंडक्टर सेक्टर को बड़ा बढ़ावा, 3,936 करोड़ की परियोजना मंजूर
तकनीकी और समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर भी सरकार ने बड़े रणनीतिक कदम उठाए हैं। कैबिनेट ने 3,936 करोड़ रुपये की कुल परियोजना लागत के साथ ‘क्रिस्टल’ और ‘सूचि’ नामक दो नई सेमीकंडक्टर इकाइयों की स्थापना को मंजूरी दी है। ये इकाइयां भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगी। इसके साथ ही, समुद्री बुनियादी ढांचे को विश्वस्तरीय बनाने के लिए गुजरात के वडीनार में एक अत्याधुनिक जहाज मरम्मत सुविधा स्थापित करने का भी फैसला लिया गया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस परियोजना के लिए 1,570 करोड़ रुपये का परिव्यय निर्धारित किया गया है, जो भारत की समुद्री मरम्मत क्षमताओं को उल्लेखनीय रूप से मजबूत करेगा और विदेशी डॉकयार्ड पर हमारी निर्भरता को कम करेगा।
भू-राजनीतिक उथल-पुथल के मौजूदा परिदृश्य का संज्ञान लेते हुए, सरकार ने घरेलू उद्योगों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने का भी निर्णय लिया है। अश्विनी वैष्णव ने विशेष रूप से बताया कि पश्चिम एशिया में चल रहे मौजूदा संघर्ष के मद्देनजर एक महत्वपूर्ण ‘आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना’ (ECLGS) को स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। यह योजना वैश्विक संकट के समय में उद्योगों को नकदी की कमी का सामना करने से रोकेगी और उनके संचालन को सुचारू रूप से जारी रखने में मदद करेगी, जिससे अर्थव्यवस्था की लचीलापन बढ़ेगी।
इन रणनीतिक फैसलों का विभिन्न क्षेत्रों पर गहरा सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। कृषि क्षेत्र में, ‘कपास क्रांति’ के तहत 5,669 करोड़ रुपये के निवेश से उत्पादन तकनीक और अनुसंधान में अभूतपूर्व वृद्धि होगी, जिससे भारत 2030-31 तक 450 लाख गांठ कपास की अनुमानित मांग को सफलतापूर्वक पूरा करने में सक्षम होगा। तकनीकी क्षेत्र में, 3,936 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले ‘क्रिस्टल’ और ‘सूचि’ प्रोजेक्ट्स से भारत सेमीकंडक्टर हब बनने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ेगा, जिससे उच्च-तकनीकी विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा। समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर के संदर्भ में, वडीनार में जहाज मरम्मत सुविधा से भारत के बंदरगाहों की क्षमता बढ़ेगी और विदेशी डॉकयार्ड पर हमारी निर्भरता उल्लेखनीय रूप से कम होगी, जिससे देश की समुद्री अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा। सरकार के ये दूरदर्शी और रणनीतिक फैसले कृषि, तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता हासिल करने की एक स्पष्ट दिशा तय करते हैं। ‘कपास क्रांति’ के जरिए किसानों की आय बढ़ाने से लेकर सेमीकंडक्टर मिशन और वडीनार इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट तक, ये कदम न केवल भविष्य की घरेलू मांग को पूरा करेंगे, बल्कि वैश्विक पटल पर भारत को एक मजबूत, स्थिर और प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था के रूप में भी स्थापित करेंगे, जिससे देश की प्रगति सुनिश्चित होगी।
















