नीमच नपा : नियमों को ताक पर रख शराब कारोबारी को सौंप दी करोड़ों की संपत्ति,विधानसभा में गूंज

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नीमच। स्थानीय नगर पालिका परिषद के 10 कमरों वाले एक भवन को मनमाने तरीके से एक शराब कारोबारी को आवंटित करने का मामला सामने आया। मामला विधानसभा में गूंजने के बाद स्थानीय प्रशासन सक्रिय हुआ।

📌 बिना मंजूरी 30 साल की लीज, परिषद और कलेक्टर को रखा अंधेरे में

यह पूरा प्रकरण नीमच नगर पालिका परिषद की बेशकीमती संपत्ति—सरोवर होटल भवन—से जुड़ा है। दस कमरों, एक बड़े हाल और विशाल प्रांगण वाले इस भवन को अशोक कुमार अरोरा के पक्ष में 30 वर्ष की किराया लीज पर दे दिया गया।

हैरानी की बात यह रही कि न तो परिषद से विधिवत अनुमति ली गई और न ही जिला कलेक्टर की स्वीकृति। दस्तावेजों की जांच में नामांतरण और अनुबंध प्रक्रिया में भी गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।

🏛️ विधानसभा में उठा सवाल, मंत्री ने माना-लीज नियमों के विपरीत

गुरुवार को कांग्रेस विधायक मधु भगत ने सदन में लिखित प्रश्न के जरिए मामला उठाया। जवाब में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने स्वीकार किया कि लीज नियमों के विपरीत दी गई।

मंत्री ने तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष, मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) और सहायक राजस्व निरीक्षक को दोषी ठहराते हुए बताया कि संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई प्रचलन में है।

🗂️ पहले किराया, फिर नामांतरण… और आखिर में 30 साल का अनुबंध

* वर्ष 1988 में नगर सुधार न्यास ने भवन तीन साल के किराये पर दिया था।

* 2012 में सहमति पत्र के आधार पर नामांतरण आवेदन प्रस्तुत हुआ और परिषद के संकल्प से स्वीकृत किया गया।

* 17 अप्रैल 2025 को आदेश जारी कर 30 साल की लीज प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

* 25 मई 2025 को 30 वर्षीय किराया अनुबंध निष्पादित कर दिया गया।

* पूरी प्रक्रिया में परिषद की अनुमति और वैधानिक प्रावधानों की अनदेखी सामने आई है।

मंदिर के पास शराब परोसने का आरोप, स्थानीय विरोध तेज

 

सूत्रों के मुताबिक, होटल परिसर और आसपास खुलेआम शराब परोसी जाती रही। खास बात यह है कि सरोवर होटल के समीप एक मंदिर भी स्थित है।

श्रद्धालुओं को असहज स्थिति का सामना करना पड़ रहा था। इस मुद्दे पर स्थानीय विधायक दिलीप सिंह परिहार का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वे मंदिर के पास शराब परोसने का विरोध करते नजर आ रहे हैं।

📚 दस्तावेजों पर पर्दा? शिकायत की तैयारी

राजस्व मंत्री के लिखित उत्तर के साथ संबंधित दस्तावेज विधानसभा पुस्तकालय में रखे जाने की बात कही गई थी, लेकिन वे उपलब्ध नहीं कराए गए।

प्रश्नकर्ता विधायक ने अब विधानसभा अध्यक्ष से शिकायत की तैयारी कर ली है और दस्तावेज छिपाने वालों पर कार्रवाई की मांग की जाएगी।

💰  निष्पक्ष जांच पर टिकी निगाहें

सूत्रों का दावा है कि गुपचुप लीज आवंटन से नगर पालिका परिषद को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ। अब सवाल यह है कि—

-क्या यह अवैध लीज निरस्त होगी?

-क्या संपत्ति फिर परिषद के सुपुर्द की जाएगी?

-दोषियों पर क्या ठोस कार्रवाई होगी?

विधानसभा में मामला गूंजने के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल जरूर है, लेकिन शहर की निगाहें अब निष्पक्ष और समयबद्ध जांच पर टिकी हैं।

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