
नर्मदापुरम का पुराना नाम होशंगाबाद यहां के लोगों की जुबान पर भले ही अब भी चढ़ा हो लेकिन बीते कुछ दशकों के दौरान अंचल की सियासत में बहुत कुछ बदलाव आया है..नर्मदापुरम विधानसभा सीट का सियासी सफर मध्य प्रदेश की सियासत जितना ही पुराना है.. वर्ष 1951 में बनी आजाद मध्य भारत की पहली भोपाल विधानसभा में भी होशंगाबाद ने प्रतिनिधित्व किया..5 साल बाद मध्य प्रदेश का गठन होने पर राज्य की पहली विधानसभा में भी इस सीट का रुतबा कायम रहा और पूर्व विधायक नन्हेलाल ही कांग्रेस से दूसरी बार चुनकर इसमें पहुंचे..इसके बाद के चुनाव में कांग्रेस ने लगातार तीन बार जीत हासिल की..
पुरानी होशंगाबाद सीट में सियासी बदलाव के साथ ही भौगोलिक बदलाव भी हुए..मसलन,2003 तक जिले में इटारसी एक अलग विधानसभा सीट रही..लेकिन 2008 के परिसीमन में इटारसी होशंगाबाद विस क्षेत्र में शामिल हुआ तो सोहागपुर एक नई विधानसभा सीट बनी..पूर्व में सोहागपुर होशंगाबाद का हिस्सा हुआ करता था..क्षेत्र की सियासत में होशंगाबाद के स्व.श्री रामलाल शर्मा परिवार की अहम भूमिका रही है..इस परिवार के सदस्यों ने न केवल राजनीति बल्कि प्रशासनिक क्षेत्र में भी अपनी धाक कायम की..इसी परिवार के केएस शर्मा प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव रहे तो उनके बेटे मनीष शंकर शर्मा भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी रहे..यही नहीं होशंगाबाद विधानसभा के लिए अब तक हुए 14 में से छह बार की विधायिकी शहर के शर्मा परिवार के पास रही…पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ.सीताशरण शर्मा(Photo) पिछले चुनाव में पांचवी बार विधायक चुने गए..बीजेपी में जारी पीढ़ी परिवर्तन के इस दौर में इसी परिवार से पीयूष शर्मा,अभय शर्मा टिकट के अगले दावेदारों में शामिल हैं…वहीं कांग्रेस से स्थानीय नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष अखिलेश खंडेलवाल,भारत सिंह राजपूत,रणवीर पटेल के नाम चर्चा में हैं..