“नर्मदापुरम विधानसभा सीट का सियासी सफर मध्य प्रदेश की सियासत जितना ही पुराना है.. वर्ष 1951 में बनी आजाद मध्य भारत की पहली भोपाल विधानसभा में भी होशंगाबाद ने प्रतिनिधित्व किया..5 साल बाद मध्य प्रदेश का गठन होने पर राज्य की पहली विधानसभा में भी इस सीट का रुतबा कायम रहा और…”
रवि अवस्थी,भोपाल।नर्मदापुरम,पुण्य सलिला रेवा किनारे बसा एक पवित्र व धार्मिक नगर..अनूपपुर के अमरकंटक से आलीराजपुर के सोंडवा तक नर्मदा अपने 1077 किमी लंबे सफर में राज्य के 16 जिलों से होकर गुजरती है..लेकिन नर्मदा किनारे के नगरों में जो महत्व नर्मदापुरम को प्राप्त है,वैसा किसी दूसरे कस्बे,जिले को नहीं..
प्रदेश की 230 विधानसभाओं में कुछ ऐसा ही स्थान नर्मदापुरम विधानसभा सीट (पुराना नाम होशंगाबाद)को भी हासिल है..धर्म,आध्यात्म यहां के वातावरण में रचा-बसा है..शायद यही वजह है कि इस सीट से अब तक ज्यादातर ब्राह्मण विधायक ही चुने गए..फर्क इतना है,कि पिछली सदी यहां कांग्रेस की थी तो 21वीं सदी का मौजूदा दौर बीजेपी का है…
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पवित्र व धार्मिक नगरी है नर्मदापुरम धर्म-आध्यात्म संस्कारों में रचा बसा ब्राहमण वर्ग को मिलता रहा सहयोग अधिकांश इसी वर्ग से चुने गए MLA 20वीं सदी में कांग्रेस रही यहां मजबूत नई सदी का मौजूदा दौर बीजेपी का
……………………………… होशंगाबाद के दिग्गजों ने रचा इतिहास नर्मदापुरम का पुराना नाम होशंगाबाद यहां के लोगों की जुबान पर भले ही अब भी चढ़ा हो लेकिन बीते कुछ दशकों के दौरान अंचल की सियासत में बहुत कुछ बदलाव आया है..नर्मदापुरम विधानसभा सीट का सियासी सफर मध्य प्रदेश की सियासत जितना ही पुराना है.. वर्ष 1951 में बनी आजाद मध्य भारत की पहली भोपाल विधानसभा में भी होशंगाबाद ने प्रतिनिधित्व किया..5 साल बाद मध्य प्रदेश का गठन होने पर राज्य की पहली विधानसभा में भी इस सीट का रुतबा कायम रहा और पूर्व विधायक नन्हेलाल ही कांग्रेस से दूसरी बार चुनकर इसमें पहुंचे..इसके बाद के चुनाव में कांग्रेस ने लगातार तीन बार जीत हासिल की..
यह सिलसिला आपातकाल के बाद हुए 77 के चुनाव में टूटा..तब जनता पार्टी के रमेश बरगले ने कांग्रेस की विधायक प्रत्याशी सुशीला दीक्षित को 7 हजार से अधिक मतों से शिकस्त दी..यह वह दौर था जब कांग्रेस को विधानसभा ही नहीं लोकसभा में भी करारी शिकस्त मिली थी..बहरहाल, 1980 में जनता पार्टी बीजेपी में तब्दील हुई तो इस नए दल के मधुकर हर्णे ने कांग्रेस प्रत्याशी को करारी शिकस्त दी..और इस तरह होशंगाबाद में पहली बार’कमल’खिला..
लेकिन यह सिलसिला ज्यादा दिन कायम नहीं रह सका.. 85 के चुनाव में कांग्रेस ने भी एक अन्य ब्राहम्ण चेहरा अंबिका प्रसाद शुक्ला पर दांव खेला और सीट पर वापसी की.. 1990 में एक बार फिर बीजेपी के मधुकर हर्णे विधायक बने तो अयोध्या मामले व दंगों के बाद 93 में हुए मध्यावधि चुनाव में अंबिका प्रसाद शुक्ला यहां से विधायक बने..दिग्विजय शासन काल की दूसरी पारी यानी 98 में कांग्रेस की सविता दीवान यहां की विधायक बनीं..98 का चुनाव कांग्रेस के लिए अंतिम साबित हुआ..सदी ने करवट बदली..
और इसके बाद हुए चार चुनाव से अब तक बीजेपी यहां से चुनाव जीतती रही है..2003 में मधुकर हर्णे तो 2008 में गिरिजा शंकर शर्मा और इसके बाद के दो चुनाव में उनके भाई डॉ.सीताशरण शर्मा विधायक चुने गए..डॉ शर्मा अपने पहले कार्यकाल में राज्य विधानसभा के अध्यक्ष भी बने…
…………………………………. जानें कब कौन किस दल से जीता
………………………….. 1951 नन्हेलाल कांग्रेस 1957 नन्हेलाल कांग्रेस 1962 सुशीला दीक्षित कांग्रेस 1967 डीएसडी राम किशोर कांग्रेस 1972 सुशीला दीक्षित कांग्रेस 1977 रमेश बरगले जनता पार्टी 1980 मोहनलाल चौधरी कांग्रेस 1985 अंबिकाप्रसाद शुक्ला कांग्रेस 1990 नरसिंह प्रधान बीजेपी 1993 मोहनलाल चौधरी कांग्रेस 1998 सविता दीवान कांग्रेस 2003 मधुकर हर्णे बीजेपी 2008 गिरिजाशंकर शर्मा बीजेपी 2013 सीताशरण शर्मा बीजेपी 2018 सीताशरण शर्मा बीजेपी
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शर्मा परिवार की भूमिका अहम पुरानी होशंगाबाद सीट में सियासी बदलाव के साथ ही भौगोलिक बदलाव भी हुए..मसलन,2003 तक जिले में इटारसी एक अलग विधानसभा सीट रही..लेकिन 2008 के परिसीमन में इटारसी होशंगाबाद विस क्षेत्र में शामिल हुआ तो सोहागपुर एक नई विधानसभा सीट बनी..पूर्व में सोहागपुर होशंगाबाद का हिस्सा हुआ करता था..क्षेत्र की सियासत में होशंगाबाद के स्व.श्री रामलाल शर्मा परिवार की अहम भूमिका रही है..इस परिवार के सदस्यों ने न केवल राजनीति बल्कि प्रशासनिक क्षेत्र में भी अपनी धाक कायम की..इसी परिवार के केएस शर्मा प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव रहे तो उनके बेटे मनीष शंकर शर्मा भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी रहे..यही नहीं होशंगाबाद विधानसभा के लिए अब तक हुए 14 में से छह बार की विधायिकी शहर के शर्मा परिवार के पास रही…पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ.सीताशरण शर्मा(Photo)पिछले चुनाव में पांचवी बार विधायक चुने गए..बीजेपी में जारी पीढ़ी परिवर्तन के इस दौर में इसी परिवार से पीयूष शर्मा,अभय शर्मा टिकट के अगले दावेदारों में शामिल हैं…वहीं कांग्रेस से स्थानीय नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष अखिलेश खंडेलवाल,भारत सिंह राजपूत,रणवीर पटेल के नाम चर्चा में हैं..
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कुल मतदाता 2 लाख 11 हजार 331 पुरुष मतदाता 1 लाख 08 हजार 437 महिला मतदाता 1 लाख 02 हजार 894
………………………………………………………… यह भी जानें
1. सबसे बड़ी जीत .. वर्ष 2013,भाजपा के डॉ सीताशरण शर्मा ने कांग्रेस के रवि जायसवाल
को 49216 मतों से हराया..
2. सबसे छोटी जीत.. वर्ष 1998, कांग्रेस की सविता दीवान ने भाजपा के मधुकर हर्णे को
सिर्फ 15 मतों से शिकस्त दी..
3. तीसरा मोर्चा.. वर्ष 2003 के चुनाव में पहली बार बीएसपी ने 5.5% वोट हासिल
किए….