Poor System: मप्र पुलिस की साख पर बट्टा लगा रही विदिशा पुलिस की लचर कार्यशैली

भोपाल। Poor System विदिशा पुलिस की लचर कार्यशैली मप्र पुलिस की ​छवि पर बट्टा लगा रही है। बुधवार के दो घटनाक्रम इसकी बानगी हैं। पहला धमतरी की बिटिया सुनयना की गत 25 फरवरी को संदिग्ध हालात में मौत हो गई। इस मामले में मर्ग कायम होना तो दूर,पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। बाला-बाला विवाहिता का अंतिम संस्कार हो गया। बुधवार को धमतरी से सुनयना के माता-पिता एवं महाराष्ट समाज के अनेक लोग विदिशा पहुंचे।

उन्होंने मीडिया के समक्ष रूबरू होकर घटनाक्रम का खुलासा किया कि किस तरह उनकी बेटी की मौत को आत्महत्या बताकर मामले को रफा-दफा किया जा रहा है। वे पुलिस अधीक्षक मोनिका शुक्ला से मुलाकात की जिद पर अड़े रहे,लेकिन लटेरी के खेरखेड़ी गांव में एक बालक के बोरवेल में गिरने की घटना के चलते पुलिस अधीक्षक से आज उनकी मुलाकात संभव नहीं हो सकी।

मृतका सुनयना की चाची कविता बाबर ने बताया कि इस घटना को लेकर छत्तीसगढ के छत्तीसगढ़ मराठी समाज के लोगों में काफी आक्रोश व्याप्त है। समाज के लोगों ने वहां प्रदर्शन के बाद जिम्मेदार अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा। वहीं आज विदिशा पहुंचकर भी आक्रोश जाहिर किया।

सुश्री कविता ने बताया कि देर शाम विदिशा देहात पुलिस प्रकरण दर्ज करने की कवायद कर रही थी। उन्होंने कहा कि उन्हें थाना पुलिस पर भरोसा नहीं है। वे गुरुवार को पुलिस अधीक्षक से मुलाकात करने के बाद ही धमतरी लौटेंगे।

कविता ने बताया कि सुनयना की शादी वर्ष 2014 में विदिशा निवासी शलभ जाधव पुत्र दीपक राव जाधव से हुई थी। शादी के बाद से ही सुनयना को लगातार प्रताडित किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि शलभ के पड़ोस में रहने वाली एक युवती ने इस मामले में पुलिस को दिए बयान में इसकी पुष्टि भी की।

हत्याकांड का मुख्य आरोपी एक महीने से फरार,प्रदर्शन

पिछले महीने जिला मुख्यालय के बस स्टैंड क्षेत्र में हुए प्रशांत यादव हत्याकांड में फरार मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी की मांग को लेकर पीड़ित पक्ष के परिजनों ने बुधवार को एसपी डॉ. मोनिका शुक्ला के नाम एसडीओपी मनोज मिश्रा को आवेदन सौंपा।

इस दौरान प्रशांत के परिजनों ने बताया कि हत्याकांड के एक महीने बाद भी पुलिस मुख्य आरोपी को नहीं पकड़ पाई है जिससे आरोपियों के हौसले बुलंद है तथा शहर में डर का माहौल है।

पुलिस द्वारा आरोपियों के विरुद्ध किसी प्रकार की कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई है। पुलिस के उक्त रवैया से शहर में असंतोष का माहौल है नागरिकों का पुलिस जैसी संस्था से विश्वास खत्म होता जा रहा है। मुख्य आरोपी अंशुल रघुवंशी जिसके विरुद्ध पूर्व से ही गंभीर धाराओं के अपराध पंजीबद्ध हैं।

इसके बाद भी पुलिस द्वारा अब तक आरोपी के विरुद्ध किसी प्रकार की कोई सख्त कार्यवाही नहीं की गई है। ज्ञात हो कि प्रशांत की एक माह पूर्व बेरहमी से चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी गई है।

नहीं लगते थानों व कंट्रोल रूम के फोन
विदिशा पुलिस की अपनी वेबसाइट पर जिले के पुलिस कंट्रोल रूम सहित तमाम थानों के ज्यादातर नंबर या तो गलत दर्ज हैं या फोन कॉल को रिसीव ही नहीं किया जाता। इससे आम आदमी जरूरत के वक्त थानों के चक्कर लगाने को बाध्य होता है। टेलीफोनिक संवादहीनता की स्थिति कायम होने से आमजन को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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