कॉलेजियम विवाद के बीच सरकार ने ढाई महीने से लंबित फाइल की पास, जस्टिस दीपांकर दत्ता बन सकेंगे SC जज

 नई दिल्ली 

कॉलेजियम पर विवादों के बीच केंद्र सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत करने के लिए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश को मंजूरी दे दी है। उनके नाम की सिफारिश करने वाली फाइल ढाई महीने से लंबित पड़ी थी।

उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया है कि  नियुक्ति से जुड़े वारंट पर हस्ताक्षर करने के लिए फाइल अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पास है। उन्होंने कहा कि अगर शनिवार को ऐसा होता है तो जस्टिस दत्ता अगले सप्ताह की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में शपथ ले सकते हैं। जस्टिस दत्ता के नाम की सिफारिश 26 सितंबर को पूर्व मुख्य न्यायाधीश यू यू ललित की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने की थी। जब, इस फाइल को केंद्र ने त्वरित मंजूरी नहीं दी तो, कुछ वकीलों ने कॉलेजियम मुद्दे पर शीर्ष अदालत के साथ सरकार के हाल के गतिरोध के दौरान केंद्र सरकार पर कई सवाल उठाए थे।

9 फरवरी, 1965 को जन्मे जस्टिस दीपांकर दत्ता ने 16 नवंबर, 1989 को अधिवक्ता के रूप में अपना एनरॉलमेंट कराया था। उन्होंने मुख्य रूप से सिविल और कन्स्टीच्यूशनल मामलों के केसों में कलकत्ता हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस की है। उन्हें 22 जून, 2006 को कलकत्ता उच्च न्यायालय का स्थायी जज बनाया गया था। बाद में उन्हें 28 अप्रैल, 2020 को बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था।

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सुप्रीम कोर्ट में 34 जजों के स्वीकृत पद के मुकाबले फिलहाल 27 जज कार्यरत हैं। अगले महीने जजों के खाली पद बढ़कर आठ हो जाएंगे, जब जस्टिस एस अब्दुल नजीर 4 जनवरी को सेवानिवृत्त होंगे। उनके अलावा सात और जजों का कार्यकाल अगले साल पूरा होने वाला है। वास्तविकता में, पूर्व सीजेआई ललित के तहत कॉलेजियम द्वारा केवल जस्टिस दत्ता के नाम को ही मंजूरी दी गई थी। कुछ अन्य नामों पर चर्चा हुई थी लेकिन कॉलेजियम के दो सदस्यों ने कॉलेजियम सदस्यों के बीच प्रस्तावित नाम को मंजूरी देने का विरोध किया था।

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