प्र देश में जनजातीय वर्ग को लेकर सियासत शबाब पर है। कांग्रेस को अपने नेता की यात्रा का इंतजार है तो शिवराज सरकार ने पेसा एक्ट लागू कर इस मामले में बढ़त बना ली है।
सत्ता के गलियारे से— रवि अवस्थी
Satta ke Galiyare se : प्र देश में जनजातीय वर्ग को लेकर सियासत शबाब पर है। कांग्रेस को अपने नेता की यात्रा का इंतजार है तो शिवराज सरकार ने पेसा एक्ट लागू कर इस मामले में बढ़त बना ली है।
यही नहीं ,आदिवासी मतदाताओं का अपना बनाने,इस एक्ट के बहाने सत्ता व संगठन दोनों ही अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं ।
भारत जोड़ो यात्रा के जवाब में जागरूकता सम्मेलन,गौरव यात्राएं,ग्राम सभाओं की ट्रेनिंग और वह सब कुछ किया जा रहा है जो आदिवासियों का अपना बना सके । रविवार को कुक्षी में आयोजित एक ऐसे ही कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिवराज स्वयं ‘मास्साब’ की भूमिका में रहे । खुद खाट पर बैठे,मंच ग्रामीणों को मुहैया कराया । उनका यह अंदाज सम्मेलन के दौरान चर्चा में रहा ।
यही अपेक्षा उनकी ‘अपनों ‘ से भी है । इस पर खरे नहीं उतरने वाले 4 जिलों के भाजपा अध्यक्षों को हाल ही में चलता भी कर दिया गया । वहीं विधायकों को भी ताकीद किया गया कि वक्त रहते नहीं संभले तो आगे की राह आसान नहीं रहने वाली।
** साइड इफेक्ट की भी फिक्र
पेसा एक्ट आदिवासियों के बीच राजनीति चमकाने का जरिया भले हो लेकिन सरकार इसके नफा-नुकसान को लेकर भी पूरी तरह संजीदा है । एक को खुश करने के फेर में दूसरा तबका नाराज न हो जाए।
इसे ध्यान में रखते हुए ,मुख्यमंत्री शिवराज को स्वयं यह बताना पड़ रहा है कि एक्ट किसी गैर जनजातीय के खिलाफ नहीं है ।
यह सिर्फ ग्रामीण क्षेत्रों में लागू होगा । ग्राम सभा में भले ही अन्य वर्ग के प्रतिनिधि हों,लेकिन एक्ट का लाभ तो समूची पंचायत को मिलना है ।
** यहां भी साख दांव पर
पड़ोसी राज्य गुजरात में चुनाव प्रचार जोरों पर है। मप्र के आधा दर्जन मंत्रियों को भी वहां प्रचार का दायित्व सौंपा गया है।
गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को छोड़ दिया जाए तो शेष पांच मंत्रियों को 54 विधानसभा सीटों वाले सौराष्ट्र जोन में ही प्रचार का दायित्व मिला है।
यह वही क्षेत्र है जहां वर्ष 2017 के चुनाव में पार्टी को सिर्फ 23 सीटों से संतोष करना पड़ा था। जबकि कांग्रेस 30 सीट हासिल करने में सफल रही थी।
चुनाव पूर्व के सर्वे भले ही सौराष्ट्र को इस बार भाजपा के लिए सुरक्षित मान रहे हों लेकिन पार्टी इस मामले में कोई जोखिम लेने के पक्ष में नहीं है। अब ऐसे में प्रदेश के प्रचारक मंत्रियों की साख भी दांव पर है। यह उनके लिए चुनौती भी है और सियासी दक्षता दिखाने का अवसर भी।
** मुस्कुराने की वजह तुम हो….
भाजपा मप्र में रामराज्य की संकल्पना का चरितार्थ करने के प्रयास में जुटी है। इसी बीच,पार्टी के प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव ने कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए नेताओं के लिए विभीषण की उपाधि दोहरा कर कांग्रेस को तंज कसने का मौका दे दिया।
वह इसे अपने से छिटके लोगों की दुर्गति बता रही है लेकिन छिटकने वालों को भी पूरी उम्मीद है कि विभीषण की तरह ‘राजपद’ और ‘चिरंजीवी’ होने का वरदान भी तो उन्हें ही मिलना है।
शायद यही वजह है कि सार्वजनिक तौर पर यह उपाधि मिलने के बावजूद मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया व प्रद्युम्न सिंह तोमर मुस्कुराते रहे।
** प्रतिमा स्थापना की तैयारी ने गरमाई सियासत
झांसी की रानी रहीं वीरांगना लक्ष्मीबाई की समाधि को लेकर वक्त ने ग्वालियर में भले ही सियासी भेद खत्म कर दिए हों,लेकिन यहां से साढ़े तीन सौ किमी दूर टीकमगढ़ में ‘वीरांगना’ से जुड़ा सियासी मुद्दा अब भी सरगर्म है।
नया मामला वहां सर्किट हाउस के ऐतिहासिक भवन परिसर में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व.माधवराव सिंधिया की आदमकद प्रतिमा स्थापना की तैयारी से जुडा है।
यह भवन ओरछा के तत्कालीन महाराजा वीर सिंह जूदेव ने बनवाया था ।
महाराजा जूदेव की वीरता के अनेक किस्से हैं और ‘महल’ से अदावत पुरानी । लिहाजा जो काम आजादी से पहले नहीं हो सका,वह अब करने की तैयारी है । स्थानीय विधायक ने अपने नेता को खुश करने पहले विधायक निधि से सर्किट हाउस में एक चबूतरा बनवाया और अब प्रतिमा स्थापना का प्रस्ताव भी पारित हो गया।
स्थानीय लोग इसे बुंदेलखंड की संस्कृति पर हमला बताते हुए इसका तीखा विरोध कर रहे हैं। विरोध में ‘वीरांगना’ व ‘किले’ के इतिहास को लेकर भी तर्क दिए जा रहें हैं। हालांकि, तत्कालीन शासकों की प्रतिमा स्थापना को लेकर मप्र में सियासत होना नई बात नहीं है।
पूर्व मुख्यमंत्री स्व.अर्जुन सिंह की वर्षों पूर्व तैयार प्रतिमा इसका उदाहरण है। स्व.सिंह की प्रतिमा स्थापना का मामला अपनी ही पार्टी की सियासत की भेंट चढ गया। बताया जाता है कि अब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जल्दी ही इस काम को अंजाम देने जा रहे हैं। शायद,इंतजार भारत जोड़ो यात्रा का है।
** नाथ को विचलित करना आसान नहीं
अपने जन्मदिन के उपलक्ष्य में मंदिर नुमा आकृति का केक काटकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ एक बार फिर प्रतिद्वंदी दल भाजपा के निशाने पर आ गए।
हालात यह बने कि कार्यक्रम की आयोजक संस्था को माफी मांगनी पड़ी लेकिन तब तक लानत,मलानत तो हो ही चुकी थी।
इससे पहले इंदौर में पंजाबी समाज के कुछ लोगों के विरोध का सामना उन्हें करना पड़ा । इसे लेकर भी भाजपा नाथ पर हमलावर रही।
इन घटनाक्रमों ने कांग्रेस नेता को भले ही चुप्पी साधने के लिए बाध्य कर दिया हो लेकिन ज्वलंत मुद्दों को लेकर वह उतने ही मुखर हैं। मतदाता सूची में गड़बड़ी की आशंका पर जिम्मेदार मैदानी अधिकारियों का पत्र लिखने की बात हो या खुरई में पार्टी कार्यकर्ताओं की कथित प्रताड़ना ,ऐसे सभी मामलों में नाथ पैनी नजर रखे हुए हैं।
** काम आया तोमर का भावुक अंदाज
प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर की लीक से हटकर काम करने की शैली हमेशा चर्चा में रही है,लेकिन हाल ही में अपने निर्वाचन क्षेत्र ग्वालियर में उनका एक नया रूप सामने आया।
अतिक्रमण हटाए जाने से नाराज मतदाताओं को मनाने पहुंचे तोमर भावुक अंदाज में पेश आए।
उन्होंने कहा-आप लोगों का लगता है मैं मक्कार हूं,नकारा हूं,मुझे मारो,पत्थर फेंकना है,फे कों,लेकिन मैं शहर के स्वरूप और भावी पीढ़ी के भविष्य को बिगड़ने नहीं दूंगा। उनके इस अंदाज ने गुस्साए लोगों के तेवर ठंडे कर दिए।
बाद में अस्पताल पहुंचकर तोमर ने मरीजों के पैर दबाए व उनके बीच रात गुजार कर लोगों का दिल जीतने का एक और जतन किया। वाकई राजनीति जो कराए वह कम है।