MBBS के बाद पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाले इन डॉक्टरों को 1 साल गांव में करना होगा काम

अमरावती
सरकारी सहायता से अपनी पोस्ट ग्रेजुएशन मेडिकल की डिग्री पूरी करने वाले मेडिकल छात्रों के लिए ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में एक साल तक सेवाएं देना अनिवार्य होगा। आंध्र प्रदेश के प्रधान सचिव (स्वास्थ्य) एम. टी. कृष्णा बाबू ने कहा कि सरकार ने इस संबंध में एक नीतिगत निर्णय लिया है। जल्द ही आवश्यक आदेश जारी किए जाएंगे। कृष्णा बाबू ने संवाददाताओं को बताया कि राज्य में हर साल ए-श्रेणी के तहत लगभग 400 छात्र सरकारी सहायता से स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा लेते हैं।
     
प्रधान सचिव ने कहा, “पहले हम इसे सभी स्नातकोत्तर छात्रों के लिए अनिवार्य करना चाहते थे, लेकिन अब हमने इसे केवल ए-श्रेणी के छात्रों तक ही सीमित रखने का फैसला किया है। इससे ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।” उन्होंने बताया कि पिछले दो साल में यहां 3,726 चिकित्सकों और विशेषज्ञों की भर्ती की गई, जिसमें विशेषज्ञों को 50 प्रतिशत जबकि एमबीबीएस चिकित्सकों को 30 प्रतिशत अतिरिक्त वेतन दिया गया।
     
सचिव ने कहा, “हम विशेष रूप से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं में सुधार पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हम जल्द ही प्रत्येक जिले में विशेषज्ञ चिकित्सकों के साथ एक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित करेंगे।”  
 कृष्णा बाबू ने कहा कि एलुरु, राजामहेंद्रवरम, विजयनगरम, मछलीपट्टनम और नंदयाल में पांच नये मेडिकल कॉलेज का संचालन शैक्षणिक वर्ष 2023-24 से किया जाएगा।  उन्होंने बताया कि कुल मिलाकर, राज्य सरकार ने 16 नए मेडिकल कॉलेज शुरू किए हैं। इसमें 11 शैक्षणिक वर्ष 2024-25 से संचालित होंगे।
     
16 नए मेडिकल कॉलेजों में से तीन (पडेरू, मछलीपट्टनम और पिदुगुरल्ला में) को केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित किया जा रहा था। तीन अन्य कॉलेज भी इसमें जोड़े जाएंगे। शेष नौ नाबार्ड से कर्ज लेकर स्थापित किए जा रहे। निदेशक (स्वास्थ्य) जे. निवास और निदेशक और एपी वैद्य विधान परिषद विनोद कुमार भी इस दौरान उपस्थित थे।

 

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