सोनिया गांधी का बड़ा बयान: इमरजेंसी की लिए सिर्फ संजय, इंदिरा गांधी ही जिम्मेदार नहीं, वरिष्ठ नेताओं का भी था दबाव

सोनिया गांधी ने इमरजेंसी पर कहा कि इंदिरा गांधी पर वरिष्ठ नेताओं का दबाव था। उन्होंने संजय गांधी को अकेले जिम्मेदार मानने से इनकार किया।

नई दिल्ली: देश में 1975 में लगाए गए आपातकाल (Emergency) को लेकर कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक बार फिर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा है कि आपातकाल के दौरान हुई ज्यादतियों के लिए सिर्फ संजय गांधी को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर उनके कुछ वरिष्ठ सहयोगियों का भी काफी दबाव था। सोनिया के मुताबिक, उनके पति और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी उन चुनिंदा लोगों में शामिल थे, जिनकी राय उस समय अलग थी।

सोनिया गांधी ने ये बातें अंग्रेजी अखबार द हिंदू को दिए एक इंटरव्यू में कहीं। उनका यह इंटरव्यू उनकी आने वाली किताब ‘Belonging: A Journey of Love’ के विमोचन से पहले सामने आया है। किताब 10 नवंबर 2026 को रिलीज होने वाली है।

संजय गांधी को अकेले जिम्मेदार ठहराना सही नहीं: सोनिया

इंटरव्यू में सोनिया गांधी से पूछा गया कि क्या आपातकाल के दौरान हुई ज्यादतियों के लिए संजय गांधी को जिम्मेदार माना जाना चाहिए। इस पर उन्होंने कहा कि आम लोगों की नजर में संजय गांधी अक्सर आपातकाल के साथ जोड़कर देखे जाते हैं, लेकिन इसके लिए केवल उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

सोनिया ने कहा कि इंदिरा गांधी पर उनके कुछ वरिष्ठ सहयोगियों की ओर से काफी दबाव था। उनके मुताबिक, उस समय राजीव गांधी जैसे बहुत कम लोग थे, जिनका नजरिया अलग था। राजीव गांधी लोगों से मिलने वाली शिकायतें और प्रतिक्रियाएं अपनी मां तक पहुंचाते थे।

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इंदिरा गांधी को बाद में अपनी गलतियों का एहसास हुआ: सोनिया

सोनिया गांधी ने कहा कि आपातकाल के दौरान जो कुछ हुआ, उसकी गंभीरता उन्हें खुद बाद में समझ आई। उन्होंने माना कि उस समय लोकतांत्रिक अधिकारों में कटौती की गई थी और बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) के अधिकार को भी निलंबित किया गया था।

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि आपातकाल की घोषणा संवैधानिक प्रक्रिया के तहत की गई थी। सोनिया के अनुसार, बाद में इंदिरा गांधी ने हालात को समझा और सुधार के लिए कदम उठाए।

उन्होंने कहा कि पीछे मुड़कर देखने पर घटनाओं को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है। इंदिरा गांधी ने ही जनवरी 1977 में आम चुनाव कराने का ऐलान किया था। सोनिया ने यह भी कहा कि इंदिरा गांधी ने बाद में आपातकाल के दौरान हुई ज्यादतियों पर सार्वजनिक रूप से खेद जताया और माफी मांगी थी।

इंदिरा गांधी के सामने क्या हालात थे?

सोनिया गांधी ने इंटरव्यू में तत्कालीन परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि इंदिरा गांधी तेजी से बिगड़ते हालात से निपटने की कोशिश कर रही थीं। उन्होंने उस समय हिंसक प्रदर्शनों, सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक परिवहन पर हमलों, व्यापक अशांति और नौकरशाही तथा सशस्त्र बलों से आदेश न मानने की अपीलों का उल्लेख किया।

सोनिया ने कहा कि अगर उस दौर को इंदिरा गांधी के नजरिए से देखा जाए तो ऐसा लगता है कि वह इन परिस्थितियों से निपटने के लिए संघर्ष कर रही थीं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उस दौरान लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित हुए थे।

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25 जून 1975 को लगा था आपातकाल

भारत में 25 जून 1975 की रात तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने देश में आपातकाल लागू किया था। राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने इसकी घोषणा जारी की थी। यह आपातकाल 21 मार्च 1977 तक चला और करीब 21 महीने की इस अवधि को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक महत्वपूर्ण और विवादित दौर माना जाता है।

आपातकाल के दौरान नागरिक स्वतंत्रताओं पर पाबंदियां लगाई गईं, विपक्षी नेताओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया तथा प्रेस पर सेंसरशिप लागू की गई। इस दौरान जबरन नसबंदी अभियान और झुग्गी-बस्तियों को हटाने जैसी कार्रवाइयों को लेकर भी व्यापक विवाद हुआ।

18 जनवरी 1977 को इंदिरा गांधी ने लोकसभा चुनाव कराने की घोषणा की। मार्च 1977 में हुए चुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। इंदिरा गांधी और संजय गांधी भी चुनाव हार गए। इसके बाद 21 मार्च 1977 को आपातकाल समाप्त कर दिया गया।

10 नवंबर को रिलीज होगी सोनिया गांधी की किताब

सोनिया गांधी की किताब ‘Belonging: A Journey of Love’ 10 नवंबर को रिलीज होने वाली है। इस किताब में उन्होंने अपने बचपन, इटली में शुरुआती जीवन, राजीव गांधी से मुलाकात, उनके साथ रिश्ते और गांधी परिवार में अपने अनुभवों को साझा किया है।

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सोनिया गांधी ने इंटरव्यू में बताया कि लंबे समय तक उन्हें अपनी निजी जिंदगी के बारे में सार्वजनिक रूप से बात करने की इच्छा नहीं थी। लेकिन अब उन्होंने अपने जीवन के अनुभवों को पाठकों के सामने रखने का फैसला किया है।

उनके मुताबिक, यह किताब सिर्फ उनकी और राजीव गांधी की प्रेम कहानी नहीं है, बल्कि भारत और राजीव के परिवार से उनके जुड़ाव की यात्रा भी है।

इमरजेंसी पर सोनिया के बयान से फिर शुरू हुई राजनीतिक बहस

सोनिया गांधी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब देश में आपातकाल की विरासत और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बहस जारी है। भारतीय जनता पार्टी आपातकाल को लोकतंत्र पर हमला बताकर कांग्रेस की आलोचना करती रही है। वहीं कांग्रेस के नेता उस दौर की परिस्थितियों और बाद में चुनाव कराने के फैसले का हवाला देते रहे हैं।

सोनिया गांधी ने अपने ताजा इंटरव्यू में एक तरफ लोकतांत्रिक अधिकारों के निलंबन को स्वीकार किया है, तो दूसरी तरफ इंदिरा गांधी के सामने मौजूद परिस्थितियों और उनके वरिष्ठ सहयोगियों के दबाव का भी उल्लेख किया है। इस तरह उनका बयान आपातकाल के लिए जिम्मेदारी तय करने और उस दौर के राजनीतिक फैसलों को समझने की बहस को फिर चर्चा में ले आया है।