नई दिल्ली: दिवाली से पहले मनाई जाने वाली छोटी दिवाली यानी नरक चतुर्दशी की तारीख को लेकर इस साल लोगों में असमंजस है। कुछ पंचांगों और कैलेंडरों में छोटी दिवाली 7 नवंबर बताई जा रही है, जबकि कई जगह 8 नवंबर को नरक चतुर्दशी मनाने की जानकारी दी गई है। इसकी वजह कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का दो दिनों तक रहना है।
पंचांग के अनुसार, चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर 2026 को सुबह 10 बजकर 47 मिनट पर शुरू हो चुकी है और 8 नवंबर को सुबह 11 बजकर 27 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि और अभ्यंग स्नान की परंपरा के आधार पर नरक चतुर्दशी का मुख्य पर्व 8 नवंबर, रविवार को मनाया जाएगा। वहीं, कुछ क्षेत्रों में काली चौदस और निशीथ काल की पूजा 7 नवंबर की रात को की जाएगी।
छोटी दिवाली 2026 कब है, 7 या 8 नवंबर?
छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी, नरक चौदस और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। यह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है।
इस साल चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर की सुबह शुरू होकर 8 नवंबर की सुबह तक रहेगी। इसलिए अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में पूजा और पर्व मनाने के समय में अंतर दिखाई दे रहा है।
- चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 7 नवंबर 2026, सुबह 10:47 बजे
- चतुर्दशी तिथि समाप्त: 8 नवंबर 2026, सुबह 11:27 बजे
- नरक चतुर्दशी का मुख्य दिन: 8 नवंबर 2026, रविवार
- काली चौदस की निशीथ पूजा: 7 नवंबर की रात
- अभ्यंग स्नान: 8 नवंबर की सुबह
इस बार छोटी दिवाली और मुख्य दिवाली यानी लक्ष्मी पूजन भी 8 नवंबर को पड़ रहे हैं। इस वजह से एक ही दिन सुबह नरक चतुर्दशी के अनुष्ठान और शाम को लक्ष्मी पूजन किया जाएगा।
छोटी दिवाली 2026 पर अभ्यंग स्नान का शुभ मुहूर्त
नरक चतुर्दशी पर सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान करने की परंपरा है। इसमें शरीर पर तिल के तेल से मालिश करके स्नान किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस स्नान से नकारात्मकता दूर होती है और व्यक्ति को आरोग्य तथा सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
दिल्ली के पंचांग के अनुसार, 8 नवंबर को अभ्यंग स्नान का शुभ समय इस प्रकार है:
- अभ्यंग स्नान मुहूर्त: सुबह 5:41 बजे से 6:38 बजे तक
- मुहूर्त की अवधि: 57 मिनट
यह समय नई दिल्ली के पंचांग पर आधारित है। दूसरे शहरों में सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में अंतर हो सकता है। इसलिए अपने शहर के पंचांग के अनुसार मुहूर्त देखना उचित रहेगा।
छोटी दिवाली पर पूजा का शुभ समय
नरक चतुर्दशी पर भगवान श्रीकृष्ण और भगवान विष्णु की पूजा के साथ यम दीपदान की भी परंपरा है। कई क्षेत्रों में शाम के समय दीप जलाए जाते हैं और घर के बाहर दक्षिण दिशा में यमराज के नाम का दीपक रखा जाता है।
काली चौदस की परंपरा में 7 नवंबर की रात निशीथ काल की पूजा का महत्व है। वहीं, नरक चतुर्दशी के अभ्यंग स्नान का मुख्य अनुष्ठान 8 नवंबर की सुबह किया जाएगा।
छोटी दिवाली की पूजा विधि: ऐसे करें पूजा
नरक चतुर्दशी के दिन श्रद्धालु परंपरा के अनुसार पूजा और स्नान करते हैं। पूजा की सामान्य विधि इस प्रकार है:
- सुबह जल्दी उठें: अभ्यंग स्नान के लिए सूर्योदय से पहले उठें।
- तेल मालिश करें: स्नान से पहले शरीर पर तिल के तेल से मालिश करने की परंपरा है।
- अभ्यंग स्नान करें: शुभ मुहूर्त में स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें।
- भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करें: भगवान कृष्ण को फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
- यम दीपदान करें: परंपरा के अनुसार घर के बाहर दक्षिण दिशा में यमराज के नाम से दीपक जलाएं।
- घर में दीपक जलाएं: घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थल पर दीपक रखें।
- दान-पुण्य करें: अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को भोजन या अन्य सामग्री दान करें।
पूजा की विधि और समय अलग-अलग क्षेत्रों तथा परिवारों की परंपराओं के अनुसार बदल सकते हैं।
छोटी दिवाली क्यों मनाई जाती है? क्या है नरकासुर वध की कथा?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नरकासुर नाम का एक शक्तिशाली असुर था। उसने अपनी शक्ति के अहंकार में देवताओं और ऋषियों को परेशान करना शुरू कर दिया था। उसने कई राजाओं को पराजित किया और अनेक कन्याओं को बंदी बना लिया था।
नरकासुर के अत्याचारों से परेशान होकर देवताओं ने भगवान श्रीकृष्ण से सहायता मांगी। इसके बाद भगवान कृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ नरकासुर के विरुद्ध युद्ध किया।
युद्ध में भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध कर दिया और उसके बंधन से बंदी कन्याओं को मुक्त कराया। मान्यता है कि नरकासुर की मृत्यु के बाद लोगों ने खुशी में दीप जलाए और इस विजय को उत्सव के रूप में मनाया।
इसी घटना की स्मृति में कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी या छोटी दिवाली मनाई जाती है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक माना जाता है।
छोटी दिवाली को रूप चौदस क्यों कहते हैं?
छोटी दिवाली को रूप चौदस भी कहा जाता है। इस दिन अभ्यंग स्नान और शरीर की शुद्धि की परंपरा को विशेष महत्व दिया जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन स्नान और पूजा करने से सौंदर्य, स्वास्थ्य और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इसी वजह से कई जगह महिलाएं और पुरुष विशेष रूप से उबटन, तेल मालिश और पारंपरिक स्नान करते हैं।
कुछ क्षेत्रों में इस दिन को काली चौदस के रूप में भी मनाया जाता है। वहां देवी काली की पूजा और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का महत्व है।
छोटी दिवाली और बड़ी दिवाली में क्या अंतर है?
छोटी दिवाली और मुख्य दिवाली दोनों दीपोत्सव का हिस्सा हैं, लेकिन इनके धार्मिक महत्व और पूजा की परंपराएं अलग हैं।
- छोटी दिवाली: नरकासुर पर भगवान कृष्ण की विजय और अभ्यंग स्नान से जुड़ी है।
- बड़ी दिवाली: इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। इसे धन, सुख-समृद्धि और शुभता का पर्व माना जाता है।
- दीप जलाने की परंपरा: दोनों दिन घरों में दीपक जलाए जाते हैं, लेकिन मुख्य दिवाली पर दीपोत्सव और लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व है।
इस साल 8 नवंबर को सुबह नरक चतुर्दशी के अनुष्ठान और शाम को दीपावली का लक्ष्मी पूजन होने के कारण दोनों पर्व एक ही दिन मनाए जाएंगे।
Diwali 2026: पांच दिन के त्योहार की तारीखें
इस साल दीपोत्सव के प्रमुख पर्वों की तारीखें इस प्रकार हैं:
| पर्व | तारीख |
|---|---|
| धनतेरस | 6 नवंबर 2026 |
| छोटी दिवाली / नरक चतुर्दशी | 8 नवंबर 2026 |
| दीपावली / लक्ष्मी पूजन | 8 नवंबर 2026 |
| गोवर्धन पूजा | 10 नवंबर 2026 |
| भाई दूज | 11 नवंबर 2026 |
इस बार तिथियों के संयोग के कारण छोटी दिवाली और मुख्य दिवाली एक ही दिन पड़ रही हैं। हालांकि, काली चौदस की कुछ क्षेत्रीय परंपराओं में 7 नवंबर की रात को भी पूजा की जाएगी।