देश की राजधानी दिल्ली में 31 अक्टूबर को INDIA गठबंधन के नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक ‘जन महाभियोग’ कार्यक्रम आयोजित किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर आयोजित इस कार्यक्रम में राहुल गांधी, सोनिया गांधी और विपक्षी दलों के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने इस प्रतीकात्मक कार्यवाही की अध्यक्षता की।
विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी, वोटरों के नाम हटाने और चुनाव आयोग की निष्पक्षता से जुड़े गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, यह संसद में होने वाली वास्तविक महाभियोग या पद से हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि विपक्ष की ओर से आयोजित एक प्रतीकात्मक विरोध कार्यक्रम था।
खड़गे के आवास पर आयोजित हुई प्रतीकात्मक कार्यवाही
INDIA गठबंधन का यह कार्यक्रम पहले 30 अक्टूबर को आयोजित होना था, लेकिन दिल्ली में बारिश और खराब मौसम के कारण इसे एक दिन के लिए टाल दिया गया। इसके बाद 31 अक्टूबर को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास, 10 राजाजी मार्ग पर इसका आयोजन किया गया।
कार्यक्रम को संसद की कार्यवाही की तर्ज पर आयोजित किया गया। खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया, जबकि पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने अध्यक्ष की भूमिका निभाई। राहुल गांधी ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया और विपक्ष की ओर से उठाए गए मुद्दों पर अपनी बात रखी।
इस आयोजन में करीब 20 विपक्षी दलों के शामिल होने की जानकारी सामने आई। कुछ नेताओं के अलावा नागरिक समाज के प्रतिनिधियों और उन लोगों को भी अपनी बात रखने का मौका दिया गया, जिनके नाम कथित तौर पर मतदाता सूची से हटाए गए हैं।
खड़गे ने ज्ञानेश कुमार पर लगाए छह आरोप
कार्यक्रम में मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ छह प्रमुख आरोप रखे। ये सभी विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
- चुनाव में कथित हेरफेर: विपक्ष ने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने और चुनावों में कथित गड़बड़ी की कोशिश की गई।
- 13.2 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप: खड़गे ने मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का मुद्दा उठाया।
- फॉर्म-6 में बदलाव: विपक्ष ने आरोप लगाया कि संसद की मंजूरी के बिना फॉर्म-6 में बदलाव किए गए।
- ECINET के जरिए मतदाता सूची पर नियंत्रण: विपक्ष ने चुनावी सूची को केंद्रीकृत करने और इसके नियंत्रण को लेकर सवाल उठाए।
- अन्य चुनाव आयुक्तों की भूमिका: खड़गे ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के फैसलों में बाकी दो चुनाव आयुक्तों को पर्याप्त भागीदारी नहीं दी गई।
- सरकार के इशारे पर काम करने का आरोप: विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों पर काम करने का आरोप लगाया।
खड़गे ने कहा कि विपक्ष की कार्रवाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता और संवैधानिक संस्था की गरिमा को लेकर है।
SIR को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच विवाद
इस पूरे विवाद के केंद्र में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) है। विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं और इससे लोगों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है।
खड़गे ने महिलाओं, युवाओं और कमजोर वर्गों के मताधिकार की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि मतदाताओं को जानकारी दिए बिना कंप्यूटरीकृत प्रक्रिया के जरिए उनके नाम सूची से कैसे हटाए जा सकते हैं।
विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग को पारदर्शी तरीके से काम करना चाहिए और मतदाता सूची में किसी भी बदलाव की प्रक्रिया की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
राहुल गांधी और सोनिया गांधी समेत कई नेता पहुंचे
कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ राहुल गांधी और सोनिया गांधी भी मौजूद रहे। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
विपक्षी दलों के कई सांसदों और नेताओं ने भी इसमें हिस्सा लिया। समाजवादी पार्टी, वामपंथी दलों और अन्य विपक्षी संगठनों के प्रतिनिधियों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर अपनी चिंताएं रखीं।
कार्यक्रम के दौरान उन नागरिकों को भी अपनी बात रखने का अवसर दिया गया, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का दावा किया गया है।
बीजेपी ने बताया राजनीतिक दिखावा
INDIA गठबंधन के इस कार्यक्रम पर बीजेपी ने भी प्रतिक्रिया दी। भाजपा ने इसे राजनीतिक नाटक बताते हुए राहुल गांधी पर निशाना साधा। NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी ने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी अपनी पसंद की संसद में बैठ रहे हैं, जबकि वास्तविक चुनावी राजनीति में उन्हें सफलता नहीं मिल रही।
इस तरह विपक्ष के प्रतीकात्मक कार्यक्रम के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चुनाव आयोग की निष्पक्षता और चुनाव प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक टकराव और चर्चा में आ गया।
1 नवंबर को रामलीला मैदान में होगी विपक्ष की रैली
जन महाभियोग कार्यक्रम के अगले दिन यानी 1 नवंबर 2026 को INDIA गठबंधन ने दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली आयोजित करने की योजना बनाई है। विपक्ष ने इसे ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान से जोड़ा है।
राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने लोगों से इस मार्च और रैली में शामिल होने की अपील की है। विपक्ष का कहना है कि यह अभियान मतदाता अधिकारों और लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए है।
क्या ज्ञानेश कुमार को पद से हटाया जा सकता है?
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। INDIA गठबंधन की ओर से आयोजित ‘जन महाभियोग’ प्रतीकात्मक राजनीतिक विरोध है। इससे मुख्य चुनाव आयुक्त अपने आप पद से नहीं हटते और न ही यह संसद की औपचारिक महाभियोग प्रक्रिया है।
मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए संविधान में निर्धारित विशेष प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है। विपक्ष की ओर से पहले संसद में हटाने संबंधी नोटिस दिए जाने और उनके स्वीकार नहीं किए जाने का दावा भी किया गया है।
इसलिए 31 अक्टूबर का आयोजन मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष की राजनीतिक और सार्वजनिक मुहिम का हिस्सा है, न कि उनके पद से हटाए जाने का आधिकारिक फैसला।