Census 2027: देशभर में 25 जनवरी से शुरू होगी जनगणना, 10 जनवरी से ऑनलाइन खुद दर्ज कर सकेंगे जानकारी

केंद्र सरकार ने Census 2027 का कार्यक्रम जारी किया है। 25 जनवरी से 28 फरवरी तक देश के अधिकांश हिस्सों में जनगणना होगी। 10 जनवरी से ऑनलाइन स्व-गणना की सुविधा मिलेगी।

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 (Census 2027) का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। सरकार की अधिसूचना के अनुसार, देश के अधिकांश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 तक जनसंख्या की गणना की जाएगी। इस बार नागरिकों को घर-घर सर्वेक्षण शुरू होने से पहले ऑनलाइन स्व-गणना (Self Enumeration) का विकल्प भी मिलेगा। इसके लिए 10 जनवरी से 24 जनवरी 2027 तक का समय निर्धारित किया गया है।

हालांकि, विधानसभा चुनाव वाले कुछ राज्यों और बर्फ से प्रभावित क्षेत्रों में इस अवधि के दौरान जनगणना नहीं होगी। इन क्षेत्रों के लिए अलग कार्यक्रम जारी किया जाएगा। जनगणना की संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि यानी रात 12 बजे निर्धारित की गई है।

Census 2027 Schedule: कब से कब तक होगी जनगणना?

भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, अधिकांश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जनसंख्या गणना का कार्यक्रम इस प्रकार रहेगा:

  • ऑनलाइन स्व-गणना: 10 जनवरी से 24 जनवरी 2027
  • घर-घर जनसंख्या गणना: 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027
  • पुनरीक्षण चरण (Revisional Round): 1 मार्च से 5 मार्च 2027
  • जनगणना की संदर्भ तिथि: 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि

इस प्रक्रिया के तहत नागरिकों को अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज करने का विकल्प मिलेगा। इसके बाद निर्धारित अवधि में जनगणना कर्मचारी घर-घर जाकर जनसंख्या संबंधी आंकड़े एकत्र करेंगे।

इन राज्यों में तय तारीखों पर नहीं होगी जनगणना

सरकार ने आगामी विधानसभा चुनावों और भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कुछ राज्यों और क्षेत्रों को जनवरी-फरवरी के जनगणना कार्यक्रम से अलग रखा है।

इनमें शामिल हैं:

  • उत्तर प्रदेश
  • पंजाब
  • उत्तराखंड
  • गोवा
  • मणिपुर
  • लद्दाख
  • हिमाचल प्रदेश के बर्फ से प्रभावित गैर-समकालिक क्षेत्र
  • जम्मू-कश्मीर के बर्फ से प्रभावित गैर-समकालिक क्षेत्र

इन क्षेत्रों में जनगणना की प्रक्रिया अलग-अलग निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होगी। मणिपुर के लिए तारीखों की घोषणा अलग से की जाएगी।

उत्तर प्रदेश में कब होगी जनगणना?

उत्तर प्रदेश को भी जनवरी-फरवरी 2027 के निर्धारित जनगणना कार्यक्रम से बाहर रखा गया है। राज्य में विधानसभा चुनाव होने के कारण जनगणना की प्रक्रिया अलग समय पर आयोजित की जाएगी।

भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश सहित कुछ चुनावी राज्यों में स्व-गणना 16 नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक और घर-घर जनसंख्या गणना 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक निर्धारित की गई है। इसके बाद 5 से 9 जनवरी 2027 तक पुनरीक्षण चरण होगा।

ऑनलाइन Self Enumeration की मिलेगी सुविधा

जनगणना 2027 में पहली बार नहीं, बल्कि इस बार नागरिकों को स्व-गणना का विकल्प उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके तहत लोग निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल पर अपनी और अपने परिवार की जानकारी स्वयं दर्ज कर सकेंगे।

स्व-गणना की सुविधा 10 जनवरी से 24 जनवरी 2027 तक निर्धारित है। इसके बाद जनगणना कर्मचारी घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करेंगे।

इस डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य जनगणना प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाना और आंकड़ों के संग्रह में नागरिकों की भागीदारी बढ़ाना है।

1 मार्च 2027 को होगी जनगणना की संदर्भ तिथि

सरकार ने 1 मार्च 2027 की रात 12 बजे को जनगणना की संदर्भ तिथि निर्धारित किया है। इसका मतलब है कि जनसंख्या से संबंधित आंकड़ों का निर्धारण इसी समय की स्थिति के आधार पर किया जाएगा।

जनगणना के दौरान देश की आबादी, परिवारों और जनसांख्यिकीय स्थिति से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े जुटाए जाएंगे।

दो चरणों में होगी जनगणना 2027

भारत की जनगणना की प्रक्रिया दो प्रमुख चरणों में आयोजित की जा रही है।

  1. मकान सूचीकरण और आवास जनगणना: इसमें मकानों और आवासीय सुविधाओं से संबंधित जानकारी एकत्र की जाती है।
  2. जनसंख्या गणना: इसमें नागरिकों और परिवारों से संबंधित जनसांख्यिकीय आंकड़े जुटाए जाते हैं।

मकान सूचीकरण का पहला चरण अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच निर्धारित किया गया था। अब दूसरे चरण में जनसंख्या की गणना की जाएगी।

2021 में होनी थी जनगणना, कोरोना के कारण टली

भारत में जनगणना हर 10 साल में आयोजित की जाती है। पिछली जनगणना 2011 में हुई थी। इसके बाद अगली जनगणना 2021 में प्रस्तावित थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसे स्थगित करना पड़ा।

अब 2027 में होने वाली जनगणना से देश को लंबे समय बाद नए जनसंख्या संबंधी आंकड़े मिलेंगे। इन आंकड़ों का इस्तेमाल सरकारी योजनाओं, विकास नीतियों, संसाधनों के वितरण और प्रशासनिक नियोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

जनगणना 2027 क्यों है महत्वपूर्ण?

देश की जनसंख्या और सामाजिक-आर्थिक स्थिति से जुड़े नए आंकड़े सरकार के लिए नीति निर्माण में उपयोगी होंगे। जनगणना से प्राप्त जानकारी के आधार पर शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं की योजना बनाने में मदद मिलेगी।

Census 2027 भारत के लिए एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्रक्रिया है। ऑनलाइन स्व-गणना और घर-घर सर्वेक्षण के जरिए सरकार देश की जनसंख्या से जुड़े नए आंकड़े जुटाएगी। हालांकि, चुनाव वाले राज्यों और बर्फीले क्षेत्रों के लिए अलग कार्यक्रम निर्धारित किया गया है।