प्यारे मियां को 10 बार उम्रकैद, 8 सजाओं में ताउम्र जेल; ₹77.64 लाख जुर्माना

भोपाल की पॉक्सो अदालत ने प्यारे मियां को नाबालिगों से यौन अपराध के मामले में 10 बार उम्रकैद और ₹77.64 लाख जुर्माना सुनाया। राबिया बी को 20 साल की सजा।

भोपाल।

नाबालिग बच्चियों के यौन शोषण के मामले में भोपाल की विशेष पॉक्सो अदालत ने प्यारे मियां को कड़ी सजा सुनाई है।

अदालत ने 78 वर्षीय आरोपी को अलग-अलग धाराओं में 10 बार आजीवन कारावास की सजा दी।

इनमें 8 सजाएं उसके शेष प्राकृतिक जीवन तक जेल में रहने की हैं।

अदालत ने उस पर 77 लाख 64 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

मामले में सहयोगी राबिया बी को 20 साल के कारावास की सजा सुनाई गई है।

विशेष न्यायाधीश कुमुदिनी पटेल की अदालत का यह फैसला अपराध की गंभीरता के साथ

पीड़िताओं पर पड़े असर को भी रेखांकित करता है।

अदालत ने कहा कि जिस उम्र में बच्चियों को सुरक्षा, देखभाल और बेहतर भविष्य मिलना चाहिए,

उस उम्र में उन्हें भय और असुरक्षा का सामना करना पड़ा।

ऐसे अपराध बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के साथ उनके भविष्य को भी प्रभावित करते हैं।

फैसले में सजा के अलावा पीड़िताओं के पुनर्वास के लिए आर्थिक प्रतिकर का आदेश भी शामिल है।

तीन पीड़िताओं को 4-4 लाख रुपये देने के निर्देश दिए गए हैं।

नौकरी का लालच देकर बच्चियों तक पहुंचने का मामला

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, प्यारे मियां वर्ष 2014 से नाबालिग बच्चियों का यौन शोषण कर रहा था।

आरोप था कि वह घर में 10 हजार रुपये महीने की नौकरी दिलाने का लालच देकर बच्चियों को बुलाता था।

राबिया बी पर आरोप था कि वह बच्चियों को उसके पास लेकर जाती थी।

इस मामले का खुलासा जुलाई 2020 में हुआ।

पुलिस गश्त के दौरान 11 जुलाई की रात 5 नाबालिग बच्चियां स्कूटी पर संदिग्ध और नशे की हालत में मिली थीं।

इसके बाद उनकी काउंसलिंग की गई।

इसी दौरान शाहपुरा क्षेत्र की विष्णु हाईटेक सिटी स्थित एक फ्लैट में बुलाए जाने की जानकारी सामने आई।

अभियोजन के अनुसार, बच्चियों को एक जन्मदिन मनाने के बहाने फ्लैट पर बुलाया गया था।

वहां उन्हें शराब पिलाने और उनके साथ यौन अपराध किए जाने के आरोप सामने आए।

इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।

फ्लैट से मिले हिडन कैमरे, ब्लैकमेलिंग का आरोप

जांच के दौरान पुलिस को प्यारे मियां के फ्लैट से हिडन कैमरे और पिस्टल मिलने की जानकारी सामने आई थी।

अभियोजन के अनुसार, कैमरों के जरिए बच्चियों के वीडियो बनाए जाते थे और

बाद में इनका इस्तेमाल उन्हें ब्लैकमेल करने के लिए किया जाता था।

पिस्टल से पीड़िताओं को डराने-धमकाने के आरोप भी सामने आए थे।

ताउम्र जेल में रहेगा प्यारे

अदालत ने अलग-अलग अपराधों में 10 आजीवन कारावास की सजाएं सुनाई हैं,

जिनमें 8 प्राकृतिक जीवन के अंत तक जेल में रहने की सजाएं हैं।

अदालत ने प्यारे मियां को अलग-अलग कानूनी धाराओं में 10 आजीवन कारावास की सजाएं सुनाई हैं।

इनमें 8 सजाएं शेष प्राकृतिक जीवन तक कारावास की हैं।

प्राकृतिक जीवन के अंत तक कारावास का अर्थ है कि दोषी को अपने शेष जीवन के लिए जेल में रखने का आदेश दिया गया है।

सहयोगी राबिया बी को 20 साल की सजा

अदालत ने मामले में राबिया बी को भी दोषी ठहराते हुए 20 साल के कारावास की सजा सुनाई है।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, बच्चियों को प्यारे मियां तक पहुंचाने में उसकी भूमिका थी।

लोक अभियोजक पीएन सिंह राजपूत ने अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में पैरवी की।

सुनवाई के बाद अदालत ने अलग-अलग धाराओं में दोष सिद्ध होने पर सजाएं सुनाईं।

अधिवक्ता राजपूत ने कहा कि अलग-अलग प्रकरणों में सजा अलग—अलग अवधि की हैं।

तीन पीड़िताओं को 4-4 लाख रुपये का प्रतिकर

अदालत ने तीन पीड़िताओं को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने के निर्देश दिए हैं।

एक अन्य पीड़िता को आर्थिक सहायता नहीं दी गई।

प्रतिकर का उद्देश्य अपराध से प्रभावित पीड़िताओं के पुनर्वास और भविष्य की जरूरतों में मदद करना है।

ऐसे मामलों में आर्थिक सहायता महत्वपूर्ण हो सकती है, लेकिन

पीड़िताओं के पुनर्वास के लिए मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और सामाजिक सहयोग भी अहम हैं।

जुलाई 2020 में सामने आया था मामला

10 और 11 जुलाई 2020 की घटनाओं से जुड़े इस प्रकरण में पांच नाबालिग बच्चियों के मिलने के बाद जांच शुरू हुई थी।

पुलिस की प्रारंभिक कार्रवाई, बच्चियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामला अदालत तक पहुंचा।

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