हरिद्वार की ‘हर की पौड़ी’ सूखी, 18 दिन तक नहीं होगा गंगा स्नान, हरिद्वार से दिल्ली-NCR तक पड़ेगा असर, जानें वजह

हरिद्वार में गंगनहर की 18 दिन की बंदी के दौरान वार्षिक मरम्मत और कुंभ 2027 के निर्माण कार्य होंगे। इसका असर हर की पौड़ी, पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सिंचाई और दिल्ली-NCR की जल आपूर्ति पर पड़ सकता है।

हरिद्वार: उत्तराखंड के हरिद्वार में गंगनहर को 18 दिनों के लिए बंद कर दिया गया है। यह बंदी 20-21 अक्टूबर 2026 की मध्यरात्रि से शुरू हुई और निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 7-8 नवंबर की मध्यरात्रि के आसपास नहर में पानी का प्रवाह दोबारा शुरू किया जाएगा। इस दौरान नहर की वार्षिक सफाई, मरम्मत और रखरखाव के साथ-साथ वर्ष 2027 में होने वाले कुंभ मेले की तैयारियों से जुड़े निर्माण कार्य भी किए जाएंगे। गंगनहर बंद होने का असर हर की पौड़ी के घाटों के अलावा उत्तर प्रदेश और दिल्ली-NCR की जल आपूर्ति तथा सिंचाई व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

आखिर क्यों बंद की जाती है गंगनहर?

गंगनहर को हर साल निर्धारित अवधि के लिए बंद करके उसकी सफाई और जरूरी मरम्मत की जाती है। पूरे साल पानी बहने के कारण नहर की दीवारों, संरचनाओं और अन्य हिस्सों में होने वाली कुछ क्षति का पता लगाना मुश्किल हो सकता है। पानी का प्रवाह रोकने से अधिकारियों को नहर का निरीक्षण करने, गाद और कचरा निकालने तथा जरूरी मरम्मत करने का अवसर मिलता है।

उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, इस बार भी वार्षिक रखरखाव के साथ नहर की व्यवस्था को दुरुस्त करने का काम किया जाएगा। इसका उद्देश्य अगले साल तक नहर के संचालन को सुचारु बनाए रखना है।

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कुंभ 2027 की तैयारियों में भी आएगी तेजी

हरिद्वार में वर्ष 2027 में होने वाले कुंभ मेले को देखते हुए घाटों और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास का काम किया जा रहा है। नहर में पानी का प्रवाह बंद रहने से उन हिस्सों में निर्माण और मरम्मत करना आसान होगा, जहां बहते पानी के कारण काम प्रभावित होता है।

इस अवधि में संबंधित विभागों को घाटों के निर्माण, मौजूदा ढांचे की मरम्मत और अन्य जरूरी कार्यों को तेजी से पूरा करने का अवसर मिलेगा। प्रशासन की कोशिश है कि मेले से पहले श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाएं तैयार की जा सकें।

हर की पौड़ी पर गंगाजल कम, श्रद्धालु निराश

गंगनहर बंद होने का असर हरिद्वार के प्रसिद्ध हर की पौड़ी घाट पर भी दिखाई देने लगा है। पानी का प्रवाह रुकने से कई हिस्सों में जलस्तर काफी कम हो गया है और कुछ स्थानों पर घाट सूखे नजर आए हैं। गंगा स्नान के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं को इससे निराशा हुई है।

अधिकारियों के अनुसार, गंगनहर बंद रहने के दौरान हर की पौड़ी पर गंगा आरती के लिए लगभग 200 क्यूसेक पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था बताई गई है। हालांकि, घाट पर स्नान के लिए पानी की वास्तविक उपलब्धता स्थानीय व्यवस्था और जल प्रवाह पर निर्भर करेगी। इसलिए श्रद्धालुओं को यात्रा से पहले ताजा स्थिति की जानकारी लेना उचित होगा।

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उत्तर प्रदेश और दिल्ली-NCR पर क्या होगा असर?

गंगनहर केवल हरिद्वार तक सीमित नहीं है। यह उत्तर प्रदेश के कई जिलों में सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण जल स्रोत है। इसके बंद रहने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों को सिंचाई के लिए अस्थायी परेशानी हो सकती है।

इसके अलावा, नहर का पानी दिल्ली-NCR के कुछ हिस्सों में पेयजल तैयार करने के लिए भी इस्तेमाल होता है। गाजियाबाद के प्रताप विहार स्थित जल शोधन संयंत्र तक भी इसी नहर से पानी पहुंचाया जाता है। इसलिए बंदी के दौरान जल भंडारण और वैकल्पिक प्रबंधन महत्वपूर्ण होंगे। हालांकि, हर क्षेत्र में पानी की आपूर्ति पर कितना असर पड़ेगा, यह स्थानीय भंडारण और संबंधित विभागों की व्यवस्था पर निर्भर करेगा।

कब दोबारा खुलेगी गंगनहर?

निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक, गंगनहर में 7 और 8 नवंबर 2026 की मध्यरात्रि के आसपास पानी का प्रवाह फिर से शुरू किया जाना है। अधिकारियों का लक्ष्य है कि इससे पहले वार्षिक मरम्मत और जरूरी निर्माण कार्य पूरे कर लिए जाएं।

पानी दोबारा छोड़े जाने के बाद हर की पौड़ी और अन्य प्रभावित हिस्सों में सामान्य जलस्तर लौटने में कुछ समय लग सकता है। इस अवधि में श्रद्धालुओं, किसानों और जल आपूर्ति पर निर्भर लोगों के लिए संबंधित विभागों की ताजा सूचनाओं पर ध्यान देना जरूरी रहेगा।

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कुल मिलाकर, गंगनहर की यह अस्थायी बंदी नियमित रखरखाव और कुंभ 2027 की तैयारियों का हिस्सा है। इससे नहर की मरम्मत और घाटों के निर्माण में मदद मिलने की उम्मीद है, लेकिन इस दौरान जल आपूर्ति और सिंचाई का प्रबंधन भी उतना ही महत्वपूर्ण रहेगा।