नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को सात दिन की न्यायिक हिरासत के बाद 21 अक्टूबर 2026 को तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया गया। दिल्ली की स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) अदालत ने उनकी न्यायिक हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की दिल्ली पुलिस की मांग खारिज कर दी। हालांकि, दोनों नेताओं को कुछ शर्तों और लिखित आश्वासनों के आधार पर रिहाई मिली है।
₹50 हजार का निजी मुचलका और जमानतदार देना जरूरी
अदालत के आदेश के अनुसार, सौरव दास और आशुतोष रांका को जांच पूरी होने तक 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और जमानतदारों के बॉन्ड देने थे। दोनों नेताओं ने शांति बनाए रखने का लिखित आश्वासन भी दिया। अदालत ने माना कि उनके लिखित आश्वासनों और बॉन्ड के बाद इस स्तर पर उन्हें आगे न्यायिक हिरासत में रखने की जरूरत नहीं है।
निजी मुचलका अदालत को दिया गया कानूनी आश्वासन होता है। इसे सीधे तौर पर इतनी ही रकम नकद जमा कराने के बराबर नहीं समझना चाहिए।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन बुलाने को लेकर क्या शर्त रखी गई?
रिहाई की सबसे अहम शर्त जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़ी है। दोनों नेताओं ने अदालत को लिखित रूप में भरोसा दिया कि जब तक जंतर-मंतर को कानून के अनुसार दोबारा अधिसूचित करके प्रदर्शन स्थल का दर्जा नहीं दिया जाता, वे वहां प्रदर्शन बुलाने का आह्वान नहीं करेंगे।
उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि भविष्य में उनका कोई भी विरोध-प्रदर्शन संविधान के दायरे में होगा। इसके साथ ही दोनों ने शांति और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने तथा न्यायपालिका और SEM अदालत में विश्वास जताने की बात कही।
अदालत में माफीनामा भी दिया
सुनवाई के दौरान पुलिस ने हिरासत बढ़ाने की मांग करते हुए शांति भंग होने की आशंका जताई थी। पुलिस की ओर से नेताओं के बयानों और उनके व्यवहार को लेकर भी आपत्तियां उठाई गईं। रिपोर्ट के मुताबिक, सीजेपी के वकील ने अदालत में बिना शर्त माफी मांगी और भरोसा दिया कि इस तरह का व्यवहार दोबारा नहीं होगा।
दोनों नेताओं ने लिखित आश्वासन देकर शांति बनाए रखने की प्रतिबद्धता जताई। अदालत ने पुलिस की तीन दिन अतिरिक्त हिरासत की मांग स्वीकार नहीं की और रिहाई का आदेश दिया।
क्या था पूरा मामला?
सौरव दास और आशुतोष रांका को जंतर-मंतर पर तिरंगा मार्च और प्रदर्शन से जुड़े मामले में हिरासत में लिया गया था। दोनों नेता मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। उनकी मांग का संबंध मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान कथित अनियमितताओं और मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोपों से था।
पुलिस का आरोप था कि नेताओं ने जंतर-मंतर पर प्रवेश संबंधी प्रतिबंधों का उल्लंघन किया और पहले दिए गए शांति बॉन्ड की शर्तों का पालन नहीं किया। इसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया था, जिसे 19 अक्टूबर को दो दिन के लिए बढ़ाया गया।
23 अक्टूबर को अगली सुनवाई
रिहाई के बावजूद मामला समाप्त नहीं हुआ है। अदालत ने दोनों नेताओं को हर सुनवाई पर उपस्थित रहने और अपने बॉन्ड तथा लिखित आश्वासनों की शर्तों का पालन करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 23 अक्टूबर 2026 को दोपहर 3 बजे निर्धारित है। पुलिस को इस दौरान जमानतदारों के सत्यापन की रिपोर्ट भी पेश करनी है।
ध्यान देने वाली बात: हिरासत से रिहाई का आदेश मामले में बरी होने के समान नहीं है। मामले की आगे की कार्रवाई और जांच जारी रहेगी।