बुदनी,सीहोर।
मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां विजयासन धाम, सलकनपुर में श्रद्धालुओं के वाहनों से
ली जा रही राशि को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
मंदिर के ऊपरी क्षेत्र तक जाने वाले वाहनों से चार पहिया वाहन के लिए 20 रुपये और दोपहिया वाहन
के लिए 10 रुपये लिए जाने की बात सामने आई है।
रसीद पर इस राशि को ‘सड़क सुधार सहयोग निधि’ बताया जाता है।
लेकिन इस व्यवस्था में सबसे बड़ा सवाल भुगतान के तरीके को लेकर है।
श्रद्धालुओं से राशि केवल नकद लिए जाने और ऑनलाइन भुगतान स्वीकार नहीं किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं।
मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महेश कुमार उपाध्याय के प्रतिनिधि एवं अधिकृत प्रवक्ता राजेश शर्मा ने नकद व्यवस्था के
पीछे ऑडिट आपत्ति से बचने का तर्क दिया है। ऐसे में सवाल है कि वसूली किस अधिकृत व्यवस्था के तहत हो रही है
और इसकी आय-व्यय का हिसाब किस तरह रखा जाता है?
पार्किंग शुल्क या सड़क सुधार निधि, राशि किस मद में ली जा रही?
सलकनपुर धाम में वाहनों से ली जाने वाली राशि को लेकर अलग-अलग स्पष्टीकरण सामने आए हैं।
राजेश शर्मा ने पहले इसे पार्किंग शुल्क बताया, जबकि बाद में कहा कि इस राशि का उपयोग मंदिर परिसर की
आंतरिक सड़कों के रखरखाव के लिए किया जाता है।
रसीद पर इसे सड़क सुधार सहयोग निधि के रूप में दर्शाए जाने की बात भी सामने आई है।
इन अलग-अलग विवरणों के बीच यह स्पष्ट होना जरूरी है कि राशि का आधिकारिक स्वरूप क्या है?
क्या यह पार्किंग शुल्क है, वाहन प्रवेश शुल्क है या सड़क रखरखाव के लिए लिया जाने वाला सहयोग?
क्या राशि देना अनिवार्य है और इसके लिए किस प्राधिकरण की अनुमति ली गई है?
इन सवालों का जवाब संबंधित आदेश, रसीदों और ट्रस्ट के लेखा रिकॉर्ड से मिल सकता है।
ऑनलाइन भुगतान पर रोक क्यों?
इस पूरे मामले में नकद भुगतान की अनिवार्यता सबसे महत्वपूर्ण सवाल बनकर सामने आई है।
शिकायत के अनुसार, यदि कोई श्रद्धालु ऑनलाइन भुगतान करना चाहता है,
तो उसे यह सुविधा नहीं मिलती। प्रवेश मार्ग पर तैनात कर्मचारियों के हवाले से बताया गया है कि
ऑनलाइन भुगतान से राशि सीधे ट्रस्ट के खाते में जमा होगी,
जबकि नकद संग्रह का हिसाब प्रतिदिन शाम को किया जाता है।
ट्रस्ट के अधिकृत प्रवक्ता राजेश शर्मा ने भी नकद भुगतान की व्यवस्था की पुष्टि करते हुए इसे
ऑडिट आपत्तियों से बचने से जोड़ा है।
सवाल यह है कि यदि राशि ट्रस्ट की आय है, तो उसे पारदर्शी तरीके से खाते में जमा करने
और उसका नियमित लेखा रखने में क्या कठिनाई है?
क्या नकद भुगतान के साथ ऑनलाइन भुगतान का विकल्प उपलब्ध नहीं कराया जा सकता?
यदि व्यवस्था किसी विशेष प्रशासनिक या लेखा संबंधी कारण से बनाई गई है,
तो उसका लिखित आधार सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
केवल नकद भुगतान स्वीकार किए जाने से अपने आप वसूली अवैध साबित नहीं होती।
इसकी वैधता और पारदर्शिता का आकलन संबंधित नियमों, अनुमति और लेखा रिकॉर्ड के आधार पर ही किया जा सकता है।
PWD ने बनाई सड़क, फिर सहयोग निधि लेने का आधार क्या?
सलकनपुर को प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है।
उज्जैन के महाकाल लोक की तर्ज पर यहां ‘देवी लोक’ विकसित किया जा रहा है।
इस परियोजना में 200 करोड़ रुपये से अधिक की लागत का उल्लेख किया गया है।
इसी बीच मंदिर तक पहुंचने वाले लगभग 4.80 किलोमीटर लंबे मार्ग के चौड़ीकरण और मजबूतीकरण का
काम लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा कराए जाने की जानकारी सामने आई है।
उपलब्ध विवरण के अनुसार, निर्माण कार्य 21 जून 2018 को शुरू हुआ और 31 मार्च 2021 को पूरा हुआ।
इसकी लागत करीब 2.22 करोड़ रुपये बताई गई है। ठेकेदार की पांच साल की परफॉर्मेंस गारंटी 31 मार्च 2026 को समाप्त होने का भी उल्लेख है।
यदि सड़क का निर्माण सरकारी विभाग ने कराया था, तो सड़क सुधार सहयोग निधि लेने का आधार क्या है?
क्या यह राशि मंदिर परिसर की आंतरिक सड़कों के रखरखाव के लिए है या बाहरी पहुंच मार्ग के लिए?
दोनों के बीच अंतर स्पष्ट होना चाहिए। ट्रस्ट को यह बताना चाहिए कि राशि किस सड़क पर खर्च होती है
और उस काम की जिम्मेदारी किस विभाग या संस्था की है।
सड़क के निर्माण पर सरकारी खर्च होने मात्र से ट्रस्ट द्वारा किसी अन्य मद में राशि लेना
अपने आप अनुचित नहीं ठहरता। लेकिन इसके लिए शुल्क का स्पष्ट आधार, निर्धारित उद्देश्य और खर्च का पारदर्शी विवरण आवश्यक है।
नवरात्रि में बढ़ता है श्रद्धालुओं और वाहनों का दबाव
सलकनपुर धाम सीहोर जिले का प्रमुख धार्मिक स्थल है। नवरात्रि सहित विशेष अवसरों पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
ऐसे समय में वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ प्रवेश, पार्किंग और यातायात प्रबंधन की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
चार पहिया वाहनों से 20 रुपये और दोपहिया वाहनों से 10 रुपये लिए जाने की जानकारी के आधार पर कुल संग्रह का अनुमान लगाया जा सकता है,
लेकिन इसके लिए प्रतिदिन आने वाले वाहनों की वास्तविक संख्या और जारी रसीदों का रिकॉर्ड आवश्यक है। फिलहाल कुल दैनिक, मासिक या वार्षिक संग्रह का कोई सत्यापित आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
ट्रस्ट को यह जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए कि अब तक कितनी राशि एकत्र हुई,
उसे किस खाते में जमा किया गया और किन कार्यों पर खर्च किया गया। इससे श्रद्धालुओं को
यह समझने में मदद मिलेगी कि उनके द्वारा दी गई राशि का उपयोग घोषित उद्देश्य के अनुरूप हो रहा है या नहीं।
ऑनलाइन भुगतान को लेकर विवाद, श्रद्धालुओं ने लगाए मारपीट के आरोप
सलकनपुर में भुगतान व्यवस्था को लेकर पहले भी विवाद सामने आने की खबरें प्रकाशित हुई हैं।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, देवास जिले से आए पांच श्रद्धालुओं का 20 रुपये के भुगतान को लेकर प्रवेश मार्ग पर कर्मचारियों से विवाद हुआ था।
श्रद्धालुओं ने आरोप लगाया था कि कर्मचारियों ने उनका ऑनलाइन भुगतान स्वीकार नहीं किया।
बाद में नकद भुगतान करके उन्होंने दर्शन किए।
रिपोर्टों के मुताबिक, दर्शन के बाद लौटते समय श्रद्धालुओं के साथ मारपीट और उनकी कार में तोड़फोड़ की घटना भी हुई।
कुछ लोगों को चोटें आने की बात सामने आई थी।
मामले में पुलिस तक शिकायत पहुंचने की जानकारी प्रकाशित हुई,
जबकि बाद में समझौते के जरिए विवाद समाप्त होने की बात भी कही गई।
यह मामला भुगतान व्यवस्था, कर्मचारियों के व्यवहार और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के संबंध में सवाल उठाता है।
किसी शुल्क को लेकर असहमति होने पर विवाद सुलझाने के लिए स्पष्ट शिकायत प्रक्रिया होनी चाहिए।
श्रद्धालुओं के साथ दुर्व्यवहार या हिंसा के आरोपों की जांच भी नियमानुसार होनी चाहिए।
सीएम हेल्पलाइन में शिकायत, जांच की मांग
जिले के एक श्रद्धालु ने कथित वसूली के संबंध में सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई है।
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि मंदिर परिसर में वाहनों से ली जाने वाली राशि की व्यवस्था और उसकी वैधता की जांच की जाए।
इस शिकायत के बाद जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग और मंदिर ट्रस्ट की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि संबंधित मार्ग पर वाहन प्रवेश शुल्क, पार्किंग शुल्क या
सड़क सुधार सहयोग निधि लेने के लिए कौन-सी अनुमति लागू है।
साथ ही, यह भी जांचा जाना चाहिए कि राशि की वसूली, रसीद जारी करने और
उसे खाते में जमा करने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुरूप है या नहीं।
यदि शुल्क अधिकृत है, तो उसकी शर्तें और भुगतान के उपलब्ध विकल्प सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
यदि जांच में अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित नियमों के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब ट्रस्ट और प्रशासन को इन सवालों के जवाब देने चाहिए
वाहनों से 10 और 20 रुपये लेने का अधिकृत आदेश किसने जारी किया?
राशि पार्किंग शुल्क है, वाहन प्रवेश शुल्क है या सड़क सुधार सहयोग निधि?
ऑनलाइन भुगतान स्वीकार नहीं किए जाने का लिखित आधार क्या है?
प्रतिदिन एकत्र राशि कितनी है और उसे किस खाते में जमा किया जाता है?
सहयोग निधि से अब तक कौन-कौन से कार्य कराए गए और उनका खर्च कितना है?
क्या इस व्यवस्था का नियमित ऑडिट होता है और क्या उसका विवरण सार्वजनिक किया जा सकता है?
सलकनपुर धाम में देशभर से श्रद्धालु मां विजयासन के दर्शन के लिए आते हैं।
उनकी आस्था के साथ सुविधा और पारदर्शिता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
मामला 10 या 20 रुपये का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का है जिसके तहत राशि ली जाती है।
ट्रस्ट और प्रशासन की ओर से दस्तावेजों के साथ स्पष्ट जवाब आने पर ही यह तय हो सकेगा
कि वर्तमान व्यवस्था नियमों के अनुरूप है या इसमें सुधार की जरूरत है।