MP:सिया अध्यक्ष अफसरशाही से परेशान, CS को पत्र लिखकर लगाए गंभीर आरोप,CBI जांच की मांग

मध्य प्रदेश में 237 डीम्ड पर्यावरण मंजूरियों और SEIAA के कामकाज पर विवाद। अध्यक्ष शिवनारायण सिंह चौहान ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कार्रवाई और CBI जांच की मांग की।

भोपाल।

मध्य प्रदेश में पर्यावरणीय मंजूरियों को लेकर विवाद गहरा गया है।

राज्य स्तरीय पर्यावरण समाघात निर्धारण प्राधिकरण (SEIAA) के अध्यक्ष शिवनारायण सिंह चौहान

ने मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल को नया पत्र लिखा है।

इसमें उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

अध्यक्ष का दावा है कि प्राधिकरण के कामकाज में बाधाएं पैदा की जा रही हैं।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निलंबित करने और पूरे मामले की CBI जांच कराने की मांग की है।

विवाद की जड़ 237 परियोजनाओं को कथित तौर पर दी गई ‘डीम्ड पर्यावरण मंजूरी’ है।

अध्यक्ष ने पहले भी इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताई थी।

मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।

अब नए पत्र में उन्होंने प्राधिकरण के पोर्टल, बैठकों और कर्मचारियों की पदस्थापना से जुड़े मुद्दे उठाए हैं।

वरिष्ठ अधिकारियों पर कामकाज बाधित करने का आरोप

16 अक्टूबर को लिखे पत्र में अध्यक्ष ने विभागीय अपर मुख्य सचिव अनिरुद्ध मुखर्जी

और SEIAA के सदस्य सचिव हर्ष पंचोली का उल्लेख किया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारियों के कार्यकाल में प्राधिकरण का काम प्रभावित हुआ।

पर्यावरण कानून और निर्धारित प्रक्रियाओं के उल्लंघन का दावा भी किया गया है।

चौहान ने संबंधित अधिकारियों को निलंबित करने और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है।

उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने का भी अनुरोध किया है।

हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।

तीन महीने से पोर्टल बंद होने का दावा

(SEIAA Chairman SNS Chouhan)

अध्यक्ष ने SEIAA के ऑनलाइन पोर्टल की स्थिति पर भी सवाल उठाए हैं।

पत्र के मुताबिक, पोर्टल करीब तीन महीने से बंद है।

इससे प्राधिकरण के कामकाज पर असर पड़ने का दावा किया गया है।

चौहान ने आरोप लगाया कि काम की जानकारी रखने वाले कर्मचारियों को हटाया गया।

उनकी जगह दूसरे अनुभवहीन कर्मचारियों को पदस्थ किया गया।

इनमें एक गंभीर रोग का शिकार है।

पत्र में कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने और बार-बार बदलाव का भी उल्लेख है।

अध्यक्ष का दावा है कि एक साल में 20 से अधिक बार कर्मचारियों में बदलाव किया गया।

बैठकें टलने और मंजूरी पत्र जारी करने में देरी की शिकायत

पत्र में SEIAA की बैठकों को लेकर भी आपत्ति जताई गई है।

अध्यक्ष के अनुसार, बैठकें नियमित रूप से नहीं हो रही हैं।

उन्हें बार-बार पुनर्निर्धारित किया जाता है।

बैठक की कार्यवाही का विवरण यानी मिनट्स ऑफ मीटिंग (MoM) भी समय पर तैयार नहीं होने का आरोप है।

चौहान ने यह भी दावा किया कि पर्यावरणीय मंजूरी मिलने के बाद संबंधित पत्र जारी करने में देरी होती है।

इन आरोपों की पुष्टि के लिए बैठक के रिकॉर्ड,

पोर्टल की स्थिति और मंजूरी संबंधी दस्तावेजों की जांच जरूरी होगी।

237 परियोजनाओं की डीम्ड मंजूरी का पुराना विवाद

SEIAA में विवाद का एक प्रमुख मुद्दा 237 परियोजनाओं को बीते साल दी गई डीम्ड पर्यावरण मंजूरी है।

अध्यक्ष की आपत्ति के बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था।

प्रकरण में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार और पर्यावरण मंत्रालय ने अदालत में हलफनामा

दाखिल कर कहा था कि पर्यावरण नियमों में ‘डीम्ड एनवायरनमेंटल क्लीयरेंस’ देने का कोई प्रावधान नहीं है।

इसके बाद मामले में संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए गए।

केंद्र सरकार के इस खुलासे के बाद प्रदेश के आईएएस अधिकारी नवनीत कोठारी,

उमा माहेश्वरी और श्रीमन शुक्ला की भूमिका पर भी सवाल उठे।

बताया जाता है कि इन्होंने एक दिन में ही यह अनुमतियां जारी कर दी थीं।

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला, अब प्रशासनिक कार्रवाई पर नजर

237 परियोजनाओं की मंजूरी का विवाद पहले ही कानूनी स्तर तक पहुंच चुका है।

अब SEIAA अध्यक्ष के नए पत्र ने प्राधिकरण के प्रशासनिक कामकाज को भी बहस के केंद्र में ला दिया है।

चौहान ने पत्र में आरोप लगाया है कि पर्यावरण कानून और विधिक प्रावधानों का उल्लंघन किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि प्राधिकरण के काम में जानबूझकर बाधाएं पैदा की जा रही हैं।

3 माह पहले सील कर दिया था दफ्तर

करीब तीन माह पूर्व गत 14 जुलाई को SEIAA चेयरमैन के कार्यालय को अचानक सील कर दिया गया था।

वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद देर शाम कार्यालय खोल दिया गया।

बाद में दफ्तर सील किए जाने का कारण बिजली का फॉल्ट बताया गया।

CBI जांच की मांग, सरकार के रुख का इंतजार

अध्यक्ष ने राज्य और केंद्र सरकार से मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों के निलंबन और अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है।

साथ ही, कथित आपराधिक कृत्यों और संबंधित अभिलेखों की CBI जांच कराने की मांग भी की है।

अब इस मामले में सरकार के रुख का इंतजार है।

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  • MP SEIAA विवाद (MP SEIAA Controversy)
  • 237 डीम्ड मंजूरी (237 Deemed Clearances)
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  • SEIAA अध्यक्ष का पत्र (SEIAA Chairman Letter)
  • मध्य प्रदेश पर्यावरण विभाग (MP Environment Department)
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  • CBI जांच की मांग (Demand for CBI Investigation)
  • मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल (Chief Secretary Ashok Barnwal)
  • पर्यावरण कानून उल्लंघन (Environmental Law Violation)
  • सुप्रीम कोर्ट डीम्ड EC मामला (Supreme Court Deemed EC Case)
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