MP:मिट्टी-राख से बना रहे थे नकली DAP, 500 से ज्यादा सरकारी बोरियां जब्त

मुरैना में मिट्टी और काली राख से नकली DAP खाद बनाने का मामला सामने आया। पुलिस ने 500 से ज्यादा बोरियां जब्त कीं, सप्लाई नेटवर्क की जांच जारी।

मुरैना।

किसानों को असली खाद के नाम पर ठगने की तैयारी का मुरैना में खुलासा हुआ है।

यहां एक खंडहरनुमा इमारत में कथित तौर पर नकली DAP खाद तैयार की जा रही थी।

पुलिस ने छापा मारकर 500 से ज्यादा बोरियां बरामद की हैं।

मौके पर कंकड़-मिट्टी और काली राख का मिश्रण मिला।

इसे सरकारी DAP खाद की बोरियों में भरकर पैक किया जा रहा था।

कार्रवाई के बाद कृषि विभाग ने खाद जब्त कर ली।

अब पुलिस फैक्ट्री संचालक और सप्लाई नेटवर्क की जांच कर रही है।

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खंडहर के दो कमरों में चल रहा था खेल

 

नकली खाद बनाने का काम एक खंडहरनुमा इमारत के दो कमरों में चल रहा था।

पुलिस ने यहां छापा मारा, तो करीब आधा दर्जन मजदूर बोरियों में मिश्रण भरते मिले।

बताया जा रहा है कि फैक्ट्री संचालक मजदूरों को मंडी से लाया था।

उन्हें 800 रुपये प्रतिदिन की दिहाड़ी दी जा रही थी।

हालांकि, फैक्ट्री के वास्तविक संचालक और कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका जांच के बाद स्पष्ट होगी।

मिट्टी और काली राख को DAP बताकर पैकिंग

मौके पर कंकड़-मिट्टी और काली राख मिलाकर मिश्रण तैयार किया जा रहा था।

इसके बाद इसे सरकारी DAP खाद की बोरियों में भरा जा रहा था।

ऐसे में आशंका है कि इस मिश्रण को असली खाद बताकर बाजार में खपाने की तैयारी थी।

यह भी पता लगाया जा रहा है कि बोरियां कहां से लाई गई थीं।

साथ ही, पुलिस यह जांच रही है कि अब तक कितनी खाद बाजार में पहुंची है और किन क्षेत्रों में इसकी आपूर्ति होनी थी।

कृषि विभाग ने 500 से ज्यादा बोरियां जब्त कीं

 

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(मौके पर जांच करता कृषि विभाग का अमला)

छापे की जानकारी मिलने पर कृषि विभाग के सहायक संचालक अनंत बिहारी सढ़ैया मौके पर पहुंचे।

उन्होंने बरामद खाद को जब्त कराया।

सुरक्षा के लिए बोरियों को थाने भिजवाया गया।

अब विभाग मामले में आगे की कार्रवाई कर रहा है।

सरकारी बोरियां कहां से आईं?

स्टेशन रोड थाना पुलिस के अनुसार,

पुलिस फैक्ट्री के संचालन से जुड़े लोगों की पहचान करने में जुटी है।

जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि सरकारी DAP खाद की बोरियां कहां से आईं?

इसके अलावा, मिश्रण तैयार करने के लिए कच्चा माल कहां से लाया जा रहा था

और इसकी बिक्री किन क्षेत्रों में होनी थी, इन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं।

किसानों की फसल और जेब पर पड़ सकता है असर

नकली खाद की बिक्री किसानों के लिए दोहरी मुसीबत बन सकती है।

पहली, खाद के नाम पर खर्च की गई रकम बर्बाद हो सकती है।

दूसरी, यदि मिश्रण में जरूरी पोषक तत्व नहीं हैं,

तो फसल की बढ़वार और उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

फिलहाल 500 से ज्यादा बोरियों की बरामदगी के बाद जांच का दायरा बढ़ गया है।

अब यह पता लगना बाकी है कि इस कारोबार के पीछे कौन लोग हैं

और नकली खाद बाजार तक पहुंची भी थी या नहीं।

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