नई दिल्ली।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्ष ने अब न्यायिक रास्ता अपनाया है।
कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों के नेताओं ने चुनावी प्रक्रिया
पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।
इस मुद्दे पर सोमवार को दिल्ली में राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं।
राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे समेत
विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने की कोशिश की।
पुलिस ने उन्हें अदालत से करीब 500 मीटर पहले बाराखंभा रोड के पास रोक दिया।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल किए जाने की बात सामने आई।
इस घटनाक्रम ने SIR विवाद को राजनीतिक विरोध से आगे बढ़ाकर न्यायिक चुनौती के केंद्र में ला दिया है।
विपक्ष का जोर मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठाने
और अपनी शिकायतों को अदालत के सामने रखने पर है।
LIVE: March For Democracy – Supreme Court, New Delhi https://t.co/1K8bMjLqCu
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) October 12, 2026
CJI से मिलने का समय मांगा, अदालत में दाखिल की याचिका
विपक्षी नेताओं ने रविवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को पत्र लिखकर मुलाकात का समय मांगा था।
वे SIR और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दों पर ज्ञापन देना चाहते थे।
हालांकि, CJI ने मुलाकात के अनुरोध पर उन्हें न्यायिक प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि संबंधित मामले पहले से अदालत के विचाराधीन हैं।
इसलिए इन मुद्दों पर न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही आगे बढ़ना उचित होगा।
इसके बाद विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने का फैसला किया।
याचिका में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
राहुल गांधी ने मार्च को बताया ‘शिवजी की बारात’
#WATCH दिल्ली: वीडियो INDIA गठबंधन के सांसदों के विरोध मार्च की है।
गठबंधन ने आज सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने का ऐलान किया है। उन्होंने यह भी घोषणा की है कि वे CEC ज्ञानेश कुमार के मामले और SIR प्रक्रिया से जुड़े अपने आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेंगे।
(वीडियो स्टेट्समैन हाउस के बाहर से है)
— ANI_HindiNews (@AHindinews) October 12, 2026
मार्च से पहले राहुल गांधी ने करीब 40 मिनट तक प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
उन्होंने कहा कि विपक्ष का मार्च शिवजी की बारात की तरह है, जिसमें कोई भी शामिल हो सकता है।
विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची से पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने की
आशंकाओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
उसने SIR की प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की है।
हालांकि, मतदाता सूची में गड़बड़ी को लेकर विपक्ष के आरोपों और
चुनाव आयोग के पक्ष को अलग-अलग समझना जरूरी है।
याचिका दाखिल होने का अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने आरोपों को सही मान लिया है।
याचिका में क्या मांग की गई?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, विपक्षी नेताओं की याचिका में SIR की वैधता
और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं।
याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग से संबंधित रिकॉर्ड सार्वजनिक करने
और चुनावी प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच जैसी मांगें भी रखी हैं।
अब इस मामले में अदालत की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
सुनवाई के दौरान ही स्पष्ट होगा कि विपक्ष की मांगों पर सुप्रीम कोर्ट क्या रुख अपनाता है।
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