Ola-Uber-Rapido पर सरकार का शिकंजा, नियमों का पालन नहीं किया तो कार्रवाई; दिया 6 महीने का अल्टीमेटम!

Ola, Uber और Rapido जैसी ऐप आधारित कैब और बाइक-टैक्सी कंपनियों पर नियमों के पालन को लेकर सरकार और स्थानीय प्रशासन की सख्ती बढ़ी है। चंडीगढ़ में Uber और Rapido के लाइसेंस छह महीने के लिए निलंबित किए गए, जबकि Ola और inDrive पर भी पहले कार्रवाई हो चुकी है। वहीं महाराष्ट्र में भी एग्रीगेटर लाइसेंस और EV से जुड़े नियमों को लेकर कंपनियों पर दबाव बढ़ा है।

नई दिल्ली: देश में ऐप आधारित कैब और बाइक-टैक्सी सेवाओं को लेकर सरकार और प्रशासन का रुख लगातार सख्त होता जा रहा है। Ola, Uber और Rapido जैसी कंपनियों को अलग-अलग राज्यों में स्थानीय परिवहन नियमों और एग्रीगेटर पॉलिसी का पालन करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। नियमों का पालन नहीं करने पर लाइसेंस निलंबन जैसी कार्रवाई भी सामने आ चुकी है। हाल ही में चंडीगढ़ प्रशासन ने Uber और Rapido के एग्रीगेटर लाइसेंस को छह महीने के लिए निलंबित कर दिया, जबकि Ola और inDrive के खिलाफ भी इससे पहले इसी तरह की कार्रवाई की जा चुकी है।

6 महीने तक बंद रहीं Ola-Uber-Rapido जैसी सेवाएं

चंडीगढ़ में State Transport Authority (STA) ने सितंबर 2026 में Uber और Rapido के लाइसेंस छह महीने के लिए निलंबित किए। प्रशासन ने आरोप लगाया कि दोनों कंपनियां बार-बार नोटिस और अपना पक्ष रखने के अवसर मिलने के बावजूद निर्धारित नियमों का संतोषजनक तरीके से पालन नहीं कर पाईं। यह कार्रवाई Chandigarh Administration Motor Vehicles Aggregators Rules, 2025 के तहत की गई।

इससे पहले चंडीगढ़ में Ola और inDrive के लाइसेंस भी छह महीने के लिए निलंबित किए गए थे। इसके बाद चार प्रमुख ऐप आधारित एग्रीगेटर सेवाएं—Ola, Uber, Rapido और inDrive—चंडीगढ़ में निलंबन के दायरे में आ गई थीं।

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किन नियमों को लेकर कार्रवाई हुई?

चंडीगढ़ प्रशासन की कार्रवाई में कई तरह के कथित नियम उल्लंघन सामने आए। इनमें ड्राइवरों के स्वास्थ्य और टर्म इंश्योरेंस, ड्राइवर ट्रेनिंग, निर्धारित किराया, वाहनों की पात्रता और अन्य सुरक्षा एवं संचालन संबंधी नियम शामिल थे। अधिकारियों ने यह भी कहा कि कुछ मामलों में निर्धारित किराया संरचना के पालन को लेकर शिकायतें मिली थीं।

Uber और Rapido के मामले में प्रशासन ने यह भी कहा कि कंपनियों को पर्याप्त अवसर दिए गए थे, लेकिन उनके जवाब और अनुपालन दस्तावेज संतोषजनक नहीं पाए गए। इसके बाद लाइसेंस निलंबन का फैसला लिया गया।

सरकार के नए एग्रीगेटर गाइडलाइंस में क्या है?

केंद्र सरकार ने Motor Vehicle Aggregator Guidelines, 2025 जारी की हैं। इनका उद्देश्य ऐप आधारित परिवहन सेवाओं के लिए सुरक्षा, ड्राइवर कल्याण और यात्रियों से जुड़े नियमों को स्पष्ट करना है। दिशानिर्देशों में किराये को लेकर भी प्रावधान हैं। इनके मुताबिक राज्य द्वारा तय बेस फेयर को आधार माना जाता है और डायनेमिक प्राइसिंग के लिए भी सीमा निर्धारित की गई है।

केंद्र के दिशानिर्देशों में ड्राइवरों के लिए भी कमाई के हिस्से से जुड़े प्रावधान हैं। ड्राइवर के स्वामित्व वाले वाहन के मामले में ड्राइवर को किराये का कम से कम 80 प्रतिशत हिस्सा मिलने का प्रावधान है, जबकि एग्रीगेटर के स्वामित्व वाले वाहन पर ऑनबोर्ड ड्राइवर को कम से कम 60 प्रतिशत हिस्सा मिलना चाहिए।

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लाइसेंस निलंबन की भी है व्यवस्था

Motor Vehicle Aggregator Guidelines, 2025 के तहत नियमों का उल्लंघन होने पर सक्षम प्राधिकारी एग्रीगेटर का लाइसेंस निलंबित कर सकता है। दिशानिर्देशों में लाइसेंस निलंबन की अधिकतम अवधि तीन महीने तक बताई गई है और कुछ परिस्थितियों में आर्थिक दंड का भी प्रावधान है। वहीं राज्य और केंद्रशासित प्रदेश अपने स्थानीय नियमों के तहत अलग प्रावधान लागू कर सकते हैं।

चंडीगढ़ में हुई छह महीने की कार्रवाई इसी स्थानीय नियम व्यवस्था के तहत हुई है। इसलिए केंद्र की 2025 गाइडलाइंस और किसी राज्य या केंद्रशासित प्रदेश के अपने एग्रीगेटर नियमों को एक ही व्यवस्था मानना सही नहीं होगा।

महाराष्ट्र में भी सख्ती

महाराष्ट्र में भी Ola, Uber और Rapido समेत ऐप आधारित टैक्सी एग्रीगेटर्स को लाइसेंस लेने और राज्य के नियमों का पालन करने को कहा गया था। राज्य सरकार ने एग्रीगेटर लाइसेंस के लिए समयसीमा तय की थी और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की चेतावनी दी थी।

इसके अलावा महाराष्ट्र सरकार ने बाइक-टैक्सी एग्रीगेटर्स को पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहन बेड़े में बदलने के लिए जुलाई 2027 तक की समयसीमा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक Ola, Uber और Rapido जैसी कंपनियों को इस बदलाव के लिए नौ महीने का समय दिया गया है।

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यात्रियों और ड्राइवरों पर क्या होगा असर?

एग्रीगेटर कंपनियों पर बढ़ती निगरानी का सीधा असर यात्रियों और ड्राइवरों दोनों पर पड़ सकता है। सरकार और प्रशासन का जोर किराये में पारदर्शिता, ड्राइवरों के बीमा और प्रशिक्षण, वाहन सुरक्षा तथा उपभोक्ता हितों पर है।

वहीं कंपनियों के लिए अलग-अलग राज्यों में अलग नियम और लाइसेंस व्यवस्था संचालन को जटिल बना सकती है। ऐसे में Ola, Uber और Rapido जैसी कंपनियों के लिए स्थानीय नियमों के मुताबिक अनुपालन सुनिश्चित करना अहम हो गया है।

इस बीच केंद्र सरकार की ओर से भी ऐप आधारित कैब और बाइक-टैक्सी सेवाओं की कुछ प्रथाओं पर निगरानी बढ़ी है। सितंबर 2026 में CCPA ने Rapido पर यात्रियों को अतिरिक्त भुगतान के लिए प्रेरित करने वाले कथित ‘dark pattern’ को लेकर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। CCPA ने कहा था कि मामले की जांच व्यापक रूप से राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म्स के संदर्भ में की गई थी और Uber तथा Ola से संबंधित जांच भी चल रही थी।

ऐसे में आने वाले समय में ऐप आधारित कैब और बाइक-टैक्सी सेवाओं के लिए किराया, ड्राइवर कल्याण, बीमा, सुरक्षा और उपभोक्ता अधिकारों से जुड़े नियमों का पालन ज्यादा महत्वपूर्ण होने वाला है।