चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का मार्च, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग; AAP-DMK ने बनाई दूरी

SIR विवाद को लेकर INDIA ब्लॉक के सांसद आज संसद से निर्वाचन सदन तक विरोध मार्च निकाल रहे हैं। विपक्ष ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है, जबकि AAP और DMK ने मार्च से दूरी बनाई है।

नई दिल्ली: चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। मंगलवार, 6 अक्टूबर को INDIA ब्लॉक के सांसदों ने चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध मार्च का ऐलान किया है। विपक्षी दलों का यह मार्च संसद भवन से निर्वाचन सदन तक प्रस्तावित है। इस दौरान विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराएगा।

140 से ज्यादा सांसद होंगे शामिल

INDIA ब्लॉक ने दावा किया है कि इस विरोध मार्च में 140 से अधिक सांसद शामिल होंगे। मार्च की शुरुआत संसद परिसर से होने वाली है और विपक्षी सांसद निर्वाचन सदन तक जाने की कोशिश करेंगे। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल इस प्रदर्शन के जरिए चुनाव आयोग पर दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव भी मार्च में शामिल होने के लिए दिल्ली रवाना हो चुके हैं। कांग्रेस के राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे समेत विपक्ष के कई प्रमुख नेता इस अभियान का नेतृत्व कर सकते हैं।

AAP और DMK ने बनाई दूरी

इस विरोध मार्च में विपक्षी एकजुटता के बावजूद आम आदमी पार्टी (AAP) और DMK शामिल नहीं होंगी। AAP सांसद संजय सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी SIR के मुद्दे पर अपनी लड़ाई अलग तरीके से लड़ रही है। उनका कहना है कि SIR को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध हो रहा है और AAP इस मुद्दे पर अपने स्तर पर आंदोलन कर रही है।

See also  राहुल गांधी का थाने में धरना, साहिल लोचव के लिए FIR की मांग; BJP ने साधा निशाना

INDIA ब्लॉक ने 30 सितंबर को बैठक के बाद इस मार्च का ऐलान किया था। उस बैठक में भी AAP और DMK शामिल नहीं हुए थे। ऐसे में मंगलवार का प्रदर्शन विपक्षी एकता के साथ-साथ गठबंधन के भीतर मतभेदों को भी सामने ला रहा है।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग क्यों?

विपक्ष का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची और वोटर रजिस्ट्रेशन से जुड़े नियमों में ऐसे बदलाव किए गए हैं, जिनसे मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है।

इस विवाद में Form 6 भी अहम मुद्दा बन गया है। यह फॉर्म मतदाता सूची में नाम जोड़ने से जुड़ा है। विपक्ष का आरोप है कि इसमें बदलाव को लेकर पारदर्शिता नहीं बरती गई। वहीं चुनाव आयोग ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि SIR से जुड़े फैसले आयोग के स्तर पर लिए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से बढ़ी सियासी हलचल

SIR विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट में भी मामले को लेकर सुनवाई हुई है। अदालत ने चुनाव आयोग और उसके सदस्यों से यह स्पष्ट करने को कहा है कि SIR से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले क्या CEC द्वारा अकेले लिए गए थे। कोर्ट ने संकेत दिया कि अगर आयोग के ऐसे फैसले कानून के अनुरूप नहीं पाए जाते या वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत बहुमत से नहीं लिए गए हैं, तो उन पर रोक लगाई जा सकती है।

See also  प्रियांका चतुर्वेदी ने BJP को दी कड़ी चेतावनी: साँपों को दूध नहीं, वे भी काटेंगे

इस घटनाक्रम ने विपक्ष को चुनाव आयोग के खिलाफ अपने अभियान को और तेज करने का मौका दिया है। विपक्ष इसे लोकतंत्र और मताधिकार से जुड़ा मुद्दा बता रहा है, जबकि चुनाव आयोग और बीजेपी विपक्ष के आरोपों को खारिज करते रहे हैं।

दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम

विरोध मार्च को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। निर्वाचन सदन और संसद के आसपास बैरिकेडिंग की गई है और बड़ी संख्या में पुलिस तथा RAF के जवानों को तैनात किया गया है। नई दिल्ली जिले में 3,000 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की तैनाती की खबर है।

मार्च के कारण मध्य दिल्ली के कई इलाकों में ट्रैफिक डायवर्जन भी किया गया है। कनॉट प्लेस, पटेल चौक, संसद मार्ग, अशोक रोड और जंतर-मंतर रोड समेत कई मार्गों पर यातायात प्रभावित होने की संभावना है।

कुल मिलाकर, SIR विवाद ने INDIA ब्लॉक और चुनाव आयोग के बीच टकराव को और तेज कर दिया है। अब नजर इस बात पर है कि विपक्षी मार्च के बाद चुनाव आयोग की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आगे की रणनीति क्या होगी।