नई दिल्ली।
किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP को लेकर लगातार तीन बड़े फैसले सामने आए हैं।
इनका सीधा असर रबी फसलों के भाव, दलहन-तिलहन की सरकारी खरीद और खाद्य तेल उत्पादन पर पड़ सकता है।
1-केंद्र ने 2027-28 के रबी मार्केटिंग सीजन के लिए सभी छह अनिवार्य रबी फसलों की MSP बढ़ाई है।
इसमें सबसे बड़ी बढ़ोतरी कुसुम में ₹675 प्रति क्विंटल की हुई है।
वहीं गेहूं की MSP ₹25 बढ़ाकर ₹2,610 प्रति क्विंटल की गई है।
2-इसी बीच कृषि लागत एवं मूल्य आयोग यानी CACP ने तिलहन की MSP को उसकी तेल मात्रा से जोड़ने की सिफारिश की है।
प्रस्ताव का उद्देश्य ज्यादा तेल देने वाली किस्मों और बेहतर उत्पादन को प्रोत्साहित करना है।
3-सरकार ने दूसरी ओर खरीफ 2026-27 में दलहन और तिलहन की MSP पर खरीद
के लिए ₹5,547.99 करोड़ मंजूर किए हैं।
यह खरीद उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में होगी।
गेहूं की MSP ₹2,610 हुई

रबी सीजन 2027-28 के लिए गेहूं की MSP ₹25 बढ़ाई गई है। अब यह ₹2,610 प्रति क्विंटल होगी।
चना की MSP ₹83 बढ़कर ₹5,958 हुई है।
मसूर में ₹390 की बढ़ोतरी हुई है। इसकी नई MSP ₹7,390 प्रति क्विंटल होगी।
सरसों और रेपसीड की MSP ₹413 बढ़कर ₹6,613 हुई है।
कुसुम में सबसे ज्यादा ₹675 की बढ़ोतरी हुई। इसकी नई MSP ₹7,215 प्रति क्विंटल होगी।
तिलहन में अब तेल की मात्रा महत्वपूर्ण हो सकती है

CACP ने तिलहन की MSP तय करने में सिर्फ वजन को आधार बनाने के बजाय
उसमें मौजूद तेल की मात्रा को भी महत्व देने का सुझाव दिया है।
इसके तहत ज्यादा तेल वाली उपज को अतिरिक्त प्रीमियम देने की व्यवस्था पर विचार किया गया है।
इसका मकसद किसानों को ज्यादा तेल वाली किस्मों की खेती के लिए प्रोत्साहित करना है।
साथ ही घरेलू खाद्य तेल उत्पादन बढ़ाने पर जोर है।

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तीन राज्यों में ₹5,548 करोड़ की खरीद

केंद्र ने खरीफ 2026-27 के लिए दलहन और तिलहन की MSP पर खरीद को मंजूरी दी है।
इसके लिए कुल ₹5,547.99 करोड़ की राशि स्वीकृत हुई है।
उत्तर प्रदेश में तुअर और मूंग की खरीद होगी। कर्नाटक और तेलंगाना में
सोयाबीन, मूंग और सूरजमुखी की खरीद को मंजूरी दी गई है।
सरकार के अनुसार इस योजना के तहत करीब 7.06 लाख टन दलहन और तिलहन की खरीद की जाएगी।
सरकार का फोकस क्यों बदला?

इन फैसलों में एक समान दिशा दिखाई देती है।
सरकार गेहूं और चावल जैसी प्रमुख फसलों के साथ दलहन और तिलहन का उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रही है।
खासकर तिलहन उत्पादन बढ़ाने का संबंध खाद्य तेल के आयात पर निर्भरता घटाने से है।
सरकार के अनुसार नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल्स-ऑयलसीड्स का लक्ष्य
2030-31 तक प्राथमिक तिलहन उत्पादन को 3.9 करोड़ टन से बढ़ाकर 6.97 करोड़ टन करना है।
किसानों के लिए क्या बदलेगा?

अगर तेल की मात्रा आधारित MSP व्यवस्था लागू होती है,
तो तिलहन की गुणवत्ता भी कीमत तय करने में महत्वपूर्ण हो सकती है।
दूसरी ओर MSP पर सरकारी खरीद बढ़ने से बाजार भाव गिरने की स्थिति में किसानों को सुरक्षा मिल सकती है।
हालांकि, तेल की मात्रा के आधार पर MSP लागू करने की यह सिफारिश है,
अंतिम नीति या लागू नियम नहीं।
इसके लिए आगे सरकार का निर्णय जरूरी होगा।
MSP की नई दरें
फसल 2026-27 MSP 2027-28 MSP बढ़ोतरी
गेहूं ₹2,585 ₹2,610 ₹25
जौ ₹2,150 ₹2,286 ₹136
चना ₹5,875 ₹5,958 ₹83
मसूर ₹7,000 ₹7,390 ₹390
सरसों/रेपसीड ₹6,200 ₹6,613 ₹413
कुसुम ₹6,540 ₹7,215 ₹675
आंकड़े केंद्र सरकार की 30 सितंबर 2026 की घोषणा के अनुसार हैं।
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