मध्य प्रदेश में NGOs की ऑनलाइन निगरानी, पोर्टल की खामियों ने बढ़ाई मुश्किलें

मध्य प्रदेश में 3.5 लाख संस्थाओं की ऑनलाइन निगरानी होगी। हालांकि, पोर्टल की तकनीकी खामियों से परेशानी बढ़ी है। संगठनों ने समाधान और समय-सीमा बढ़ाने की मांग की है।

भोपाल(9826019364)।

मध्य प्रदेश में गैर-सरकारी और सामाजिक संस्थाओं की निगरानी अब ऑनलाइन होगी।

इसके लिए फर्म्स एवं सोसायटीज पंजीयन व्यवस्था में बदलाव किया गया है।

प्रदेश की करीब 3.5 लाख संस्थाओं और सोसायटी को ऑनलाइन प्रक्रिया से जोड़ा जा रहा है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य संस्थाओं के कामकाज में पारदर्शिता लाना है।

साथ ही, कागजों पर चल रही संस्थाओं की पहचान करना भी है।

धारा 27 और 28 की जानकारी ऑनलाइन देना जरूरी

नई व्यवस्था के तहत संस्थाओं को मध्य प्रदेश सोसायटी रजिस्ट्रेशन अधिनियम,

1973 की धारा 27 और 28 से जुड़ी जानकारी ऑनलाइन देनी होगी।

धारा 27: संस्था के सदस्यों और पदाधिकारियों की जानकारी ई-साइन के जरिए जमा करनी होगी।

इसके बाद ही कार्यकारिणी संबंधी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

धारा 28: संस्थाओं को निर्धारित समय पर ऑडिट संबंधी जानकारी ऑनलाइन अपलोड करनी होगी।

इसके लिए सीए के यूजर आईडी और पासवर्ड से ऑडिट रिपोर्ट जमा करने की व्यवस्था है।

इसके अलावा, संस्थाओं के वार्षिक लेन-देन का ब्योरा भी देना होगा।

निर्धारित समय सीमा में जानकारी नहीं देने पर जुर्माने का प्रावधान है।

तकनीकी खामियों से अटकी ऑनलाइन प्रक्रिया

हालांकि, नई व्यवस्था को लेकर स्वयंसेवी संस्थाओं में परेशानी है।

संगठनों का कहना है कि पोर्टल पर कई तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं।

मसलन, वर्ष 2026 से पहले संशोधित नाम वाली संस्थाओं का पुराना नाम ही पोर्टल पर दिखाई दे रहा है।

इससे लॉगिन और रिकॉर्ड अपडेट करने में परेशानी हो रही है।

इसी तरह, धारा 27 का फॉर्म भरने के बाद उसमें सुधार और दोबारा जांच का विकल्प नहीं मिल रहा है।

ई-साइन के बाद फॉर्म में बदलाव नहीं किया जा सकता।

संस्थाओं ने मांग की है कि ई-साइन से पहले फॉर्म को एडिट करने और चेक करने का विकल्प दिया जाए।

साथ ही, धारा 27 की पूरी जानकारी का प्रिंट निकालने की सुविधा भी मिले।

धारा 28 के ऑडिट फॉर्म में भी बदलाव की मांग की गई है।

संस्थाओं ने सीए की ऑडिट रिपोर्ट सीधे ऑनलाइन अपलोड करने का विकल्प देने की मांग की है।

तीन महीने की समय-सीमा बढ़ाने की मांग

स्वयंसेवी संस्थाओं के संगठनों ने विभाग को आवेदन सौंपकर समस्याओं के समाधान की मांग की है।

उन्होंने ऑनलाइन प्रक्रिया की समय-सीमा तीन महीने बढ़ाने का अनुरोध किया है।

संगठनों के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या भी सामने आ रही है।

इसलिए ऑनलाइन सेवा प्रदाताओं को प्रशिक्षण देने की मांग की गई है।

भोपाल में आज मंथन, समाधान पर होगी चर्चा

इन समस्याओं को लेकर स्वयंसेवी संस्थाओं के संगठनों की बैठक रविवार, 20 सितंबर को भोपाल में रखी गई है।

इसमें पोर्टल की तकनीकी खामियों और समय-सीमा बढ़ाने समेत अन्य मुद्दों पर चर्चा हो रही है।

संस्थाओं को उम्मीद है कि बैठक के बाद उनकी मांगों को विभाग तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकेगा।

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