दमोह।
दोस्ती में नाराजगी हुई तो मामला सीधे कानूनी नोटिस तक पहुंच गया।
वजह भी ऐसी कि सुनकर मुस्कान आ जाए—बर्थडे पार्टी नहीं मिली।
दमोह जिला न्यायालय के अधिवक्ता गोविंद तिवारी पर उनके दोस्त ने पार्टी न देने का आरोप लगाया है।
नोटिस में 41 हजार 250 रुपए की क्षतिपूर्ति मांगी गई है।
मामला पूरी तरह दोस्ताना अंदाज में चल रहा है।
लेकिन कानूनी दांव-पेंच पूरे इस्तेमाल हो रहे हैं।
🍽️ पार्टी के इंतजार में भूखे रहे!

नोटिस भेजने वाले विशाल सिंह राजपूत का कहना है कि पार्टी के इंतजार में वे सुबह से भूखे रहे।
दोपहर का खाना भी नहीं खाया।
पार्टी नहीं मिली तो मजबूरी में रेस्टोरेंट पहुंचना पड़ा।
वहां 1750 रुपए का खाना खाया।
इसके बाद मानसिक परेशानी का हवाला देते हुए इलाज पर 39 हजार 500 रुपए खर्च होने का दावा किया गया।
यानी खाने से लेकर इलाज तक का हिसाब जोड़कर 41 हजार 250 रुपए की मांग कर दी गई।
📝 वादा था, इकरारनामा भी था

विशाल के मुताबिक, गोविंद तिवारी ने जन्मदिन की पार्टी देने का वादा किया था।
बाद में तारीख आगे बढ़ती रही।
इसके लिए एक इकरारनामा भी तैयार हुआ, जिस पर वरिष्ठ अधिवक्ताओं के हस्ताक्षर बताए गए हैं।
इसके बाद भी पार्टी नहीं मिली तो दोस्त ने अपने सीनियर के जरिए कानूनी नोटिस भेज दिया।
⚖️ पार्टी मिली या नहीं, जवाब मिलेगा नोटिस से!
दूसरी ओर, गोविंद तिवारी का कहना है कि उन्होंने दोस्तों को पार्टी दे दी थी। उनके पास इसका बिल भी मौजूद है।
अब उन्हें नोटिस का जवाब देना है।
उन्होंने भी उसी अंदाज में जवाब देने का फैसला किया है-नोटिस का जवाब नोटिस से!
😂 अब 7 दिन में होगा फैसला!
नोटिस भेजने वालों को उम्मीद है कि सात दिन के भीतर या तो पार्टी से समझौता हो जाएगा,
या फिर दोस्ती का यह मजेदार विवाद आगे बढ़ेगा।
यानी सवाल सिर्फ इतना है—पार्टी कौन देगा और दोस्ती की कीमत आखिर कितनी? 😄🎂⚖️
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