अतिक्रमण vs प्रशासन : बुरहानपुर में हिंसक टकराव, जेसीबी पलटी,इलाके में हाई अलर्ट

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“मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में रविवार को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में अ​तिक्रमण हटाए जाने के दौरान भीड़ ने प्रशासनिक अमले पर पथराव कर दिया। इसे ‘जमीन और जीविका’ के बीच टकराव माना जा रहा है। जहां कानून लागू करने और स्थानीय असंतोष के बीच संतुलन सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।”

बुरहानपुर।
वनभूमि को खाली कराने पहुंचे प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच बुरहानपुर के झांझर गांव में हालात अचानक हिंसक हो गए।

अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान भीड़ ने पथराव कर दिया, जिससे पूरा इलाका रणक्षेत्र में बदल गया। घटना के बाद गांव में तनाव फैल गया है और भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

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कार्रवाई बनी टकराव की वजह

नेपा रेंज में वन विभाग, पुलिस और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम अतिक्रमण हटाने पहुंची थी। लेकिन जैसे ही कार्रवाई शुरू हुई, करीब 150 लोगों की भीड़ विरोध में उतर आई और पथराव शुरू कर दिया।

जेसीबी बनी निशाना, चालक घायल

हिंसा के दौरान पत्थर लगने से एक जेसीबी का संतुलन बिगड़ गया और वह पलट गई।

चालक कमल बंसल के सिर में चोट आई, जिन्हें तुरंत अस्पताल भेजा गया।

कुल चार लोग घायल हुए हैं।

भारी फोर्स तैनात, हालात काबू में लाने की कोशिश

स्थिति बिगड़ने के बाद प्रशासन ने अतिरिक्त बल बुलाया। निमाड़ के कई जिलों से आए करीब 500 अधिकारी-कर्मचारी मौके पर मौजूद हैं, ताकि हालात को नियंत्रित किया जा सके।

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अतिक्रमण पर सख्ती, पुराना विवाद फिर उभरा

वन विभाग के अनुसार, इस क्षेत्र में लंबे समय से अवैध कब्जे और कटाई की शिकायतें मिल रही थीं।

पहले भी कार्रवाई कर हजारों झोपड़ियां हटाई गई थीं। दोबारा अतिक्रमण बढ़ने पर यह बड़ा अभियान चलाया गया।

कई बाहरी लोगों ने भी बनाया ठिकाना
करीब ढाई साल पहले 17 दिन तक चले अभियान के बाद वन विभाग ने नोटिस जारी कर अतिक्रमणकारियों को हटने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद कई लोग अब भी वहां बसे हुए हैं।

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अब प्रशासन ने ऐसे लोगों को कानूनी रूप से चिन्हित करना शुरू कर दिया है। वन अधिकारियों के अनुसार, पात्र लोगों को घबराने की आवश्यकता नहीं है।

केवल वे लोग कार्रवाई के दायरे में हैं .जो अपात्र हैं। बिना वैध दस्तावेजों के साल 2005 से पहले के कब्जे का दावा कर रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, खरगोन,बड़वानी और खंडवा जिलों से आए कुछ लोग भी यहां बस गए हैं। प्रशासन स्पष्ट कर चुका है कि कार्रवाई केवल ऐसे बाहरी और अपात्र कब्जाधारियों के खिलाफ ही की जा रही है।

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