पिता के इशारों पर खेला ‘तूफानी खेल’, अभिषेक शर्मा का खुलासा-ब्रॉडकास्टर भी रह गए हैरान

99

हैदराबाद।
एक दिन पहले,मंगलवार को हैदराबाद के मैदान पर अभिषेक शर्मा ने ऐसा तूफान खड़ा किया। जिसे देखने वाले दंग रह गए।

68 गेंदों में 10 चौके और 10 छक्कों की मदद से नाबाद 135 रन। यानी,हर दूसरी गेंद पर हमला। इस विस्फोटक पारी ने मैच ही नहीं, पूरे टूर्नामेंट का रोमांच बढ़ा दिया।

“नॉन स्ट्राइकर एंड से पापा देते हैं टिप्स”

मैच के बाद अभिषेक ने एक ऐसा खुलासा किया, जिसने सभी को चौंका दिया। उन्होंने बताया कि उनके पिता स्टेडियम में बैठकर आज भी उन्हें इशारों में गाइड करते हैं।

अभिषेक बोले-“अंडर-12 से ही पापा स्क्रीन के पास बैठते हैं। जब मैं नॉन-स्ट्राइकर एंड पर होता हूँ,वो इशारों में बताते हैं कि कैसे खेलना है।”

यही बात आईपीएल ब्रॉडकास्टर को भी हैरान कर गई-मैदान पर खेलता बेटा, और स्टैंड्स से चलता ‘कोचिंग सिस्टम’!

ब्रॉडकास्टर से मजेदार मांग

अभिषेक ने मजाकिया अंदाज में ब्रॉडकास्टर से एक खास रिक्वेस्ट भी कर डाली। उन्होंने कहा-“अगली बार कैमरा मेरे पिता (Black dress in Photo)पर भी दिखाइए।

उनके रिएक्शन बहुत मजेदार होते हैं।” स्टैंड्स में बैठे पिता इस बात पर मुस्कुराते नजर आए-यह पल दर्शकों के दिल में बस गया।

पिता ही कोच,पिता ही संघर्ष के साथी

अभिषेक की सफलता के पीछे उनके पिता राज कुमार शर्मा की बड़ी भूमिका रही है। खुद क्रिकेटर रहे पिता ने बचपन से ही बेटे के जुनून को पहचाना।

3-4 साल की उम्र में भारी बल्ला उठाने की कोशिश। फिर प्लास्टिक बैट से शुरुआत।

इस तरह घर में ही शुरू हो गई ‘क्रिकेट अकादमी’। पिता बताते हैं-“वह हर वक्त बैट लेकर शॉट मारता था, बोलता था-पापा बॉल फेंको।”

🏏 बचपन का जुनून बना आज की पहचान

अभिषेक का क्रिकेट प्यार बचपन से ही साफ दिखता था। बहनों और मां से भी गेंदबाजी करवाकर घंटों प्रैक्टिस। यही लगन आज उन्हें आईपीएल का स्टार बना रही है।

‘एल’ सेलिब्रेशन का खास मतलब

शतक पूरा करने के बाद ‘एल’ शेप बनाकर जश्न मनाने के पीछे भी खास भावना है। अभिषेक कहते हैं-“यह मेरे फैंस और स्टेडियम के लिए प्यार है। उनका सपोर्ट ही हमारी ताकत है।”

रणनीति में बदलाव का राज

पावरप्ले में आक्रामक शुरुआत के बजाय इस बार अभिषेक ने धैर्य दिखाया।

उन्होंने बताया- “मैंने कोच से बात की थी, मेरा लक्ष्य था पूरे 20 ओवर खेलना… और मैंने वही किया।”

बीमार बहन को समर्पित पारी
इस शानदार पारी के पीछे एक भावुक कहानी भी जुड़ी है। अभिषेक ने अपनी यह उपलब्धि अपनी बहन को समर्पित की, जो बीमारी के कारण मैच देखने नहीं आ सकी। उन्होंने कहा- “यह लम्हा मेरी बहन के लिए है।”

जुनून,परिवार और जज्बा-यही असली ताकत

यह सिर्फ एक शानदार पारी नहीं थी, बल्कि एक कहानी थी-पिता के भरोसे की। परिवार के सपोर्ट की और उस जुनून की, जिसने एक बच्चे को क्रिकेट का सितारा बना दिया।