13 मौतों के बाद खुला राज: ‘खराब’ क्रूज को ही उतार दिया था बरगी डैम में

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जबलपुर।
जबलपुर के बरगी डैम में 30 अप्रैल को हुए दर्दनाक क्रूज हादसे में अब मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम की गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। हादसे के 13 दिन बाद सामने आए एक पत्र ने पूरे मामले पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

मैकल रिसोर्ट प्रबंधन ने 1 मार्च 2025 को ही निगम को लिखित में आगाह कर दिया था कि मैकलसुता क्रूज “पानी में उतारने लायक नहीं” बचा है।

इसके बावजूद क्रूज को पर्यटकों से भरकर डैम में उतारा जाता रहा और आखिरकार हादसे में 13 लोगों की जान चली गई।

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मार्च में ही भेज दी थी चेतावनी

मार्च में पर्यटन निगम मुख्यालय को भेजे गए इस पत्र में साफ लिखा गया था कि दोनों क्रूज पुराने हो चुके हैं और उनके इंजन लगातार जवाब दे रहे हैं।

खासकर मैकलसुता क्रूज का एक इंजन ठीक से लोड नहीं ले रहा था, जबकि दूसरा इंजन कई बार स्टार्ट होने में दिक्कत देता था।

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तेज हवाओं के थपेड़े नहीं सह पा रहा था क्रूज

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तेज हवाओं के दौरान क्रूज को संभालने में परेशानी आती थी और कई बार स्पीड बोट की मदद लेनी पड़ती थी। इसके बावजूद संचालन बंद नहीं किया गया।

रिसोर्ट प्रबंधन ने यह भी बताया था कि हैदराबाद के बोट बिल्डर ने दोनों क्रूज के इंजन बदलने की सलाह दी थी, क्योंकि स्पेयर पार्ट्स तक उपलब्ध नहीं हो रहे थे।

‘रेवा’ क्रूज को तो खराबी के कारण पहले ही खड़ा कर दिया गया था, लेकिन मैकलसुता को लगातार चलाया जाता रहा।

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फिर भी चलता रहा मौत का सफर

इधर, पर्यटन निगम के सलाहकार राजेंद्र निगम ने मीडिया से बातचीत में वायरल पत्र की जानकारी होने से इनकार किया है। उनका कहना है कि मैकलसुता क्रूज नियमित रूप से संचालित हो रहा था और लॉगबुक में उसके कई राउंड दर्ज हैं।

हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि इंजन बदलने की योजना पर विचार चल रहा था, लेकिन तकनीकी खराबी से इनकार किया।

अब सवाल यह उठ रहा है कि जब निगम को दो महीने पहले ही तकनीकी खतरे की जानकारी थी, तो फिर पर्यटकों की जान जोखिम में डालकर क्रूज क्यों चलाया गया?

हादसे के बाद यह खुलासा प्रशासनिक जिम्मेदारी और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।