मीठे में ‘मांस’!आइसक्रीम-घी में चर्बी का खेल, घूस से बचाने की कोशिश नाकाम

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” यह मामला सिर्फ अवैध बूचड़खाने का नहीं, बल्कि लोगों की सेहत से खिलवाड़ और सिस्टम की लापरवाही का भी है-जहां ‘मीठे’ के नाम पर जहर परोसा जा रहा था।”

खंडवा।
भोपाल में सामने आए गौमांस कारोबार जैसे मामले की तर्ज पर अब खंडवा में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।

यहां वर्षों से चल रही एक अवैध फैक्ट्री में पशुओं की चर्बी को घी के रूप में तैयार कर आइसक्रीम, होटल-ढाबों और उद्योगों तक सप्लाई किया जा रहा था।

हैरानी की बात यह है कि कार्रवाई के दौरान आरोपियों ने मामले को दबाने के लिए मजिस्ट्रेट को रिश्वत देने की भी कोशिश की। फिलहाल मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है, जबकि उस पर रासुका लगाने की तैयारी चल रही है।

मीठे में मिलावट का नेटवर्क
मोघट रोड थाना पुलिस की पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह चर्बी घी जैसा बनाकर आइसक्रीम फैक्ट्रियों, होटल-ढाबों और कपड़ा उद्योगों तक पहुंचाई जा रही थी। यानी लोगों की थाली और मिठास दोनों में यह खतरनाक मिलावट शामिल थी।

3350 लीटर चर्बी जब्त

(चमड़ा फैक्ट्री मेंं मृत पशुओं की करीब तीन ट्रक हड्डियां व अन्य अवशेष बरामद हुए।)

कार्रवाई में 69 टीन और 9 ड्रमों में भरी करीब 3350 लीटर चर्बी बरामद हुई। इसके अलावा 4 ट्रक खाल और 3 ट्रक अवशेष भी मिले।

जांच में अनुमान है कि करीब 138 मवेशियों को काटा गया होगा। फैक्ट्री से भारी मात्रा में सरकारी राशन का नमक भी मिला, जिसका उपयोग चमड़ा गलाने में किया जा रहा था।

वकील भाइयों की ‘सेटिंग’ कोशिश फेल

आरोपी के तीनों भाई वकील हैं। कार्रवाई के दौरान उन्होंने फर्जी दस्तावेज दिखाकर सिटी मजिस्ट्रेट को गुमराह करने और रिश्वत देकर मामला रफा-दफा करने की कोशिश की। लेकिन प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए कार्रवाई जारी रखी।

सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर ने मीडिया को बताया कि गुरुवार रात 11 बजे शिकायत मिली थी। वे शुक्रवार सुबह सीएसपी अभिनव बारंगे के साथ मौके पर पहुंचे और शिकायत सही पाई।

इसके बाद डिप्टी कमिश्नर सचिन सिटोले को बुलाया गया। इस दौरान वकील भाइयों ने विरोध किया, लेकिन उन्हें हटाया गया और प्रलोभन देने की कोशिश भी हुई।

निगम-पुलिस पर भी सवाल
जांच में यह भी सामने आया कि नगर निगम और पुलिस को इस अवैध धंधे की जानकारी थी। शिकायत मिलने पर टीमें मौके पर पहुंचती थीं, लेकिन इसे वैध बताकर केवल फिनायल छिड़ककर लौट जाती थीं। इससे पूरे सिस्टम की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं।

पुराना कनेक्शन और आगे की जांच
2017 में भी इसी जगह से बड़ी मात्रा में खालें बरामद हुई थीं। कुछ समय बंद रहने के बाद अवैध कारोबार फिर शुरू हो गया। अब सैंपल लैब भेजे गए हैं। सप्लाई चेन की जांच के लिए जीएसटी व पशुपालन विभाग भी सक्रिय हो गए हैं।