“मध्यप्रदेश में संविदा कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें 10 साल से अधिक सेवा दे चुके संविदाकर्मियों के नियमितीकरण संबंधी आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी। इस फैसले के बाद प्रदेश के करीब 5 लाख संविदा कर्मचारियों में खुशी की लहर है।”
भोपाल।
मध्यप्रदेश में वर्षों से संविदा पर काम कर रहे कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर आई है। उच्च न्यायालय Jabalpur की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार की मांग को खारिज कर दिया।
जिसमें पहले दिए गए आदेश पर रोक लगाने की अपील की गई थी। इस फैसले के बाद करीब 5 लाख संविदाकर्मियों में उम्मीद और खुशी की लहर दौड़ गई है।
📜 क्या था मामला?
सरकार ने 9 अप्रैल को आए उस आदेश पर स्टे की मांग की थी, जिसमें 10 साल से ज्यादा सेवा दे चुके संविदा कर्मचारियों को नियमित करने पर विचार करने की बात कही गई थी।
लेकिन अदालत ने साफ कहा—यह मामला बड़े वर्ग से जुड़ा है, इसलिए इसे रोका नहीं जा सकता।
⚖️ अदालत से बड़ी राहत, लाखों चेहरों पर मुस्कान
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि राज्य सरकार इस मामले में सिंगल बेंच के सामने अपना पक्ष रखे।
यानी फिलहाल राहत बरकरार रहेगी और प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इस फैसले के बाद प्रदेश के करीब 5 लाख संविदा कर्मचारियों में खुशी की लहर है।
👨💼 10 साल की मेहनत अब रंग लाएगी
लंबे समय से अस्थायी स्थिति में काम कर रहे कर्मचारियों के लिए यह फैसला उम्मीद की नई किरण बनकर आया है।
नियमितीकरण की संभावना ने न केवल उनके भविष्य को सुरक्षित करने की उम्मीद जगाई है, बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी नई ऊर्जा दी है।
🌟 उम्मीदों को मिला सहारा
यह फैसला सिर्फ कानूनी आदेश नहीं, बल्कि उन लाखों परिवारों के सपनों को सहारा देने जैसा है, जो वर्षों से स्थायी नौकरी का इंतजार कर रहे थे।