रवि अवस्थी,भोपाल। प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पचमढ़ी में सैर-सपाटे के शौकानों के लिए पिपरिया एक चित-परिचित नाम है..दरअसल,सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला की सुरम्य पहाड़ी व घाटी के बीच बसे पचमढ़ी तक पिपरिया होकर ही पहुंचा जा सकता है..
नर्मदापुरम जिले की इस विधाानसभा का नाम भी इस खूबसूरत कस्बे के नाम पर पड़ा.. बात यहां के मतदाताओं के मिजाज की तो ये हमेशा बदलती बयार के साथ रहे..इस सीट के लिए अब तक 14 बार हुए चुनाव में 7 बार कांग्रेस,6 बार भाजपा तो एक बार समाजवादी पार्टी ने भी अपना परचम फहराया है..यानी सबको बराबर मौका मिला..
57 वर्षीय विधायक ठाकुरदास नागवंशी पिपरिया से बीजेपी के तीन बार से विधायक हैं…पेशे से पहलवान नागवंशी का पिपरिया में पुश्तैनी अखाड़ा है…कसरत ही नहीं राजनीति के अखाड़े में भी नागवंशी बीते तीन चुनाव से अपने प्रतिद्वंदियों को चित्त कर विधायक निर्वाचित होते रहे हैं..फर्क इतना है कि वर्ष 2008 के अपने पहले चुनाव में उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी तुलाराम बेमन को 22हजार 765 मतों से शिकस्त दी तो…
2018 के चुनाव में बेमन के पुत्र हरीश के मैदान में उतरने पर उनकी जीत का मर्जिन घटकर करीब 18 हजार रह गया..अलबत्ता वर्ष 2013 के चुनाव में कांग्रेस ने बेमन परिवार से इतर जब ममता नागोत्रा पर दांव खेला तो नागवंशी ने उनके खिलाफ करीब 51 हजार के रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज की थी…अर्थात इन तीनों चुनाव में भाजपा व कांग्रेस प्रत्याशियों के बीच उतार.चढ़ाव बना रहा..यह अलग बात है कि जीत हमेशा नागवंशी के खाते में रही..
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बीते 15 सालों से पिपरिया सीट पर है बीजेपी का कब्जा
पेशे से पहलवान ठाकुरदास नागवंशी हैं 3 बार से MLA
तीनों चुनाव में नागवंशी ने किया उतार.चढ़ाव का सामना
अब तक हुए 13 चुनाव में 6-6बार जीती बीजेपी.कांग्रेस
2003 के चुनाव में सपा के अर्जुन लरिया बने थे विधायक
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नागवंशी ने बदली तस्वीर
होशंगाबाद जिले की यह सीट 1962 में अस्तित्व में आई..शुरुआती तीन चुनाव में यहां कांग्रेस का कब्जा रहा..आपातकाल के बाद 1977 में हुए चुनाव में तत्कालीन जनता पार्टी ने कांग्रेस से यह सीट छीन ली…लेकिन तीन साल बाद ही हुए आम चुनाव में कांग्रेस की सविता बनर्जी यहां से विधायक चुनी गई..
वर्ष 85 के चुनाव में भी कांग्रेस का कब्जा बरकरार रहा और पार्टी के दिग्गज नेता त्रिभुवन यादव विधायक चुने गए..90 के दशक में पिपरिया के सियासी मिजाज में बदलाव आया..और 1990 से 2003 तक हुए चार चुनाव में पिपरिया ने हर बार अपना प्रतिनिधि बदला..
90 में बीजेपी के मुरलीधर माहेश्वरी,93 में कांग्रेस के सुरेश राय,98 में बीजेपी के हरिशंकर जायसवाल तो 2003 के चुनाव में समाजवादी पार्टी के अर्जुन पलिया पिपरिया के विधायक चुने गए…इसमें ठहराव लाए बीजेपी के ठाकुरदास नागवंशी …
जानें कौन कब रहा विधायक
1962 रतनकुमारी कांग्रेस
1967 आरके देवी कांग्रेस
1972 रतनकुमारी कांग्रेस
1977 आरसी माहेश्वरी जेएनपी
1980 सविता बेनर्जी कांग्रेस
1985 त्रिभुवन यादव कांग्रेस
1990 मुरलीधर माहेश्वरी बीजेपी
1993 सुरेश राय कांग्रेस
1998 हरिशंकर जायसवाल बीजेपी
2003अर्जुन पलिया सपा
2008 ठाकुरदास नागवंशी बीजेपी
2013 ठाकुरदास नागवंशी बीजेपी
2018 ठाकुरदास नागवंशी बीजेपी
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अजा वर्ग के लिए आरक्षित है सीट
जातिगण समीकरणों की बात की जाए तो पिपरिया विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जाति बाहुल्य है..इस वर्ग के मतदाताओं की संख्या 19.1 प्रतिशत है,जबकि अनुसूचित जनजाति के मतदाताओं की संख्या 15.91 प्रतिशत..
अन्य वर्गों में मुस्लिम यहां सिर्फ 3.2 प्रतिशत बताए जाते हैं..पिपरिया विधानसभा के अधिकांश यानी करीब 76.71 प्रतिशत मतदाता गांवों में निवास करते हैं,जबकि शहरी क्षेत्र के मतदाताओं की संख्या करीब 23 प्रतिशत ही है..
खास बात यह कि 1962 से 2003 तक यह सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित रही..लेकिन 2008 में हुए परिसीमन के बाद यहां अनुसूचित जाति वर्ग की आबादी बढ़ने से इसे इसी वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया गया…
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कुल मतदाता 2 लाख 21 हजार 316
पुरुष मतदाता 1 लाख 15 हजार 802
महिला वोटर्स 1 लाख 05हजार 514
अजा वोटर्स 19.1 %
अजजा 15.91%
मुस्लिम 03.20 %
ग्रामीण वोटर्स 76.17%
शहरी वोटर्स 23.04%
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स्वादिष्ट तुअर उत्पादन के लिए है मशहूर

कृषि् प्रधान पिपरिया विधानसभा क्षेत्र की तुअर दाल अपने स्वाद के लिए पूरे देश में मशहूर है..इसे हाल ही में जीआई टैग भी मिला है— नर्मदा के पानी की मिठास यहां की दाल ही नहीं लोगों की वाणी में भी पाई जाती है..लिहाजा चुनाव में खेती किसानी की छिटपुट समस्याओं को छोड़ दिया जाए तो कोई बड़ा मुददा हावी नही रहा..














