देवास फैक्ट्री ब्लास्ट: एसडीएम,एसडीओपी समेत 4 अफसर निलंबित,बाकी जिम्मेदार सेफ !

65

धर्मेंद्र योगी,देवास / भोपाल
(6264678548)

देवास की पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट में 5 मजदूरों की मौत के बाद राज्य सरकार ने चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। कार्रवाई की जद में टोंककला एसडीएम संजीव सक्सेना, नायब तहसीलदार रवि शर्मा, सोनकच्छ एसडीओपी दीपा मांडवे और टोंककला चौकी प्रभारी रमनदीप हुंडल आए हैं।

हालांकि, हादसे से जुड़े कई अन्य विभागों और वरिष्ठ जिम्मेदारों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं होने से सवाल खड़े हो रहे हैं।

कम लाइसेंस, ज्यादा बारूद !

सूत्रों के मुताबिक फैक्ट्री में कम क्षमता के लाइसेंस पर बड़े पैमाने पर विस्फोटक सामग्री जमा की जा रही थी।

मजदूरों से बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजामों के काम कराया जा रहा था, लेकिन जिम्मेदार विभागों ने समय रहते कोई सख्त कदम नहीं उठाया।

हादसे के बाद सामने आया कि नियमित निरीक्षण और सुरक्षा जांच केवल कागजों तक सीमित थी।

जांच में खुली सिस्टम की लापरवाही

 

निलंबन आदेश में माना गया है कि अधिकारियों ने विस्फोटक सामग्री से जुड़े नियमों और निरीक्षण व्यवस्था में गंभीर लापरवाही बरती।

फैक्ट्री की नियमित जांच नहीं हुई, जबकि हर महीने यह देखना जरूरी था कि लाइसेंस के अनुरूप ही बारूद और विस्फोटक रखा जा रहा है या नहीं।

सिर्फ राजस्व और पुलिस पर ही क्यों कार्रवाई?

इस तरह की फैक्ट्रियों की निगरानी सिर्फ राजस्व और पुलिस की जिम्मेदारी नहीं होती।

श्रम विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, बिजली कंपनी, लोक निर्माण विभाग (PWD), एमएसएमई और अन्य एजेंसियों की भी अहम भूमिका होती है।

-श्रम विभाग को मजदूरों की सुरक्षा देखनी थी
-बिजली विभाग को तकनीकी खतरे जांचने थे
-प्रदूषण बोर्ड को रासायनिक जोखिम देखना था
-PWD को स्ट्रक्चर और इमरजेंसी एग्जिट की जांच करनी थी

इसके बावजूद कार्रवाई केवल चार अधिकारियों तक सीमित रहने से पूरे सिस्टम की जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं। (In Photo Suspended Officer ,Respectivly,SDM Tahsildar,SDOP and Chowky Incharge)

पहले भी हुए हादसे, फिर भी नहीं जागा सिस्टम

जानकारी के मुताबिक फैक्ट्री में पहले भी छोटे हादसे हो चुके थे, लेकिन किसी विभाग ने गंभीरता से सुरक्षा ऑडिट नहीं किया। अधिकारी कथित तौर पर हादसे वाले दिन ही मौके पर पहुंचे।

प्रशासन ने अपने आदेश में माना है कि अधिकारियों की उदासीनता और नियमों की अनदेखी के कारण यह बड़ा हादसा हुआ।

रोज तैयार होता था लाखों का माल

बताया जा रहा है कि फैक्ट्री में रोज करीब 700 पेटी पटाखे और माचिस तैयार होती थीं। यहां पोटाश जैसे विस्फोटक रसायनों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता था। फैक्ट्री से कई राज्यों में सप्लाई की जा रही थी।

करीब 4-5 बीघा में फैली यूनिट में 400 से ज्यादा मजदूर काम करते थे, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं।

लाइसेंस और राजनीतिक कनेक्शन भी चर्चा में

सूत्रों के अनुसार फैक्ट्री का लाइसेंस पिछले साल 23 दिसंबर को जारी हुआ था और इसी साल मई में उसका नवीनीकरण भी किया गया।

फैक्ट्री संचालक अनिल मालवीय की स्थानीय सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी के साथ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक संरक्षण के आरोप भी चर्चा में हैं।

इलाके में सवाल उठ रहे हैं कि क्या प्रभाव और पहुंच के कारण लंबे समय तक अनियमितताओं को नजरअंदाज किया गया?