MP: केंद्र प्रवर्तित योजनाओं में मप्र को नहीं मिली 50फीसद राशि: जयवर्धन सिंह

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भोपाल। कांग्रेस के युवा विधायक एवं पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने वित्तीय वर्ष 2021—22 में मप्र सरकार के बजट की 39 हजार 786 करोड़ की बडी रकम लेप्स होने का आरोप लगाया है। उन्होंने आज एक प्रेस कांफ्रेंस में दावा किया कि यह बात वह केग की​ रिपोर्ट में उजागर किए गए तथ्य के आधार पर कह रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021-22 के बजट के एप्रोपिएशन अकाउंट, जिसका मूल्यांकन केग ने 6 दिसम्बर 2022 को किया।

पिछले वित्तीय वर्ष के करीब 40 हजार करोड़ रुपए हुए लेप्स
उन्होंने कहा कि केग के विनियोग लेखा में चौंकाने वाला तथ्य यह है कि इस उपरोक्त बजट में से शिवराज सरकार ने 2021-22 में 39 हजार 786.2 करोड़ रू. खर्च ही नहीं किये। जिसमें से रेवेन्यु अकाउंट के हिस्से में 23 हजार 2 करोड़ और केपिटल अकाउंट में 16 हजार 784 करोड़ रूपये खर्च ही नहीं किये।

रेवेन्यु अकाउंट में इतनी बड़ी राशि खर्च नहीं करने का अर्थ यह हुआ कि गरीबों के विकास की योजनाओं पर सीधा आघात किया गया, साथ ही केपिटल अकाउंट में खर्च नहीं करने का अर्थ है कि प्रदेश की अधोसंरचना विकास के साथ धोखा किया गया। किसान कल्याण पशुपालन, मछली पालन डेयरी विभागां के लगभग 831 करोड़ रू. खर्च ही नहीं किये गये। इसी प्रकार स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के 961.24 करोड़ रू. खर्च ही नहीं किये।

इसी प्रकार पीएचई के 1233.70 करोड़ रू. खर्च ही नहीं किये। इसी प्रकार शहरी विकास और आवास मंत्रालय के 1161.56 करोड़ रू., जल संसाधन विभाग के 991.6 करोड़ रू., पीडब्ल्यूडी के 1133.23 करोड़ रू., स्कूली शिक्षा (प्रायमरी एज्युकेशन सहित) के 3784.53 करोड़ रू., ग्रामीण विकास के 1879.76 करोड़ रू., आदिवासी विकास विभाग के 2520.7 करोड़ रू., उच्च शिक्षा 900 करोड़ रू., अनुसूचित जाति विकास 312.5 करोड़ रू., आध्यात्मिक विभाग 77 करोड़ रू., महिला एवं बाल विकास विभाग 610.8 करोड़ रू. खर्च ही नहीं किये गये।

केंद्र प्रवर्तित योजनाओं की नहीं मिली 50फीसद राशि
कांग्रेस विधायक ने कहा कि केंद्र प्रवर्तित योजनाओं में 47 हजार 458 करोड़ रू. वर्ष 2022-23 में खर्च किये जाने थे, जिसमें से केंद्र सरकार द्वारा 32 हजार 556.34 करोड़ रू. प्रदेश को मिलने थे और राज्य सरकार द्वारा 14 हजार 901.7 करोड़ रू. खर्च किये जाने थे, लेकिन गत 31 जनवरी तक केंद्र सरकार द्वारा अपने हिस्से में से सिर्फ 16 हजार 792 करोड़ रू. ही जारी किये।

अर्थात लगभग 50 प्रतिशत राशि वर्ष अंत होने के दो माह पहले तक भी नहीं भेजी। केंद्र की ग्रांट नहीं मिलने का आशय यह है कि राज्य सरकार भी अपने हिस्से की अनुपातिक राशि खर्च नहीं कर सकी। अर्थात एक अनुमान के तौर पर इस राशि में से लगभग 22 से 23 हजार करोड़ रू. खर्च ही नहीं किये गये।

कृषि विकास विभाग में मात्र 21.31 प्रतिशत राशि भेजी

उन्होंने कहा कि किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग में मात्र 21.31 प्रतिशत राशि अब तक भेजी गई है, जिसमें प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, ट्रेक्टर एवं कृषि उपकरणां पर अनुदान, कृषि वानिकी सबमिशन, परंपरागत कृषि विकास योजना जैसी कई प्रमुख योजनाओं में एक भी पैसा अब तक जारी नहीं किया गया। आश्चर्यजनक बात यह है कि इस विभाग की 25 योजनाओं में से मात्र 4 योजनाओं में ही राशि जारी की गई है।

लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में 55 प्रतिशत राशि ही केंद्र द्वारा जारी की गई है, पंचायत विभाग में अब तक एक पैसा भी नहीं भेजा गया। जनजातीय कार्य विभाग में 53 प्रतिशत, नर्मदा घाटी विकास विभाग में कोई राशि जारी नहीं की गई, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग में 0.19 प्रतिशत राशि ही जारी की गई, संस्कृति विभाग में कोई राशि जारी नहीं की गई।

जल संसाधन विभाग में 12.52 प्रतिशत, पर्यटन विभाग में शून्य, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में शून्य, पशुपालन एवं डेयरी विभाग में 2.07, उच्च शिक्षा विभाग में 30.47, तकनीकि शिक्षा कौशल विकास एवं रोजगार विभाग 7.37 प्रतिशत राशि जब तक जारी की गई।

महिला एवं बाल विकास विभाग 58.99 प्रतिशत, कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग कोई राशि जारी नहीं की गई है। पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग 0.49 प्रतिशत, अनुसूचित जाति कल्याण विभाग 0.04 प्रतिशत, ग्रामीण विकास विभाग 63 प्रतिशत राशि ही अब तक केंद्र द्वारा जारी की गई है।

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