खरगोन में सिंचाई घोटाले की शिकायत पड़ी भारी: RTI एक्टिविस्ट पर हमला, आरोपी अब भी फरार

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भोपाल।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और किसानों से जुड़ी अन्य योजनाओं में कथित धांधली उजागर करना एक RTI एक्टिविस्ट को भारी पड़ गया।

खरगोन जिले में योजनाओं के क्रियान्वयन में गड़बड़ी की शिकायत करने वाले RTI कार्यकर्ता रवींद्र करोडे पर जानलेवा हमला किया गया।

घटना के करीब एक सप्ताह बाद भी नामजद आरोपी पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं, जिससे पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं।

शिकायत के बाद शुरू हुई विभागीय जांच

खंडवा जिले के काकरिया गांव निवासी रवींद्र करोडे लंबे समय से सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को उजागर करते रहे हैं।

उन्होंने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, ड्रिप इरिगेशन और किसानों से जुड़ी योजनाओं में कथित फर्जीवाड़े के दस्तावेज जुटाकर जिम्मेदार अधिकारियों को शिकायत दी थी।

सीएम हेल्पलाइन में शिकायत के बाद विभाग ने मामले की जांच शुरू की। इंदौर संभाग के प्रभारी संयुक्त संचालक डीआर जाटव को जांच सौंपी गई थी।

जांच में शामिल होकर लौट रहे थे, तभी घेरा

रवींद्र का आरोप है कि 12 मई को वे जांच से जुड़े दस्तावेज और साक्ष्य जमा कर खरगोन से लौट रहे थे।

इसी दौरान सनावद मार्ग पर सौम्या व्हीकल्स के पास सफेद कार में आए आधा दर्जन लोगों ने उनकी कार रोक ली और मारपीट शुरू कर दी।

हमलावरों ने उन्हें दोबारा बड़वानी क्षेत्र में नहीं आने की धमकी भी दी। राहगीरों के हस्तक्षेप के बाद आरोपी मौके से भाग निकले। घायल अवस्था में रवींद्र ने जिला अस्पताल पहुंचकर इलाज कराया।

नामजद केस दर्ज, लेकिन गिरफ्तारी नहीं

घटना के बाद जैतपुरा चौकी में अश्विन काग और उनके अन्य साथियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने बीएनएस की धारा 126(2),296(9),115(2),351(3) व 3(5) में अपराध कायम किया है।

हालांकि, घटना के कई दिन बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने पर सवाल उठ रहे हैं। प्रकरण के विवेचक एवं चौकी प्रभारी मांगीलाल कनासे का कहना है कि फरियादी के मोबाइल की CDR जांच के लिए भेजी गई है और रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्रवाई होगी।

किसानों के नाम पर फर्जी बिलिंग का आरोप

रवींद्र करोडे ने शिकायत में आरोप लगाया है कि कई किसानों की सहमति और अंशपूंजी लिए बिना ही कागजों पर योजना लागू दिखा दी गई।

उन्होंने मनमानी बिलिंग, जमीनी और दस्तावेजी आंकड़ों में अंतर तथा फर्जी क्रियान्वयन के आरोप लगाए हैं।

“जांच से घबराए लोगों ने हमला कराया”

RTI एक्टिविस्ट का दावा है कि विभागीय जांच शुरू होने के बाद योजनाओं में शामिल लोगों में हड़कंप मच गया था।

उनका आरोप है कि जांच में साक्ष्य देने के कुछ घंटे बाद ही हमला कर उन्हें डराने की कोशिश की गई। रवींद्र का कहना है कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे और दबाव में नहीं आएंगे।