10th,12thरिजल्ट: महंगे स्कूलों का फिर दबदबा, टॉपर्स की चमक या सिस्टम का सच?

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भोपाल।
ICSE और ISC 2026 के नतीजे सामने आते ही एक बार फिर यह सवाल चर्चा में है-क्या टॉप करने की दौड़ में संसाधन और महंगे स्कूल निर्णायक बनते जा रहे हैं? राजधानी भोपाल में आए नतीजों ने इस बहस को और हवा दे दी है।

टॉप लिस्ट में चुनिंदा स्कूलों का कब्जा

इस साल 10वीं में बिलाबॉन्ग हाई इंटरनेशनल स्कूल की कृष्णाली मर्चेंट ने 99.6% के साथ स्टेट टॉप किया, जबकि 12वीं में द संस्कार वैली स्कूल के दक्ष भटनागर 99.25% अंकों के साथ अव्वल रहे। टॉपर्स की सूची पर नजर डालें तो अधिकतर नाम शहर के चुनिंदा प्रीमियम स्कूलों से ही सामने आए हैं।

3 लाख से अधिक परीक्षार्थी हुए शा​मिल

ICSE 10वीं की परीक्षाएं 17 फरवरी से 30 मार्च 2026 तक आयोजित हुई थीं, जबकि ISC 12वीं की परीक्षाएं 12 फरवरी से 6 अप्रैल 2026 के बीच संपन्न हुईं थी।

इस साल देशभर से लाखों छात्रों ने इन परीक्षाओं में हिस्सा लिया, जिनमें भोपाल के भी बड़ी संख्या में विद्यार्थी शामिल रहे।

इस साल ICSE में करीब 2.6 लाख और ISC में लगभग 1.5 लाख छात्र शामिल हुए थे। अब छात्र अपने रिजल्ट आधिकारिक वेबसाइट और डिजिलॉकर के जरिए देख सकते हैं। भोपाल के स्कूलों में भी रिजल्ट को लेकर उत्साह और हलचल साफ नजर आई।

पिछले साल ICSE का पास प्रतिशत 99.35% और ISC का 99.34% रहा था, जो बेहद शानदार माना गया। इस बार भी उम्मीद की जा रही है कि परिणाम इसी स्तर के आसपास रहेंगे या उससे बेहतर होंगे।।

संसाधन बनाम मेहनत की बहस
विशेषज्ञ मानते हैं कि बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, अनुभवी फैकल्टी और गाइडेंस का सीधा असर रिजल्ट पर दिखता है। हालांकि, वे यह भी कहते हैं कि छात्रों की मेहनत और अभिभावकों का सहयोग सफलता की असली कुंजी है।

औसत भी रहा शानदार
इन स्कूलों का औसत प्रदर्शन भी मजबूत रहा-कई संस्थानों में 85% से अधिक औसत और आधे से ज्यादा छात्रों के 90%+ अंक आए। इससे साफ है कि टॉपर्स के साथ-साथ ओवरऑल परफॉर्मेंस भी ऊंचा रहा।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिजल्ट
छात्र अपने नतीजे Council for the Indian School Certificate Examinations की आधिकारिक वेबसाइट और DigiLocker के जरिए देख सकते हैं। UID और इंडेक्स नंबर के माध्यम से मार्कशीट आसानी से उपलब्ध है।

री-इवैल्यूएशन का विकल्प
जो छात्र अपने अंकों से संतुष्ट नहीं हैं, उनके लिए री-चेकिंग और सुधार परीक्षा का विकल्प भी खुला है, जिससे वे अपने परिणाम बेहतर कर सकते हैं।

इस बार का रिजल्ट सिर्फ सफलता की कहानी नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में बढ़ती असमानता और संसाधनों की भूमिका पर भी चर्चा का विषय बन गया है।