आईएएस का ‘विषम’ पैटर्न जारी: मप्र में फिर 13 IAS की तैयारी, 39 में टक्कर

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भोपाल।

मध्य प्रदेश में IAS बनने की दौड़ एक बार फिर दिलचस्प मोड़ पर है। खास बात यह है कि पिछले कुछ सालों की तरह इस बार भी आंकड़ा “विषम” ही रहने वाला है।

13 पदों पर प्रमोशन की तैयारी ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है-लेकिन हर बार की तरह इस बार भी कई चेहरे मायूस रहेंगे।

राज्य प्रशासनिक सेवा (SAS) के अधिकारियों के लिए लंबे इंतजार के बाद प्रक्रिया तेज हो गई है। विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक जल्द प्रस्तावित है।

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जिसमें 39 अधिकारियों के नामों पर विचार होगा। इनमें से केवल 13 को ही IAS बनने का मौका मिलेगा। यानी मुकाबला सीधा और सख्त है। हर तीन में से एक ही सफल होगा।

🔹 Non-SAS फिर बाहर, बहस गर्म

इस पूरी प्रक्रिया में सबसे बड़ा सवाल Non-SAS अधिकारियों को लेकर है। एक बार फिर उन्हें प्रमोशन की दौड़ से बाहर रखा गया है।

सूत्र बताते हैं कि राप्रसे संघ के दबाव के चलते दायरा केवल SAS अधिकारियों तक सीमित कर दिया गया। यही वजह है कि फैसले से असंतोष की चर्चा भी तेज है।

🔹 आंकड़ों में समझें प्रमोशन का गणित
कुल पद: 13
दावेदार: 39
चयन का आधार: DPC
Non-SAS: बाहर

🔹 पिछले साल ज्यादा, इस बार कटौती
वर्ष 2023 और 2024 में कुल 16 अधिकारियों को IAS अवार्ड मिला था। यानी हर साल 8-8 प्रमोशन।
इस बार संख्या 13 हो गई है, जिससे प्रतिस्पर्धा और कड़ी हो गई है।

🔹 39 नामों में से किसकी खुलेगी किस्मत?
संभावित सूची में इच्छित गढ़पाले, जयेंद्र विजयावत, अभय सिंह खरारी, रजनीश कसेरा, एकता जायसवाल, हृदयेश श्रीवास्तव, लता शरणागत, महीप तेजस्वी, मिलिंद नागदेवे, राजकुमार खत्री, प्रियंका गोयल,माया अवस्थी,रंजना देवड़ा समेत कुल 39 अधिकारी शामिल हैं। अब अंतिम फैसला DPC बैठक में होगा।

🔹 IAS ज्यादा, फिर भी कमी
मध्य प्रदेश में करीब 390 IAS अधिकारी कार्यरत हैं, जबकि स्वीकृत संख्या 459 है। यानी,अभी भी करीब 69 पद खाली हैं। उत्तर प्रदेश के बाद यहां सबसे ज्यादा IAS होने के बावजूद यह कमी प्रशासनिक चुनौती बनी हुई है।

🔹 ‘विषम’ पैटर्न फिर चर्चा में
मप्र में पिछले कुछ सालों से IAS संख्या का एक दिलचस्प ट्रेंड दिख रहा है। बीते पांच सालों में आईएएस अफसरों की आमद के आंकड़ें रोचक रहे हैं।

वर्ष 2020, 2021 व 2023 में 11-11 अफसर मप्र को मिले। जबकि वर्ष 2022 व 2024 में 9-9. अब प्रमोटी अफसरों के मामले मे 13 का आंकड़ा उसी “Odd Pattern” को आगे बढ़ाता नजर आ रहा है

मौका भी,मंथन भी
एक तरफ 13 अधिकारियों के लिए यह करियर का बड़ा अवसर है। वहीं दूसरी तरफ Non-SAS को बाहर रखने का फैसला नई बहस को जन्म दे रहा है।

अब सबकी नजर DPC पर है। जहां तय होगा कि “विषम” संख्या में इस बार किसकी किस्मत जुड़ती है।