एमपी एग्रो में पनपी ‘ चर्चा संस्कृति ‘ ,संविदा व सलाहकार नियुक्तियों का भी दौर,कामकाज प्रभावित

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रवि अवस्थी,भोपाल।

मध्यप्रदेश राज्य औद्योगिक कृषि विकास निगम (एमपी एग्रो) में संविदा और सलाहकार नियुक्तियों का सिलसिला जारी है।

निगम के महाप्रबंधक का दो वर्ष का संविदा कार्यकाल पूरा होने के बाद उन्हें तीन माह के लिए निगम का सशर्त सलाहकार नियुक्त किया गया है।

वहीं हाल ही में सेवानिवृत्त हुए प्रबंधक मनोज जैन की सेवाएं भी एक वर्ष की संविदा नियुक्ति देकर बढ़ा दी गई हैं।

एमपी एग्रो पहले से ही प्रदेश के घाटे में चल रहे निगमों में शामिल है, लेकिन इसके बावजूद कुछ अधिकारियों को लगातार संविदा या सलाहकार के रूप में अवसर दिए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

संविदा के बाद सलाहकार की जिम्मेदारी
सूत्रों के मुताबिक, संबंधित अधिकारी S.K. Vidhan की सेवाएं पहले प्रतिनियुक्ति पर मप्र वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन से एमपी एग्रो में ली गई थीं।

इसके बाद उन्हें दो बार एक-एक वर्ष के लिए संविदा नियुक्ति देकर महाप्रबंधक पद पर रखा गया।

10 मार्च को संविदा अवधि समाप्त होने के बाद नए आदेश में उन्हें तीन माह या नए सलाहकार की नियुक्ति होने तक निगम का सलाहकार बना दिया गया है।

सेवानिवृत्त प्रबंधक को भी संविदा विस्तार
निगम के महाप्रबंधक पद से हाल ही में सेवानिवृत्त हुए मनोज जैन को भी एक वर्ष की संविदा नियुक्ति दी गई है।

उन्हें सेवानिवृत्ति के समय मिल रहे वेतन का 50 प्रतिशत तथा महंगाई भत्ता दिया जाएगा।

सूत्रों का कहना है कि निगम में ये दोनों अधिकारी लंबे समय से ‘सिस्टम’ में अहम भूमिका निभाते रहे हैं, जिसके चलते उन्हें संचालक मंडल का संरक्षण भी मिला हुआ है।

‘चर्चा करें’ संस्कृति से अटके प्रकरण

निगम में बीते एक वर्ष से फाइलों पर “चर्चा करें” लिखने की परंपरा तेजी से बढ़ी है। बताया जाता है कि महाप्रबंधक कार्यालय से गुजरने वाली कई नस्तियों पर यही टिप्पणी दर्ज होती है।

जब तक ‘चर्चा’ पूरी नहीं होती, फाइल आगे नहीं बढ़ती। नई परंपरा से क्षेत्रीय महाप्रबंधक भी कामकाज को लेकर दबाव महसूस कर रहे हैं। इससे मैदानी कामकाज लगभग ठप्प है।

चर्चा ने अटकाई अफसर की पेंशन

सागर संभाग के सेवानिवृत्त क्षेत्रीय महाप्रबंधक नितिन मोहगांवकर का पेंशन प्रकरण इसका उदाहरण बताया जा रहा है।

एक बार पेंशन भुगतान की टीप दर्ज होने के बावजूद मामला फिर ‘चर्चा करें’ के दायरे में आ गया।

बताया जाता है कि क्षेत्रीय प्रबंधक रहते हुए उन्होंने विधायक निधि से जुड़े कार्य में करीब डेढ़ लाख रुपए का अग्रिम भुगतान किया था।

बाद में काम पूरा होने और जांच में दोषमुक्त होने के बावजूद उनका पेंशन मामला लंबित है।

अतिरिक्त प्रभार से बढ़ा प्रशासनिक दबाव

बीते वर्ष जनवरी में प्रशासनिक फेरबदल के दौरान 2012 बैच के अधिकारी अरविंद दुबे (PHOTO) को एमपी एग्रो के प्रबंध संचालक (एमडी) का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था।

दुबे मुख्यमंत्री सचिवालय में अपर सचिव होने के साथ उद्यानिकी आयुक्त का दायित्व भी संभाल रहे हैं।

एक साथ कई जिम्मेदारियां होने के कारण वे निगम को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं।

इसका असर एमपी एग्रो के कामकाज पर पड़ रहा है। नतीजतन पहले से घाटे में चल रहा निगम और अधिक मुश्किल हालात में पहुंच गया है।

छिना करोड़ों के पौधरोपण का काम

कमोवेश यही स्थिति उद्यानिकी संचालनालय में है। सूत्रों के मुताबिक,उद्यानिकी विभाग से करीब 39 करोड़ के पौधरोपण का काम हाल ही में इसी व्यस्तता के चलते छिन गया।

जबकि विभागीय मंत्री व ​सचिव जॉन किंग्सले इस प्रस्ताव पर अपनी सैद्धांतिक सहमति जता चुके थे। पौधरोपण का यह प्रस्ताव NHAI की ओर से दिया गया था।