मास्टरी से मंत्रालय तक: निजी विवि जांच पर ‘मौखिक ब्रेक’ का आरोप

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भोपाल/सीहोर।

उच्च शिक्षा विभाग में पदस्थ कुछ अधिकारियों की भूमिका को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।

आरोप है कि कॉलेजों में अध्यापन छोड़ मुख्यालय में पदस्थ अफसर निजी विश्वविद्यालयों से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप कर रहे हैं, जिससे विभाग की साख पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।

शिकायत के बाद बनी सात सदस्यीय समिति

सीहोर जिले के आर्यावर्त विश्वविद्यालय के खिलाफ गंभीर शिकायत मिलने पर 21 फरवरी को कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए।

कलेक्टर के निर्देश पर प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, सीहोर के प्राचार्य डॉ. रोहिताश्व कुमार शर्मा के नेतृत्व में सात सदस्यीय समिति गठित की गई।

समिति में डॉ. उदय डोलस, डॉ. नितिन बातव, राजकुमार साहू, अनिल पिपलोदिया, डॉ. जितेंद्र आर्य और डॉ. मनोज कुमार शर्मा को शामिल किया गया।

शिकायत में शाला भवन में कॉलेज संचालन, फर्जी दस्तावेज, अधोसंरचना की कमी और स्टाफ संबंधी अनियमितताओं जैसे आरोप दर्ज थे।

जांच शुरू होने से पहले ही रोक?

समिति काम शुरू करती, उससे पहले ही कथित तौर पर उच्च शिक्षा विभाग मुख्यालय से मौखिक निर्देश देकर जांच रोकने को कहा गया।

समिति प्रमुख डॉ. शर्मा ने दो दिन पहले विभागीय प्रमुख सचिव (ACS) को पत्र लिखा है। डॉ शर्मा  लिखा कि विभाग के ओएसडी डॉ.अनिल पाठक और अतिरिक्त संचालक डॉ. मथुरा प्रसाद ने मोबाइल फोन पर जांच स्थगित करने के निर्देश दिए। डॉ. शर्मा ने पूरे मामले को विभागीय मुख्यालय को अग्रेषित कर दिया है।

पहले भी लगे हैं ऐसे आरोप
यह पहला मामला नहीं है। वर्ष 2024 में महर्षि वैदिक विश्वविद्यालय के खिलाफ गठित जांच समिति भी कथित रूप से मौखिक निर्देशों के कारण आगे नहीं बढ़ सकी।

ताकती रह गई जांच समिति

यह समिति विभागीय पत्र क्र. 440/अति,सं/उशि/योजना/24 दिनांक 22/02/2024 के तहत गठित की गई थी।

जिसमें शासकीय कन्या महाविद्यालय रांझी,जबलपुर की तत्कालीन प्राचार्य डॉ वीणा वाजपेई संयोजक व डॉ.शैल प्रभा कोष्टा सह-संयोजक बनाई गई थीं।

इनके अलावा शासकीय महाकौशल कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय के डॉ. बी. एन. त्रिपाठी,डॉ. अरुण कक्कड़ व डॉ. अजीत सिंह इस समिति के सदस्य नियुक्त किए गए।

यह समिति अपना काम शुरू करती,इससे पहले ही मुख्यालय से इसी प्रकार के मौखिक निर्देश पर जांच रोक दी गई।

निष्पक्ष जांच की मांग
शिक्षाविद् सुधाकर सिंह ने आरोप लगाया कि मुख्यालय में बैठे कुछ अधिकारी निजी संस्थानों को संरक्षण दे रहे हैं। उन्होंने उच्च शिक्षा मंत्री और राज्यपाल से सभी मामलों की स्वतंत्र जांच की मांग की है।

विभाग की सफाई
ओएसडी डॉ. अनिल पाठक ने आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत ही कोई भी कार्रवाई संभव है और प्रक्रिया कानून के अनुसार ही अपनाई जाएगी।

डॉ पाठक की यह भी एक उपलब्धि
उच्च शिक्षा विभाग के ओएसडी डॉ अनिल पाठक(Photo) भारतीय शिक्षण मंडल मध्य भारत प्रांत के शैक्षणिक गतिविधि प्रमुख भी हैं।

मंडल एवं मप्र भोज मुक्त विवि के के संयुक्त तत्वावाधान में गत 20 फरवरी को एक दिवसीय कार्यशाला भोपाल में आयोजित की गई थी।

इसके आयोजन में डॉ पाठक ने संयोजक की भूमिका अदा की। डॉ पाठक ने कहा कि वह काफी पहले से इस संगठन से जुड़े हैं।

बड़ा सवाल
क्या जांच को विभागीय स्तर पर भेजना पारदर्शिता का कदम है, या स्थानीय जांच को रोकने की कोशिश? सीहोर का यह प्रकरण अब विभागीय मुख्यालय के पास है।

आगे की कार्रवाई तय करेगी कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और नियमन की प्रक्रिया कितनी प्रभावी।