महर्षि वैदिक विवि मामला पहुँचा राष्ट्रपति सचिवालय, मुख्य सचिव से मांगी रिपोर्ट

भोपाल।
कटनी जिले के करौंदी स्थित महर्षि वैदिक विश्वविद्यालय से जुड़े गंभीर आरोपों पर राष्ट्रपति सचिवालय ने संज्ञान लिया है।

शिकायतकर्ता सुधाकर सिंह राजपूत की याचिका राष्ट्रपति भवन पहुंचने के बाद राष्ट्रपति सचिवालय ने इसे मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव को शिकायत की जांच के निर्देश दिए हैं।

शिकायत में लगाए गंभीर आरोप
सागर निवासी सुधाकर सिंह राजपूत ने राष्ट्रपति, सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और कैबिनेट सचिव को भेजी अपनी विस्तृत शिकायत में कई गंभीर आरोप लगाए।

शिकायत में  गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कहा गया है कि उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने विधानसभा में परस्पर विरोधी और भ्रामक जानकारी दी। दस्तावेजों के आधार पर कथित रूप से मनगढ़ंत तथ्य प्रस्तुत करने की बात भी शिकायत में कही गई है।

शिकायत के अनुसार इससे न केवल सदन की विश्वसनीयता प्रभावित हुई। बल्कि छात्रहित,नियुक्तियों की वैधता,परीक्षा संचालन और वित्तीय मामलों पर भी गंभीर प्रश्न खड़े हुए हैं।

शिकायत के प्रमुख बिंदु

— नियुक्तियां और वरिष्ठता सूची पर विरोधाभास
शिकायत में कहा गया कि विधानसभा (2025) में नियमित नियुक्तियों व वरिष्ठता सूची होने की जानकारी दी गई। जबकि पूर्व अभिलेखों में 2003 के बाद नियमित नियुक्ति न होने का उल्लेख।

कुलसचिव/प्रभारी कुलसचिव के पद और अधिकारों को लेकर परस्पर विरोधी दस्तावेजों का हवाला।

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— प्रबंध बोर्ड की संरचना पर सवाल

अधिनियम अनुसार 11 सदस्यीय बोर्ड अनिवार्य, लेकिन शासन को केवल 2 सदस्यों की सूचना।

कथित रूप से बिना वैध नामांकन के वर्षों तक बैठकों में निर्णय।

— अवैध परीक्षा व दूरस्थ शिक्षा संचालन का आरोप

—सक्षम अनुमति न होने के बावजूद 2023-25 में हजारों छात्रों की परीक्षाएं कराने का दावा।
— कथित अवैध परीक्षा केंद्र व नकल प्रकरण की जांच लंबित।

विद्यार्थियों,कर्मचारियों के आंकड़ों में भारी अंतर

  • विधानसभा उत्तर, वार्षिक प्रतिवेदन और न्यायालयीन अभिलेखों में छात्र संख्या के अलग-अलग आंकड़े।

  • एक ही सत्र में हजारों छात्रों के अंतर का प्रश्न।

— उच्च शिक्षा विभाग की भूमिका पर प्रश्न

-UGC व राजभवन के पत्र “प्राप्त न होने” के विभागीय दावे, जबकि प्रतियां उपलब्ध होने का दावा।
-CC Cell/शाखा-3 द्वारा कथित रूप से बिना सत्यापन दस्तावेज स्वीकारना।

-UGC द्वारा विश्वविद्यालय को “डिफाल्टर” घोषित किए जाने का दावा।

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राष्ट्रपति सचिवालय का पत्र क्या कहता है

 मुख्य सचिव, मध्यप्रदेश को भेजे ईमेल में कहा गया है कि महर्षि वैदिक विवि से संबंद्ध राष्ट्रपति को संबोधित याचिका संलग्न है और “उचित ध्यानाकर्षण” हेतु भेजी जा रही है।

साथ ही, की गई कार्रवाई की सूचना सीधे याचिकाकर्ता को देने के निर्देश दिए गए हैं।

सवाल सूचनाओं की विश्वसनीयता का
इस पत्र के बाद मामला प्रशासनिक स्तर पर औपचारिक जांच की दिशा में बढ़ता दिख रहा है।  जांच बैठती है, तो विधानसभा में प्रस्तुत दस्तावेजों की सत्यता की परख हो सकती है। शिकायत में केंद्रीय जांच एजेंसी से उच्चस्तरीय जांच की मांग भी की गई है।

प्रेसीडेंट सचिवालय की पहल ने इस प्रकरण को महज विभागीय शिकायत से उठाकर संवैधानिक स्तर के संज्ञान तक पहुंचा दिया है।

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