उद्योग की जमीन पर आस्था का विस्तार: डबरा शुगर मिल से नवग्रह मंदिर तक का विवाद

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रवि अवस्थी,भोपाल।
जिस जमीन पर कभी गन्ने की खुशबू और मशीनों की गड़गड़ाहट औद्योगिक भविष्य की कहानी लिखती थी, वहीं अब घंटियों की गूंज और कलश यात्रा की भीड़ ने नया अध्याय खोल दिया है।

डबरा की बंद पड़ी शुगर मिल की सरकारी जमीन पर प्रस्तावित कार्गो हब और एसईजेड का सपना पीछे छूट गया।

उसकी जगह 12 एकड़ में फैला नवग्रह मंदिर परिसर खड़ा हो गया। मंदिर की स्थापना से पहले ही भगदड़, मौत, सियासत और आरोपों ने इस आस्था स्थल को विवादों के केंद्र में ला खड़ा किया है।

कलश यात्रा में भगदड़, एक मौत से सियासत गरम

मंगलवार को मंदिर स्थापना के लिए निकाली गई कलश यात्रा के दौरान भगदड़ मच गई। इस हादसे में रामवती साहू नामक वृद्ध महिला की मौत हो गई, जबकि एक बच्ची सहित आठ महिलाएं घायल हुईं। घटना के बाद अंचल में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

राजभवन मार्च की तैयारी, आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग

आजाद समाज पार्टी (भीम आर्मी) ने इस मुद्दे को लेकर गुरुवार को राजभवन के समक्ष प्रदर्शन का ऐलान किया है।

पार्टी के दामोदर सिंह यादव ने पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा (Photo) पर धर्म की आड़ में सरकारी जमीन पर कब्जा करने का आरोप लगाया।
मांगें रखी गईं—

मृतका के परिजनों को 1 करोड़ रुपए मुआवजा

– घायलों को 25 से 50 लाख रुपए सहायता

– कार्यक्रम आयोजकों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए

धर्माचार्यों की मौजूदगी पर भी विरोध की चेतावनी

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यादव ने कहा कि कार्यक्रमों में पंडित प्रदीप मिश्रा, धीरेंद्र शास्त्री और कुमार विश्वास को आमंत्रित किया गया है। यदि वे शामिल होते हैं तो उनका भी विरोध किया जाएगा। साथ ही, सरकारी जमीन पर कथित कब्जे के खिलाफ हाईकोर्ट जाने की बात भी कही गई है।

मजदूर और किसान अब भी बकाए की प्रतीक्षा में

सूत्र बताते हैं कि सैकड़ों एकड़ यह जमीन कभी सिंधिया इस्टेट के अंतर्गत थी,

जिसे किसानों के हित में शुगर मिल संचालन के लिए आवंटित किया गया था।

मिल बंद होने के बाद:

– श्रमिकों और गन्ना उत्पादक किसानों का करोड़ों रुपए बकाया रह गया

– लीज धारक पर प्रकरण दर्ज हुए, हिरासत भी हुई

– प्रशासनिक तालाबंदी भी बेअसर साबित हुई

– बनना था एसईजेड और सिविल एयर कार्गो हब

साल 2008 में तत्कालीन सरकार ने यहां सिविल एयर कार्गो हब और मल्टी स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) बनाने की घोषणा की थी। दावा था कि:

-10 हजार करोड़ का निवेश आएगा

– एक हजार से अधिक स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा

-साल 2020 में इस प्रस्ताव को फिर गति मिली, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में योजना कागजों में सिमटकर रह गई।

अब ‘एशिया का सबसे बड़ा’ नवग्रह मंदिर

उसी भूमि पर अब 12 एकड़ में नवग्रह मंदिर परिसर और लगभग 150 कक्षों का निर्माण किया गया है।

स्थानीय विधायक राजेंद्र भारती (Photo) का कहना है कि यह धार्मिक स्थल से अधिक आधुनिक रिजॉर्ट जैसा ढांचा है।

उनका आरोप है कि अवैध कॉलोनियों और निर्माण को राजनीतिक संरक्षण मिला, और अब मंदिर के नाम पर उसे वैधता दी जा रही है।

सवालों के घेरे में विकास की दिशा

डबरा में सवाल सिर्फ मंदिर या मिल का नहीं, बल्कि उस दिशा का है जिसमें औद्योगिक विकास का सपना धीरे-धीरे आस्था के प्रतीक में बदल गया।

मजदूरों-किसानों के बकाए, अधूरी योजनाएं और अब धार्मिक परिसर-यह पूरा घटनाक्रम विकास, राजनीति और आस्था के त्रिकोण में उलझा दिखाई देता है।