सार-संक्षेप
मध्य प्रदेश महिला वित्त एवं विकास निगम अगले पांच साल तक कायम रहेगा। विभाग के ठोस तर्कों के बाद वित्त ने निगम को बंद करने की अपनी सिफारिश को वापस लेते हुए इसकी निरंतरता बनाए रखने पर सहमति जताई है। यह प्रस्ताव जल्दी ही कैबिनेट बैठक में पेश होगा।
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प्रमुख बिंदु
—महिला वित्त एवं विकास निगम को बंद करने की वित्त विभाग की सिफारिश दूसरी बार खारिज।
—राज्य सरकार निगम को अगले 5 वर्षों तक जारी रखने पर सहमत।
—निगम महिला उद्यमियों और स्व-सहायता समूहों को 2% ब्याज अनुदान देता है।
—अगले 5 साल में केवल 18.27 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान।
— प्रस्ताव को जल्द कैबिनेट में पेश किया जाएगा।
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खबर विस्तार से
रवि अवस्थी, भोपाल।
37 साल पुराना,मध्य प्रदेश महिला वित्त एवं विकास निगम आगे भी कायम रहेगा। महिला एवं बाल विकास विभाग के ठोस तर्कों के बाद,वित्त विभाग ने भी इस पर सहमति जताई है,
जबकि चंद दिन पहले वित्त ने निगम को बंद करने की सिफारिश की थी। बहरहाल,वित्त की पहले ना फिर हां के बाद अब जल्द ही यह प्रस्ताव कैबिनेट बैठक में पेश होगा।
वित्त बनाम महिला एवं बाल विकास विभाग
अधिकारिक सूत्रों के अनुसार, वित्त विभाग ने हाल ही में आदेश जारी कर यह तर्क दिया था कि महिला कल्याण से जुड़ी अधिकांश योजनाओं का संचालन पहले से महिला एवं बाल विकास, सामाजिक न्याय और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग कर रहे हैं, इसलिए अलग निगम की आवश्यकता नहीं है।
हालांकि, महिला एवं बाल विकास विभाग ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि निगम न सिर्फ लाभ की स्थिति में है, बल्कि महिला सशक्तिकरण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
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पहले भी हो चुकी है कोशिश
यह पहली बार नहीं है जब निगम को बंद करने की कोशिश की गई हो। इससे पहले भी वित्त विभाग ने ऐसा आदेश जारी किया था, जिसे तत्कालीन प्रमुख सचिव ने यह कहकर निरस्त करवा दिया था कि निगम उनके विभाग द्वारा स्थापित संस्था है और वित्त विभाग केवल राय दे सकता है, निर्णय नहीं।
महिला सशक्तिकरण में अहम भूमिका
विभाग ने स्पष्ट किया कि महिला वित्त एवं विकास निगम महिला उद्यमियों, स्व-सहायता समूहों और अन्य हितग्राही महिलाओं को 2 प्रतिशत ब्याज अनुदान उपलब्ध कराता है। साथ ही, बीते वर्षों में निगम ने कई महत्वपूर्ण योजनाओं और कार्यक्रमों का सफल संचालन किया है।
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कम खर्च, ज्यादा प्रभाव
प्रस्ताव के अनुसार,निगम के संचालन पर अगले पांच साल (2030-31 तक) में केवल 18.27 करोड़ रुपये खर्च होंगे। कर्मचारियों की संख्या सीमित होने और अधिकांश पद प्रतिनियुक्ति से भरे होने के कारण निगम का प्रशासनिक खर्च न्यूनतम है।
ना-नुकुर के बाद अब वित्त विभाग भी सहमत
सूत्र बताते हैं कि महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रस्ताव पर अब वित्त विभाग ने भी सहमति जता दी है। प्रशासकीय स्वीकृति के बाद मामला कैबिनेट के समक्ष लाया जाएगा।
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निगम का वर्तमान ढांचा
साल 1988 में स्थापित निगम में फिलहाल सिर्फ 9 अधिकारी-कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें एक महाप्रबंधक और एक सहायक लेखापाल शामिल हैं। वर्तमान महाप्रबंधक अरविंद भाल अगले माह सेवानिवृत्त होने वाले हैं। निगम की प्रबंध संचालक एवं महिला बाल विकास विभाग की आयुक्त निधि निवेदिता ने कहा कि इस संबंध में अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
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