MP बोर्ड 10वीं-12वीं में बेटियों का दम, टॉपर्स के नंबर 500 के करीब

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भोपाल।
मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (MPBSE) के 10वीं और 12वीं दोनों नतीजों ने इस साल एक साफ संदेश दिया है -मेहनत, अनुशासन और सही रणनीति के आगे कोई मुकाबला नहीं।

प्रदेशभर में लाखों छात्रों के इंतजार के बीच जारी हुए रिजल्ट में जहां एक ओर टॉपर्स ने लगभग परफेक्ट स्कोर छू लिया। वहीं दूसरी ओर छात्राओं और सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन खास तौर पर उभरकर सामने आया।

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने बुधवार को सीएम हाउस स्थित समत्व भवन में बोर्ड परिणाम जारी किए।इस मौके पर उन्होंने सफल रहे सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दी। इस मौके पर स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप एवं स्कूल शिक्षा के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहें।

🔹 टॉपर्स की होड़: 500 के करीब पहुंचे नंबर

इस साल 10वीं और 12वीं दोनों में टॉपर्स के अंक 490+ की रेंज में रहे।

** 12वीं में अलग-अलग संकायों में टॉपर्स ने 492 से 494 तक अंक हासिल किए।
** 10वीं में पन्ना की प्रतिभा सिंह सोलंकी ने 499 अंक लाकर लगभग परफेक्ट स्कोर किया।

पास प्रतिशत: 10वीं-12वीं में हल्का अंतर

कक्षा 12वीं का कुल परिणाम करीब 76% रहा। 10वीं का पास प्रतिशत 73.42% दर्ज हुआ। दोनों में रिजल्ट स्थिर रहा, लेकिन प्रतिस्पर्धा पहले से ज्यादा कड़ी दिखी। यह ट्रेंड बताता है कि अब टॉप पर पहुंचने के लिए मामूली अंतर भी निर्णायक बन रहा है।

🔹 बेटियों ने फिर मारी बाजी

12वीं में छात्राओं का पास प्रतिशत करीब 79% रहा। भोपाल की खुशी राय और चांदनी विश्वकर्मा ने मेरिट में पहला स्थान हासिल किया है। दोनों ने 500 में से 494 अंक हासिल किए हैं।

खुशी शिवाजी नगर स्थित सुभाष एक्सीलेंस स्कूल और चांदनी गुरुदेव शिक्षा केन्द्र नीलबड़, भोपाल की छात्रा हैं।

छात्राओं का पास प्रतिशत 79.41% रहा, जबकि छात्रों का 72.39% रहा। नियमित छात्रों का पास प्रतिशत 76.01% रहा, जबकि स्वाध्यायी छात्रों का रिजल्ट 30.60% दर्ज किया गया।

जिलों में झाबुआ पहले और अनूपपुर दूसरे स्थान पर रहा। इस बार किसी भी छात्र को पूरक घोषित नहीं किया गया है, जबकि करीब 1 लाख 99 हजार छात्र फेल हुए हैं।

10वीं में भी लड़कियों ने बाजी मारी

यह लगातार दूसरा साल है जब बेटियां रिजल्ट में आगे दिखीं। हाईस्कूल परीक्षा में पन्ना की प्रिया सिंह सोलंकी ने 500 में से 499 अंक प्राप्त कर प्रदेश में प्रथम स्थान हासिल किया।

जिलावार प्रदर्शन की बात करें तो अनूपपुर जिला 93.85 प्रतिशत के साथ शीर्ष पर रहा। इसके बाद अलीराजपुर (92.14%) और नरसिंहपुर (91.21%) जिला रहा। भोपाल जिले का परिणाम 64.20 प्रतिशत दर्ज किया गया।

इस वर्ष किसी भी छात्र को पूरक परीक्षा श्रेणी में नहीं रखा गया। परीक्षा में 2 लाख 09 हजार 267 परीक्षार्थी अनुत्तीर्ण घोषित किए गए हैं। हाईस्कूल परीक्षा में कुल 47 नकल प्रकरण भी दर्ज किए गए।

सरकारी स्कूलों का बढ़ता दबदबा

नतीजों में एक और बड़ा ट्रेंड सामने आया। हायर सेकेण्ड्री यानि 12वीं कक्षा में सरकारी स्कूलों का रिजल्ट 80% से ज्यादा रहा।  वहीं,हाईस्कूल में भी सरकारी स्कूलों ने प्राइवेट स्कूलों को पीछे छोड़ा।
इससे सरकारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार के संकेत मिल रहे हैं।

छोटे जिलों की बड़ी उड़ान

इस बार बड़े शहरों के बजाय छोटे जिलों ने बाजी मारी। 12वीं में झाबुआ, अनूपपुर और नरसिंहपुर टॉप पर रहे। वहीं,10वीं में अनूपपुर और अलीराजपुर जैसे जिले आगे रहे। भोपाल जैसे बड़े जिले अपेक्षाकृत पीछे रहे। जो संतुलित विकास की जरूरत को दिखाता है।

‘बेस्ट ऑफ टू’ नियम बना गेम-चेंजर

दोनों कक्षाओं में लागू ‘बेस्ट ऑफ टू’ नियम से छात्रों को बड़ा फायदा मिला।बेहतर अंक को फाइनल मार्कशीट में जोड़ने से स्कोर सुधारने का मौका मिला। इससे टॉपर्स को भी अपनी रैंक मजबूत करने में मदद मिली।

हर अंक के लिए मेहनत जरूरी

इस तरह, एमपी बोर्ड 2026 का रिजल्ट सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं है। बल्कि यह बदलते शिक्षा ट्रेंड का संकेत भी है। यहां अब टॉप करने के लिए सिर्फ पास होना नहीं, बल्कि हर अंक के लिए मेहनत जरूरी हो है। इस दौड़ में बेटियां और छोटे शहर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।