MP Vidhansabha : ‘हर दिन 79 करोड़ रुपए सिर्फ ब्याज की भरपाई’ !

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  • विधानसभा में बोले बाला बच्चन-असत्य कहूं तो जो सजा सदन दें मंजूर
  • सरकारी आंकड़े गिनाकर कराया’सच का सामना’
भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा  MP Vidhansabha बजट सत्र का सोमवार को पांचवा दिन रहा। सदन में यूं तो जबलपुर में चार लोगो की हत्या,कान्हा पार्क में नक्सली मुठभेड़ व एजी रिपोर्ट को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरने का हरसंभव जतन किया,लेकिन इससे भी ​प्रभावी रहा पूर्व गृहमंत्री व आदिवासी विधायक बाला बच्चन का बजट को लेकर वक्तव्य।
इसमें उन्होंने सरकारी आंकड़ों का ही हवाला देकर सरकार को ‘सच का सामना’ करने के लिए बाध्य किया। बच्चन यह कहना भी नहीं भूले कि यदि वह कोई बात असत्य यानी गलत कह रहे हैं तो सदन जो सजा देना चाहे,वह उन्हें मंजूर होगी।
मौका ​था साल 2025-26 के बजट आय-व्ययक पर सामान्य चर्चा का। शुरुआत सत्ता पक्ष के गोपाल भार्गव ने की। इसमें उन्होंने दावा किया कि कर्ज लेकर कल्याणकारी कामकाजों के कारण ही बीते सवा साल में एक भी किसान ने आत्महत्या नहीं की।
बारी आने पर कांग्रेस के बाला बच्चन ने एक-एक कर बजट की खामियां गिनाईं तो सदन में कुछ पल के लिए खामोशी छा गई। बाला बच्चन ने सरकारी आंकड़ों व सदन में पेश दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा- सरकार यह बता दे,मध्य प्रदेश को और कितने कर्ज में डुबोएगी ?
हर दिन 79 करोड़ सिर्फ ब्याज के
कांग्रेस विधायक ने कहा कि वर्ष 2024-25 और 2025-26 के राजकोषीय घाटे में 25% का अंतर है। कर्ज लेने की जो रफ्तार है उसे देखते हुए कहा ​जा सकता है कि 31 मार्च 2026 तक 5 लाख 30 हजार करोड़ से अधिक का कर्ज मप्र पर होगा।
इसी अवधि तक हमारा राजकोषीय घाटा 78 हजार 902 करोड़ रुपए हो जाएगा। 28 हजार 236 करोड़ रुपए हमें सिर्फ कर्ज के ब्याज के तौर पर चुकाने होंगे। यानी 78करोड़ रुपए रोज। अगर यह गलत निकला तो आप जो सजा देंगे, सदन में उसे स्वीकार करने को तैयार हूं।
मनमाने तरीके से बढ़ा ली लिमिट
कांग्रेस विधायक ने कहा कि केंद्र की स्वीकृति के बिना राज्य सरकार मनमाने तरीके से कर्ज लेती जा रही है। उन्हें याद कि तत्कालीन मुख्यमंत्री ने कर्ज की लिमिट 3 से बढ़ाकर 3.5 प्रतिशत करने केंद्र को पत्र लिखा था। इसका जवाब आज तक नहीं आया,लेकिन मौजूदा सरकार ने मनमाने तरीके से ​यह लिमिट पर साढ़े तीन,फिर साढ़े चार और अब 4.66 प्रतिशत कर ली।
पूर्व गृहमंत्री ने कहा कि दूसरी ओर सरकार आमदनी बढ़ाने में फेल साबित हो रही है। बात डबल इंजन सरकार की की जाती है,लेकिन गुजरते वित्तीय वर्ष में ही केंद्र सरकार ने करीब 6000 करोड़ रुपए कम दिए। राज्य के भू-राजस्व में भी साल 2023-24 में 1079 करोड़ मिले थे, जो इस साल अब तक सिर्फ 810 करोड़ रह गए। माल एवं यात्रियों से कर के मामले में भी बीते वित्तीय वर्ष में जहां 31करोड़ रुपए मिले थे,वह इस साल 13करोड़ रह गया।
वसूली में भी नाकाम
कांग्रेस विधायक ने कहा कि सरकार अविवादित वसूली कर पाने में भी नाकाम रही। साल 2023—24 में वसूली योग्य राशि 10हजार 379 करोड़ थी।
यह मान भी लिया जाए कि इसमें 6536 करोड़ राशि विवादित है तब भी बकाया 3813 करोड़ की वसूली में कौन सी दिक्कत रही। कांग्रेस विधायक ने कहा कि सरकार ने जमापूंजी खर्च करने में भी कसर नहीं छोड़ी। हमारी जो जमा पूंजी थी, उसे भी सरकार ने खर्च कर दिया है। इसका हिसाब सरकार को देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बजट में सरकार ने जनता को भ्रमित करने का काम किया है। निवेश प्रोत्साहन में 3 हजार 250 करोड़ रुपए का प्रोत्साहन देने की बात कही गई है। इसके विपरीत इस वर्ष एक हजार 750 करोड़ रुपए का ही प्रावधान किया गया है यानी सरकार को खुद पर ही भरोसा नहीं है।
चर्चा से भागती है सरकार
बाला बच्चन ने कहा कि सत्ता पक्ष के विधायक को 15 करोड़ रुपए दिए गए हैं, लेकिन विपक्ष के विधायकों को विकास कार्य के लिए 5 करोड़ रुपए देने का कहकर भी कोई राशि नहीं दी गई है। इसी प्रकार,पिछले बजट में विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान सरकार ने किया था, लेकिन इसे खर्च ही नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार चर्चा से भागती है।