काग की तरह घर की मुंडेर से बोलता है ‘पाप’

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भोपाल(Janprachar.com)। मान्यता है-पाप,काग की तरह घर की मुंडेर पर चढ़कर बोलता है। खुरई में दो दलित युवकों की हत्या व एक युवती की संदिग्ध मौत का मामला भी कुछ ऐसा ही है। सुप्रीम कोर्ट ने अब इस मामले में राज्य सरकार व प्रकरण की कछुआ गति से जांच कर रही सीबीआई को नोटिस थमाकर जवाब तलब किया है।
खास बात यह कि प्रकरण में हत्याकांड के दो प्रत्यक्षदर्शियों की भी संदिग्ध हालत में मौत हो गई। प्रकरण में पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह भी जांच के दायरे में बताए जाते हैं। उन पर आरोपियों को संरक्षित करने का आरोप है। सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद उनकी मुश्किल बढ़ सकती है।
छेड़छाड़ से तिहरे हत्याकांड तक
मामला,सागर जिले की खुरई विधानसभा क्षेत्र के ग्राम बरोदिया नौनागिर का है। इसे समझने के लिए चंद साल पहले के एक घटनाक्रम को समझना होगा। दरअसल,साल 2019 में गांव की एक दलित युवती अंजना के साथ कुछ दबंगों ने छेड़छाड़ की।

 

अंजना की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज हुआ।इसी केस को वापस लेने दबाव बनाया गया है और विरोध होने पर अंजना के भाई नितिन की 24 अगस्त 2023 को पीट-पीटकर हत्या कर दी जाती है।
यहां तक कि नितिन से हो रही मारपीट पर उसकी मां जब उसे बचाने आती है तो उसे निर्वस्त्र कर पीटा जाता है,घर में तोड़फोड़ की जाती है। यहां तक कि नितिन के घर के पालतू पशु—पक्षियों को भी नहीं बख्शा गया। एक तोते की जान भी आरोपियों ने ली।
गवाहों की भी जान ली
नितिन का ही एक निकट संबंधी 24वर्षीय राजेंद्र व बहन अंजना प्रकरण की जांच सीबीआई से कराने की मांग करते हैं। इससे बौखलाए दबंगों ने एक बार फिर वही नृशंस हत्याकांड दोहराया। इसी साल 24 मई को आरोपियों ने राजेंद्र के साथ बेरहमी से मारपीट की।
उसे कुल्हाड़ी व डंडों से पीटा गया। उसके हाथ व पंजों की अंगुलियों के बीच के हिस्सों को छेदा गया। सागर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में राजेंद्र की इलाज के दौरान मौत हो जाती है।प्रकरण में आशिक़ कुरैशी, बबलू बेना, इसराइल बेना, फहीम खान, टंटू कुरैशी को आरोपी बनाया जाता है।
अंजना की भी संदिग्ध मौत
राजेंद्र के शव के साथ सागर से अपने गांव जाते समय अंजना की भी संदिग्ध मौत हो जाती है।शव वाहन के आगे चल रही पुलिस का दावा है कि अंजना चलती एंबुलेंस से कूद गई। इससे उसकी मौत हुई।
वह अंजना जो 2019 से अपने साथ हुए अन्याय की लड़ाई लड़ रही थी और दोनों ही हत्याकांड की प्रत्यक्षदर्शी रही।
शुरू हुई राजनीति
चुनावी साल में कांग्रेस ने इस मुद्दे को लपका। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के निर्देश पर घटना की जांच के लिए 6 सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया गया। प्रकरण में पूर्व गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह पर आरोपियों को संरक्षित करने के आरोप लगे।
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी भूपेंद्र सिंह के करीबियों के हत्या में शामिल होने के लगाए थे।इन आरोपों को उन्होंने तब सिरे से खारिज भी किया।
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश की। जांच भी शुरू हुई,लेकिन राजनीतिक पुट होने से जांच भी मंथर गति से चल रही है। स्थानीय पुलिस का रवैया तो और भी लचर रहा।
अब सुप्रीम कोर्ट की एंट्री
दलित संगठन ने पुलिस व सीबीआई की सुस्त चाल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दस्तक दी। संगठन की याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका में पूर्व गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह पर प्रकरणों के आरोपियों को संरक्षित करने का आरोप लगाया गया है।
याचिका में सीबीआई जांच और केस को दिल्ली ट्रांसफर करने की मांग भी की गई। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अब राज्य सरकार व जांच एजेंसी सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।