* सीएम बोले-ट्रायल में कुछ नहीं मिला,कांग्रेस कर रही दोमुंही बात * विजयवर्गीय ने ली जनप्रतिनिधियों की बैठक,कहा -मैं भी मालवा का बेटा,सरकार जवाबदेही से काम कर रही है
भोपाल(Janprachar.com)। राजधानी भोपाल में दुनिया की भीषणतम गैस त्रासदी का कारण बनी यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री में जमा कचरे के निष्पादन को लेकर पीथमपुर में तीखा विरोध हो रहा है। पीथमपुर में कचरा आज तड़के पहुंचा। देर शाम धार जिले के प्रभारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बैठक कर विरोध कर रहे लोगों से कहा – मैं भी मालवा का बेटा हूं। आप लोगों की मर्जी के बिना कुछ नहीं होगा। सरकार जवाबदेही से काम कर रही हैं।
भोपालवासियों ने 40 साल भोगा दर्द: सीएम
वहीं,दोपहर में मुख्यमंत्री मोहन यादव Mohan yadav ने भोपाल में प्रेस कांफ्रेंस कर भरोसा दिलाया कि कचरा निष्पादन को लेकर साल 2015 में ही ट्रायल हो चुका है। इसे नष्ट करने से न तो पर्यावरण को और न ही भू-जल को कोई नुकसान होगा। डॉ यादव ने कहा कि कचरा निष्पादन न्यायालय के निर्देश पर ही सुरक्षित तरीके से किया जाएगा।
कांग्रेस करती है दोमुंही बात
उन्होंने कहा कि भोपालवासी 40 साल से कचरे के साथ जी रहे हैं। जबकि हकीकत यह कि यूनियन कार्बाइड Union carbide कांग्रेस के शासनकाल में भोपाल में स्थापित की गई। साल 1984 में गैस रिसाव Gas tragedy का जो दर्द भोपालवासियों ने भोगा। वह भूला नहीं जा सकता,लेकिन कांग्रेस Congress दोमुंही बात करती है।
उन्होंने कांग्रेस पर राजनीति करने के आरोप लगाए। सीएम ने कहा कि संसदीय कार्यमंत्री बैठक कर इस बारे में आगे की कार्यवाही सुनिश्चित करेंगे। देर शाम बैठक शुरू हुई। इससे पहले विजयवर्गीय का उक्त बयान सामने आया।
बैठक में उठे ये अहम सवाल
1.यूनियन काबाईड 1969 में स्थापित हुई। साल 1984 में हादसा हुआ। इस दरम्यान जमा कचरे का इस अवधि में निपटान क्यों नहीं किया?
2.ट्रायल रिपोर्ट में कचरे में जमा केमिकल तो बताए ,लेकिन इनके कम्पोजीशन नहीं,क्यों?
3.कचरा जलाने से पैदा गैस या राख में कौन से मिश्रित तत्व होंगे?
4.गैस कांड ठंड के सीजन में हुआ था। कचरा जलाने के लिए क्या यह समय सही है?
सरकार के जवाब
बैठक में सरकार की ओर से आईएएस विवेक पोरवाल ने जवाब दिए। उन्होंने कहा –
1.कार्बाइड के कचरे में 60% मिट्टी है। कचरे के रसायन मिश्रण में
नेपथॉल-7 है जो 25 साल में अपने जहरीले प्रभाव खो देता है। हादसे को 40 साल हो गए।
2.दुनिया में कचरा निष्पादन को लेकर सर्वाधिक रिसर्च यूका के कचरे को लेकर हुए। ट्रायल के दौरान कोचिन से लाया गया सिंथेटिक कचरे को जलाकर इसके प्रभाव देखे गए। आईआईटी जैसे कई संस्थानों ने इस पर रिसर्च किया। इसके आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने 12,केंद्र ने 13बार कमेटियां बनाईं। इन सभी की रिपोर्ट कचरा निष्पादन के पक्ष में हैं। कचरा जलाने के लंबे ट्रायल के बाद इसकी अनुमति दी गई।
3.वहीं,संचालक गैस राहत स्वतंत्र कुमार सिंह ने कहा कि पूरे कचरे को जलाने में करीब 3 से 6 महीने तक लग सकते हैं,लिहाजा ठंड के सीजन पर संदेह निर्मूल है।
कहां जलेगा कचरा ?
यूका में जमा 337 मीट्रिक टन रासायनिक कचरे से भरे 12 कंटेनर बुधवार रात 9 बजे भोपाल से पीथमपुर के लिए रवाना किए गए थे। कड़ी सुरक्षा के बीच सभी कंटेनर सुबह 4:20 बजे पीथमपुर के आशापुरा स्थित रामकी फैक्ट्री पहुंचे। यहां उच्च ताप वाले इंसीनेटर में इसे जलाया जाएगा।
शुक्रवार को पीथमपुर बंद का ऐलान
इधर,पीथमपुर में लोगों और विभिन्न संगठनों ने कचरा यहां जलाए जाने के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया। करीब 40 युवा तो अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। पीथमपुर बचाओ समिति ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। 3 जनवरी को पीथमपुर बंद का ऐलान किया गया है। स्थानीय नेताओं बंद के समर्थन के लिए घर-घर जाकर लोगों से इसमें शामिल होने की अपील की है।
कांग्रेस का रुख
इधर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस मुद्दे पर पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन से मुलाकात की। जीतू पटवारी ने कहा-मेरा सीएम डॉ. मोहन यादव से फिर अनुरोध है कि पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड का कचरा जलाने से रोका जाए, इससे आने वाली कई पीढ़ियां प्रभावित होंगी।