MP: वीरा राणा नहीं बन सकीं राज्य निर्वाचन आयुक्त

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** मनोज श्रीवास्तव बने मप्र राज्य निर्वाचन आयुक्त
** वीरा राणा समेत अन्य अधिकारी दौड़ से बाहर
** सिया अध्यक्ष की दौड़ में कई सेवानिवृत अफसर

भोपाल(Janprachar.com)। सेवानिवृति बाद राज्य निर्वाचन आयुक्त जैसे अहम पद पर पुनर्वास की आस लगाई,वीरा राणा को दूसरी बार इस मामले में निराशा का सामना करना पड़ा। इससे पहले गत सितंबर में सेवानिवृत्ति बाद उन्हें निर्वाचन आयुक्त बनाया जाना लगभग तय था,लेकिन ऐसा हो नहीं सका। शासन ने राणा से एक साल सीनियर रहे रिटायर्ड आईएएस मनोज श्रीवास्तव को यह दायित्व सौंपा है। मनोज राज्य पुनर्गठन आयोग के सदस्य भी हैं।

 कार्यकाल छह माह पहले ही खत्म 
निवर्तमान राज्य निर्वाचन आयुक्त बीपी सिंह का कार्यकाल छह माह पहले ही खत्म हो गया था। तब उन्होंने स्टाफ को हाई-टी देकर एक तरह से अपनी कार्यमुक्ति और राणा की इस पद पर ताजपोशी की तैयारी कर ली थी,लेकिन ऐन मौके पर सीएस पद को लेकर बदले समीकरण और इस पद पर केंद्र की ओर से राणा के ही बैच के अनुराग जैन की पदस्थापना के बाद समीकरण बदल गए।

पद की दौड़ से बाहर

राणा पहले अक्टूबर में और अब इस पद की दौड़ से बाहर हुईं। दावेदारी बीते माह सेवानिवृत मलय श्रीवास्तव की भी रही,लेकिन उनके नाम पर कोई गौर ही नहीं हुआ। प्रदेश में अभी सिया{Madhya Pradesh State Level Environment Impact Assessment Authority (SEIAA) } के चैयरमेन का पद रिक्त है,लेकिन इस पद के लिए भी कई रिटायर्ड अधिकारी दौड़ में हैं।

प्रापर्टी के खुलासे ने बदला माहौल
राजधानी भोपाल में हाल ही में पड़े छापों के दौरान एक पूर्व मुख्य सचिव, कुछ अन्य सेवानिवृत व कार्यरत आला अधिकारियों का जमीन प्रेम सामने आया,उससे भी नई नियुक्तियों को लेकर सरकार सतर्क है।

हालांकि,मंडीदीप-इंदौर की प्रस्तावित सड़क के लिए जमीन अधिग्रहण खेल में भी एक अधिकारी का नाम सामने आने के बाद उन्हें नवाजा गया,लेकिन खेल शुरू होने से पहले सड़क निरस्त हो गई।इसके चलते उन्हें बेदाग मान लिया गया।

राजधानी के समीपस्थ चंदनपुरा में एक संत व एक अधिकारी ने उस वक्त जमीन खरीद ली थी तब यह वन क्षेत्र था। इसी क्षेत्र में आज एक बड़ा निजी स्कूल भी है।