मप्र में अल्प वर्षा ने बिगाड़े हालात,बांधों से मिलेगा सिंचाई के लिए पानी: मुख्यमंत्री

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सिंचाई के लिए बांधों से दिया जाएगा पानी   *CM ने बुलाई उच्चस्तरीय बैठक,दिए निर्देश   *बिजली व्यवस्था बेहतर बनाने की हिदायत   *संकट में ​सरकार किसानों के साथ: सीएम  *जल्दी बुलाई जाएगी जल समिति की बैठक

भोपाल(Janprachar.com)। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अल्पवर्षा के कारण अनेक जिलों में खरीफ की फसल प्रभावित हुई है। सरकार किसान को हर संकट से बाहर लाने का प्रयास करेगी। उन्होंने अधिकारियों को​ निर्देशित किया कि जहां जरूरत है,वहां बांधों से सिंचाई के लिए पानी दिया जाए। बिजली की व्यवस्था भी बेहतर की जाए।

चित्रकूट में जन आशीर्वाद यात्रा शुभारंभ कार्यक्रम से लौटने के बाद मुख्यमंत्री ने खेती से जुड़े संबंधित विभागों के अधिकारियों की बैठक बुलाई। चौहान ने कहा है कि अल्पवर्षा के कारण प्रदेश में खरीफ फसलों के बचाने, बिजली की बढ़ती मांग, ग्रामीण युवाओं को रोजगार देने और पेयजल की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से जारी रखने की संभावित चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए राज्य सरकार पूरी ताकत से काम करेगी। संकट की इस घड़ी में राज्य सरकार पूरी तरह किसानों के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा है कि वे भगवान महाकाल से प्रार्थना करने कल उज्जैन जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अगस्त में वर्षा बहुत कम हुई है। अल्पवर्षा के कारण फसलें प्रभावित हो रही हैं। खरीफ की फसलें संकट में हैं। इस संकट की स्थिति से निपटने के लिए पूरी ताकत से काम करेंगे। बिजली की डिमांड भी बढ़ गई है। इसके लिए बेहतर व्यवस्था भी करेंगे । डेम से पानी छोड़कर फसलों को बचाया जाएगा । मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि ग्रामीण युवाओं को रोजगार देने की व्यवस्था पर भी ध्यान दिया जाता रहेगा। पेयजल और निस्तार के पानी की व्यवस्था करेंगे।

मुख्यमंत्री चौहान ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जल उपयोगिता समिति की बैठक जल्द कर लें। जहां पानी उपलब्ध है वहां डेम से पानी छोड़ने की व्यवस्था करें। डेमों का परीक्षण कर लें। डेमों में अभी कितना पानी उपलब्ध है, इसकी जानकारी भी लें। जिला प्रशासन को आवश्यक निर्देश दिए जाएं। किसानों को सिंचाई के संबंध में एडवाइजरी जारी करें। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि बिजली की बेहतर व्यवस्था करें।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि अल्प वर्षा होने के कारण किसान चिंतित है। किसान चिंता न करें, सरकार हर संकट से निपटने के लिए उनके साथ में है। उन्होंने कहा कि बारिश कम होने के कारण बिजली की मांग बढ़ गई है। पहले 7 हजार मेगावाट की आवश्यकता थी जो बढ़कर 15 हजार मेगावाट की मांग बढ़ गई है।

फसल उत्पादन का पेटर्न बदलें किसान: सीएम
बैठक के बाद मुख्यमंत्री सीहोर जिले के औद्योगिक क्षेत्र बडियाखेड़ी पहुंचे। यहां उन्होंने आईटीसी द्वारा डेढ़ हजार करोड़ रुपए की लागत से तैयार की जाने वाली दो इकाई इंटीग्रेटेड फूड मैन्यूफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स फैसिलिटी और सस्टेनेबल पैकेजिंग प्रोडक्ट्स मैन्यूफैक्चरिंग फैसिलिटी का शिलान्यास किया। ये दोनों इकाइयाँ 57 एकड़ में लगेंगी। इससे 5000 लोगों को रोजगार मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कहा कि फसल नुकसान से बचने और खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए फसल उत्पादन के पैटर्न को बदलना होगा। परंपरागत फसलों के साथ-साथ व्यावसायिक फसलों जैसे औषधीय फसलों का भी उत्पादन भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग फसलों की किस्मों से किसानों को अधिक से अधिक लाभ हो सके। इसके लिए आईटीसी ने 7000 एकड़ में तुलसी, अश्वगंधा, कलौंजी की खेती की है। उन्होंने कहा कि खेती पर आधारित उद्योग धंधे लगाने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है, ताकि किसानों को अपनी फसलों का अच्छा दाम और स्थानीय नागरिकों को रोजगार मिले।

जीआईएस में दिया था निवेश प्रस्ताव

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में 15 लाख 42 हजार 750 करोड़ रुपए के निवेश के प्रस्ताव आए हैं। आईटीसी कंपनी ने भी प्रस्ताव दिया था जिसके तहत बड़ियाखेड़ी में 1500 करोड रुपए का निवेश हो रहा है। इस फूड प्लांट में आईटीसी के विश्वस्तरीय भारतीय ब्रांड जैसे देश का नंबर-1 आटा ब्रांड आशीर्वाद,सनफीस्ट बिस्कुट और यिप्पी नूडल्स का उत्पादन होगा, जबकि मोल्डेड फाइबर प्रोडक्ट्स प्लांट सस्टेनेबल पैकेजिंग के क्षेत्र में नए मानक बनाएगा। इससे इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं, एफएमसीजी और फूड एवं बेबरेज सेक्टर में पैकेजिंग के लिए प्लास्टिक का विकल्प मिलेगा। सीहोर में फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में आईटीसी का यह निवेश राज्य के मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में मूल्य सृजित करेगा और एग्री-वैल्यू चेन में सहयोग देगा। आईटीसी लिमिटेड के चेयरमैन संजीव पुरी ने सीहोर में आईटीसी की नई निवेश परियोजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी।