हिन्दी लेखिका संघ भोपाल की गोष्ठी; प्रदूषण के लिए प्रकृति नहीं,हम दोषी : माहेश्वरी

भोपाल,जनप्रचार। हिन्दी लेखिका संघ भोपाल की माह जून 2023 की मासिक गोष्ठी पर्यावरण विषय पर स्थानीय विश्व संवाद केंद्र में आयोजित की गयी।

इस सफल आयोजन में मुख्य अतिथि पर्यावरणविद श्रीराम माहेश्वरी ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रकृति पर्यावरण को दूषित नहीं कर रही , बल्कि हम मनुष्य प्रकृति को मलिन कर रहे हैं ।

प्रकृति तो समय-समय पर हमें संकेत देती रहती है , अपना क्रोध प्रकट करती रहती है कि अब भी समय है संभल जाओ , परंतु मनुष्य उन संकेतों को अनदेखा कर देता है ।

मनुष्य आपदा को रोक नहीं सकता , बचाव तो कर सकता है । जन जागरूकता लाकर पर्यावरण को संरक्षित करके अगली पीढ़ी को सौंपना हमारा परम कर्त्तव्य है ।

प्रदूषण आज की ज्वलंत समस्या: उर्मी

सारस्वत अतिथि कांति शुक्ला उर्मी ने अपने उद्बोधन में कहा कि पर्यावरण प्रदूषण आज की ज्वलंत समस्या है । मनुष्य ने प्रकृति के साथ जो खिलवाड़ किया है , उसका प्रतिकार भी हमें देखने को मिल रहा है । जीव जगत और प्रकृति में सह अस्तित्व की भावना होना आवश्यक है प्रकृति को बनाए रखने के लिए । मनुष्य द्वारा प्रकृति का असंतुलित उपयोग करने से प्रकृति अपना कुपित रूप हमें समय समय पर दिखाती रहती है । जबकि भारतीय संस्कृति में पर्यावरण के प्रति सजग और सतर्क रहने की सीख दी गई , जिसे हमने भूला दिया । अब भी समय है हम संभल जाएं और प्रकृति को बचाने में सार्थक सहयोग दें ।

दस पुत्रों के बराबर एक वृक्ष: डॉ. कुंकुम गुप्ता

अध्यक्ष डॉ. कुंकुम गुप्ता वरिष्ठ साहित्यकार एवं अध्यक्ष हिन्दी लेखिका संघ म.प्र.भोपाल ने अतिथियों का स्वागत किया और कहा कि प्रकृति को बचाना हम सबका कर्त्तव्य है । वृक्ष का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि दस कुओं के बराबर एक बावड़ी और दस बावड़ी के बराबर एक तालाब और दस तालाबों के बराबर एक पुत्र और दस पुत्रों के बराबर एक वृक्ष होता है l

इसलिए हम न केवल अपनी कलम से पर्यावरण की बात करें , बल्कि उसे अपने व्यवहार में भी लाकर प्रकृति को सजाएं , संवारे । प्रकृति का अनावश्यक दोहन ना करें । कार्यक्रम के शुभारंभ में माँ सरस्वती के समक्ष माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के पश्चात रूपाली सक्सेना ने स्वरचित सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। तत्पश्चात रचनाकार लेखिकाओं ने पर्यावरण पर एक से बढ़कर एक रचनाएँ सुनाई और पर्यावरण बचाने का सार्थक संदेश दिया ।

विविध विषयों पर इन्होंने भी ​व्यक्त किए विचार

डॉ प्रभा मिश्रा ने अपना पानी बचाकर रखें है कंवल, डॉक्टर रेखा भटनागर ने देश की धरती करे पुकार, वृक्ष लगाकर करो श्रृंगार , कुसुम श्रीवास्तव ने खुद जियें औरों को भी जीने दें हम , करुणा श्रीवास्तव ने वृक्ष लगाओ आज ,अगर चाहते सुखमय जीवन , आशा सक्सेना ने तकनीक विस्तृत हुईं, चला विकट व्यापार, अनीता सक्सेना ने चली नहीं पुरवैया वन में , सूख गई है नदिया घर में , कल्पना विजय ने चिड़े ने चिड़िया से कहा , संध्या शर्मा ने एक पेड़ हमको लगाना है, पाल पोसकर उसे बढ़ाना है , साधना श्रीवास्तव ने कथनी और करनी में है कितना अंतर , अंतर्मन में उठ रहा मेरे एक बवंडर , नविता जौहरी ने ‘जिससे है साँसों की सरगम प्रकृति की शोभा है अनुपम , नीना सिंह सोलंकी ने लघुकथा दोस्त , डाॅ. सीमा अग्रवाल ने आओ मिलकर धरती को स्वर्ग सा सुंदर बनाएं , सुनीता शर्मा सिद्धि ने गाँव गली शहर बस्ती में सबको यह सिखाएंगे , भारत स्वच्छ बनाएंगे, चंदा पालीवाल ने मत काटो इन पेड़ों को , इन्हें थोड़ा और तो बढ़ने दो , खंजन सिन्हा ने सरिता के साथ हम इंसान कभी न छेड़ेंगे कोई तान , रंजना शर्मा ने लघुकथा भावी सूचना सुनाकर सभी का मन मोह लिया । गोष्ठी का कुशल संचालन मनोरमा पंत ने किया एवं आभार डॉ. वर्षा चौबे ने दिया।

गोष्ठी में सभी लेखिकाओं द्वारा पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण की सामूहिक प्रतिज्ञा भी ली गई ।

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