शमशाबाद विधानसभा: यहां अब तक सिर्फ एक बार जीती कांग्रेस

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रवि अवस्थी,भोपाल। Shamshabad Assembly विशाल जलाशय किनारे बसे नगर की छटां ही कुछ और होती है।

विदिशा जिले का शमशाबाद ऐसा ही एक नगर है..जिसे संजय सागर बांध की सौगात मिली..नगर किनारे समुद्र सा नजारा बना तो आध्यात्मिक व धार्मिक आस्था रखने वाले नगरवासियों ने बांध किनारे द्वारकाधीश मंदिर की स्थापना कर डाली…

इसमें आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों का भी सहयोग मिला..जी हां हम बात कर रहे हैं,विदिशा जिले की शमशाबाद विधानसभा सीट का..जो अपने ऐतिहासिक महत्व के लिए कभी सूर्यनगर के नाम से जानी जाती रही…

(Sanjay Sagar Dam near Shamshabad)

46 सालों में सिर्फ एक बार जीती कांग्रेस
शमशाबाद विदिशा जिले में स्थित 5 विधानसभा क्षेत्रों में से एक है..शमशाबाद शहर स्वयं सागर लोकसभा सीट का हिस्सा है,लेकिन विदिशा जिले से भी इस सीट का गहरा नाता है..इस जिले की तीनों तहसील शमशाबाद,नटेरन व विदिशा के सभी 296 गांव इसका हिस्सा हैं..करीब 1लाख 94 हजार मतदाताओं वाले इस विधानसभा क्षेत्र में चुनाव के वक्त सवा दो सौ से अधिक मतदान केंद्र बनाने होते हैं..शमशाबाद वर्ष 1977 में अस्तित्व में आई..इससे पहले यह क्षेत्र बासौदा और विदिशा विधानसभा में आता था..अलग विधानसभा क्षेत्र बनने से लेकर अब तक यहां हुए 10 आम चुनाव में कांग्रेस सिर्फ एक बार जीत हासिल कर पाई..शेष 9 बार बीजेपी या इसके पूर्ववर्ती संगठन ही अपना परचम फहराते रहे..अलबत्ता वर्ष 1998 के चुनाव में क्षेत्र में अपना प्रभाव रखने वाले रुद्रप्रताप सिंह निर्दलीय चुनाव लड़कर विधायक चुने गए..

बाद में वह भी भाजपा में शामिल हुए और वर्तमान में उनक बेटी राजश्री सिंह(in Photo) इस सीट से भाजपा की विधायक हैं..इनसे पहले सूर्यप्रकाश मीणा दस साल तक व वर्ष 2003 के चुनाव में पूर्व वित्त मंत्री राघवजी इस सीट से विधायक चुने गए ..।
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शमशाबाद से अब तक निर्वाचित विधायक व उनके दल
1977 : गिरीशचंद रामसहाय              जेएनपी
1980: बृजमोहनदास माहेश्वरी            भाजपा
1985: मर्तब सिंह                              कांग्रेस
1990: प्रेम नारायण शर्मा                  भाजपा
1993: प्रेम नारायण शर्मा                  भाजपा
1998: रुद्रप्रताप सिंह                        निर्दलीय
2003: राघवजी                                भाजपा
2008: सूर्य प्रकाश मीणा                  भाजपा
2013: सूर्य प्रकाश मीणा                  भाजपा
2018: राजश्री सिंह                          भाजपा
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चुनाव को लेकर सरगर्मियां फिर तेज
शमशाबाद विधानसभा क्षेत्र में चुनाव को लेकर फिर सरगर्मियां तेज हैं…। भाजपा इस सीट पर काबिज होने की पूरी कोशिश कर रही है। अगले चुनाव में टिकट को लेकर मौजूदा विधायक राजश्री की दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही है..लेकिन उनके अलावा पूर्व मंत्री सूर्यप्रकाश मीणा भी सक्रिय हैं..वहीं कांग्रेस की पराजित प्रत्याशी ज्योत्सना यादव भी सतत रूप से भ्रमण कर मतदाताओं से संपर्क में जुटी हुई हैं…कांग्रेस की ओर से ज्योत्सना पुनः टिकट के लिए प्रयासरत हैं.. इससे पहले वह दो बार चुनाव लड़ीं लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा ..

दरअसल, शमशाबाद में यादव मतदाताओं की भी खासी संख्या है..लेकिन इस वर्ग के मतदाता जिस प्रत्याशी के साथ खड़े होते हैं तो दूसरे अन्य वर्ग इसके खिलाफ मतदान करते हैं..इसके चलते यादव समाज को अब तक क्षेत्र से प्रतिनिधित्व नहीं मिल सका। शमशाबाद में राजपूत व यादव समाज के लगभग बराबर मतदाता है..और राजपूत समाज के उम्मीदवार को अन्य वर्गों का साथ मिलता रहा है…
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2018 के चुनाव में इन्हें मिले इतने वोट
भाजपा की राजश्री सिंह को 62607 मत
कांग्रेस की ज्योत्सना यादव को 55267 मत
निर्दलीय नारायण सिंह कुशवाह को 6027
बसपा के महाराज सिंह अहिरवार 1995
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बायपास मार्ग का मुद्दा अब भी कायम
शमशाबाद में बायपास मार्ग की मांग एक बडा मुददा रही है.. बताया जाता है कि राज्य सरकार ने यहां बायपास मार्ग स्वीकृत कर दिया है..इसका निर्माण शुरु होना प्रस्तावित है…जातिगत समीकरण की बात की जाए तो वर्ष 2018 के चुनाव में कुशवाहा समाज से नारायण सिंह कुशवाह ने बतौर निर्दलीय उम्मीदवार करीब 6 हजार मत हासिल किए..

वही बसपा प्रत्याशी महाराज सिंह अहिरवार ने 2 हजार मत हासिल किए..इस तरह कुशवाहा व अजा वर्ग के मतों के विभाजन का नुकसान कांग्रेस को उठाना पड़ा— जानकारों की मानें तो वोट काटू सियासी समीकरण अगले चुनाव में भी बनने के आसार हैं… इन समीकरणों के चलते 2023 के चुनाव में किसके सिर सजेगा ताज — यह जानने नतीजे आने तक करना होगा इंतजार —-
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शमशाबाद में जातीय समीकरण (अनुमानित)
कुल मतदाता                    1,94,858
दलित-                            27 हजार
यादव                              25 हजार
कुशवाह                         19 हजार
मीणा                             32 हजार
रघुवंशी                          17 हजार
ब्राह्मण                           16 हजार
अन्य                                    शेष