सूत्रों के अनुसार,उक्त विद्यालय में 482 बच्चे अध्ययनरत हैं। इनमें 132 बच्चों ने आरटीई अंतर्गत शाला में प्रवेश लिया था। विद्यार्थी व शाला का भवन पूर्ववत रहेगा। अलबत्ता शाला में शिक्षकों की भर्ती नए सिरे से होगी।
सूत्रों का दावा है कि MPPGCL यानी मप्र पावर जनरेटिंग कंपनी द्वारा संचालित उक्त विद्यालय को योजनाबद्ध तरीके से पहले बंद किया गया, फिर निजीकरण की शुरुआत हुई। वर्ष 1986 से संचालित इस विद्यालय का इतिहास गौरवमयी रहा है।
आलम यह ,कि इन शिक्षकों ,कर्मचारियों की भविष्य निधि की प्रक्रिया भी आधी-अधूरी है। इसके चलते ये अपनी जमा पूंजी भी जरूरत के वक्त नहीं निकाल पा रहे हैं।
उक्त विद्यालय के नजदीक ही देशी-विदेशी शराब की एक नई दुकान खुल गई है।